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इंटरनेशनल और ग्लोबल के नाम पर शिक्षा का 'गंदा खेल'

Sun, 10 Apr 2016 11:36 AM IST
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव
शाहनवाज आलम/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sun, 10 Apr 2016 11:36 AM IST
सार

  • इनके नाम पर ढीली हो रही है अभिभावकों की जेब
  • इनके नाम पर ढीली हो रही है अभिभावकों की जेब
  • धड़ल्ले से हो रहे हैं इंटरनेशनल शब्द का इस्तेमाल

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fraud in schools in the name of international education

विस्तार

गुडग़ांव में ग्लोबल शिक्षा के नाम पर मोटी फीस चुकाने वाले अभिभावक होशियार हो जाए। ग्लोबल का रौब दिखाकर शहर के स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब पर डाका डाला जा रहा है। जबकि शहर में चुनिंदा इंटरनेशनल बोर्ड से मान्यता प्राप्त स्कूल है। गौरतलब है कि पिछले दिनों सेक्टर-31 स्थित एक स्कूल में फीस वृद्धि पर हुए हंगामें के वक्त खुद स्कूल प्रबंधन ने भी माना था।

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दरअसल, शहर के कई बड़े स्कूलों में इंटरनेशनल का तमगा लगा हुआ है। इसी के साथ अभिभावकों को ग्लोबल शिक्षा के नाम पर अधिक फीस वसूली जाती है। ग्लोबल के पीछे शिक्षा के ग्लोबल पैटर्न का तर्क दिया जाता है।
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इसके लिए सीबीएसई पैटर्न के मुकाबले करीब दोगुना फीस वसूली ली जा रही है। शिक्षाविदें की मानें तो स्कूलों द्वारा ग्लोबल के नाम पर अभिभावकों को गुमराह कर अधिक फीस वसूल रहे है। जबकि इसके लिए स्कूलों ने कोई सर्टिफिकेशन नहीं ले रखा है।
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ग्लोबल शिक्षा के विशेषज्ञ डॉ. डीके मुक्तेश का कहना है कि सीबीएसई और ग्लोबल शिक्षा एक साथ नहीं चलाई जा सकती है। इसके लिए स्कूल के पास अलग से बिल्डिंग और अंतरराष्ट्रीय प्रमाण पत्र देने वाली संस्था का ही करिकुलम चलाया जा सकता है। सीबीएसई या दूसरे बोर्ड का पाठ्यक्रम नहीं चला सकते हैं।

अध्यापकों के लिए भी अंतर्राष्ट्रीय शिक्षण संस्थान द्वारा एफिसिएंसी टेस्ट पास होना जरुरी है। हर साल ग्लोबल टीचर के लिए परीक्षा ली जाती है, जिसके बाद शिक्षकों को अंतरराष्ट्रीय रैंकिग दी जाती है। हालांकि शिक्षा विभाग द्वारा स्कूलों के साथ इंटरनेशनल या ग्लोबल शब्द का इस्तेमाल पर कोई रोक नहीं है।

क्या है ग्लोबल और सीबीएसई में अंतर
ग्लोबल और सीबीएसई दोनों के पाठ्यक्रम में पांच विषय पढ़ाना अनिवार्य है। सीबीएसई में पांच विषय के रुप में हिन्दी, अंग्रेजी,  गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान अनिवार्य है। जबकि ग्लोबल संस्था द्वारा मान्यता प्राप्त स्कूलों में ऐसा अनिवार्य नहीं है। छात्रों की रुचि के अनुसार विषय चयन की छूट दी जाती है।

क्या है ग्लोबल पैटर्न व शिक्षा
ग्लोबल शिक्षा अंतर्राष्ट्रीय स्तर की शिक्षा प्रणाली है। जिसमें अंतर्राष्ट्रीय संस्थान द्वारा मान्यता लेनी होती है। जिसके बाद उस बोर्ड का पाठ्यक्रम स्कूल में चलाना अनिवार्य होता है। इसमें सीबीएसई के पाठ्यक्रम शामिल नहीं किए जा सकते हैं। मुख्य रुप से ग्लोबल शिक्षा का सर्टिफिकेशन दुनिया भर में तीन संस्थाएं दे रही है। बोर्ड के संबंधित तीन या पांच सदस्यीय अधिकारी स्कूल का दौरा कर तय मानक को कसौटी पर परखने के स्कूल को सर्टिफिकेशन दिया जाता है।


कौन देता है ग्लोबल का प्रमाण
-इंटरनेशनल बैकालूरेट
-यूनिवर्सिटी ऑफ कैम्ब्रिज इंटरनेशनल एग्जामिनेशन
-स्वीडिश बोर्ड

रामफल श्योराण, महासचिव, अभिभावक एकता मंच: साइबर सिटी में बहुत सारे स्कूलों ने अपने नाम के साथ ग्लोबल या इंटरनेशनल जोड़ रखा है। इसके एवज में अधिक फीस ली जाती है। एक ही कैंपस में एक सीबीएसई और दूसरा ग्लोबल के नाम से चलाया जा रहा है। इसके लिए अभिभावक एकता मंच ने आवाज उठाया था, जिसके बाद सेक्टर-31 के स्कूल ने सामान्य फीस लेने की बात कही है। कई छोटे स्कूल भी इंटरनेशनल शब्द का इस्तेमाल कर अभिभावकों को अपने झांसा में लेने का काम करते हैं।

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