देशभर में रैगिंग के मामलों में गिरावट, पर यूपी सबसे आगे
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देशभर के केंद्रीय विश्वविद्यालयों, एनआईटी, आईआईटी में रैगिंग के मामलों में पिछले तीन सालों में बेशक गिरावट आई है, लेकिन उत्तर प्रदेश इस वर्ष अभी तक रैगिंग के मामलों में सबसे आगे है। पहले रैगिंग के मामलों में मध्य प्रदेश के बाद यूपी का नाम आता था। वहीं अप्रैल 2016 तक कुल 101 मामलों में से सर्वाधिक 17 मामले उत्तर प्रदेश में दर्ज किए गए हैं। इस साल चंडीगढ़ में एक भी मामला दर्ज नहीं हुआ है। वहीं, हरियाणा, हिमाचल व जम्मू-कश्मीर में एक-एक मामला तो उत्तराखंड में दो और पंजाब में तीन मामले सामने आए हैं।
मानव संसाधन विकास मंत्रालय के निर्देशों के तहत विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने केंद्रीय विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में रैगिंग रोकने के लिए ठोस कदम उठाए हैं। इससे 2013 की तुलना में 2015 और अप्रैल 2016 तक रैगिंग के मामलों में जबर्दस्त गिरावट आई है। 2013 से अप्रैल 2016 तक सरकार के पास कुल 1545 शिकायतें आई थीं, इनमें से 1445 मामलों का पूरी तरह निवारण कर दिया गया है। बाकी सौ मामलों की जांच चल रही है। उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक शिकायत गाजियाबाद, लखनऊ, गौतमबुद्ध नगर, इलाहाबाद, अलीगढ़ और बरेली में सामने आई हैं।
एंटी रैगिंग अभियान का असर
मानव संसाधन विकास मंत्रालय का मानना है कि यूजीसी के एंटी रैगिंग अभियान के चलते इन मामलों में गिरावट आ रही है। यूजीसी ने एंटी रैगिंग बेवसाइट (डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यूडॉटएंटीरैगिंगडॉटइन) के अलावा 12 भाषाओं में टोलफ्री नंबर 1800-180-5522 भी जारी किया है। इन शिकायतों के लिए छात्रों को फ्रेंडली प्लेटफार्म देने के लिए एंटी-रैगिंग मोबाइल एप्लीकेशन भी विकसित किया है, ताकि छात्र सीधे अपनी शिकायत पहुंचा सकें।
चंडीगढ़ और नॉर्थ-ईस्ट में सबसे कम शिकायत
देशभर के उच्च शिक्षा संस्थानों में चंडीगढ़ और नॉर्थ-ईस्ट से रैगिंग की सबसे कम शिकायतें मिली हैं। चंडीगढ़ में 2013 से अब तक महज दो, गोवा, मणिपुर, सिक्किम में एक, मेघालय और मिजोरम से दो-दो शिकायत पहुंची हैं।