खुशखबरीः गढ़वाल विवि और एसजीआरआर को मिला नैक ‘ए’ ग्रेड
- गढ़वाल विवि को 3.11 और एसजीआरआर पीजी कॉलेज को 3.04 सीजीपीए।
- पूर्व में विवि को मिला हुआ था बी प्लस ग्रेड।
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हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल केंद्रीय विश्वविद्यालय और एसजीआरआर पीजी कॉलेज देहरादून ने शिक्षा की गुणवत्ता के पैमानों पर सर्वोच्च स्थान हासिल किया है। दोनों ही संस्थानों को नेशनल एसेसमेंट एंड एक्रिडिएशन काउंसिल (नैक) ने ए ग्रेड से नवाजा है। गढ़वाल विवि को 3.11 और एसजीआरआर पीजी कॉलेज को 3.04 सीजीपीए दिया गया है। यह गढ़वाल विवि और इसके संबद्ध कॉलेजों का सर्वोच्च ग्रेड है।
गढ़वाल विवि को पूर्व में बी प्लस ग्रेड मिला हुआ था। लंबे समय से नैक का निरीक्षण नहीं हुआ था। नए कुलपति प्रो. जवाहर लाल कौल के आने के बाद प्रक्रिया शुरू हुई और इस साल 3.11 सीजीपीए के साथ गढ़वाल विवि को ए ग्रेड मिल गया। विवि के कुलपति प्रो. कौल ने कहा कि यह अभी शुरुआत है।
वह गुणवत्ता के इन पैमानों पर खरा उतरने की और चुनौतियों से भी पार पाने के लिए प्रयासरत रहेंगे। दूसरी ओर, एसजीआरआर पीजी कॉलेज को पूर्व में 2.63 सीजीपीए मिला हुआ था। हाल ही में निरीक्षण होने के बाद जो रिपोर्ट आई है, उसमें कॉलेज को 3.04 सीजीपीए के साथ ए ग्रेड मिला है।
इसमें खास बात यह भी है कि कॉलेज में नैक ने जियोलॉजी के म्यूजियम को एक्सीलेंट, कैंपस को शानदार और कॉलेज प्रबंधन और प्राचार्य की कार्यप्रणाली को भी बेहतरीन बताया है। कॉलेज प्राचार्य प्रो. वीए बौड़ाई ने बताया कि उनकी अत्याधुनिक लाइब्रेरी की भी प्रशंसा की गई है। लाइब्रेरी में दृष्टिबाधित छात्रों के लिए अलग से सॉफ्टवेयर की व्यवस्था को भी नैक ने सराहा है।
प्रदेश के इन कॉलेजों को भी मिला है नैक ग्रेड
प्रदेश में ऋषिकेश पीजी कॉलेज को पूर्व में ए ग्रेड मिला हुआ था लेकिन अब कॉलेज के पास बी ग्रेड है। एमकेपी पीजी कॉलेज को भी 2.85 सीजीपीए के साथ बी ग्रेड मिला हुआ है। इसके अलावा डीबीएस पीजी कॉलेज को भी बी ग्रेड मिला हुआ है। नैक में 2.01 से 3.0 सीजीपीए तक बी ग्रेड और 3.01 से ऊपर ए ग्रेड मिलता है।
यह होगा फायदा
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने साफ निर्देश दिए हुए हैं कि यूजीसी से ग्रांट पाने के लिए कॉलेज या विश्वविद्यालय को नैक के पैमाने पर खरा उतरना जरूरी है। ग्रेड मिलने के बाद गढ़वाल विवि और एसजीआरआर पीजी कॉलेज को यूजीसी से ग्रांट मिलना आसान हो जाएगा। दूसरी ओर, दोनों ही संस्थानों की राष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान कायम होगी।