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नकल रोक के लिए बनी कमेटी का अस्तित्व खत्म
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
Updated Sun, 13 Mar 2016 10:49 AM IST
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आपसी भाईचारे को खराब करने वाले शरारती तत्वों से निपटने व नकल की रोकथाम के लिए बनाई गई कमेटी का एक साल में ही अस्तित्व खत्म हो गया। चलने वाली बोर्ड की परीक्षाओं में दूर दूर तक कमेटी के सदस्य नजर नहीं आ रहे है।
इसकी वजह से शरारती तत्वों के हौंसले बुंलद है और वह कभी भी शांति को खराब कर सकते है। हांलाकि पुलिस के सहयोग से ही बीते वर्ष इस कमेटी का गठन किया गया था। इस बार पुलिस भी कमेटी के सदस्यों को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है।
काबिलेगोर है की परीक्षाओं में नकल को लेकर पिछले दो तीन वर्षों से छात्र गुटों के बीच खूनी संघर्ष चला आ रहा था। इसकी वजह से क्षेत्र की शांति व्यवस्था पर भी बुरा असर पड रहा था और सदियों से चले आ रहे भाईचारे पर बहुत बुरा प्रभाव देखने को मिला।
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बीते वर्ष माहौल इतना खराब हो गया की दोनो समाज के लोगों ने एक दूसरे समुदाय का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया। क्षेत्र के बुजुर्गो ने सदियो पुराने भाईचारे को बनाने के लिए एक पंचायत कर इस मामले का पटाक्ष कराया।
तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक कुमार ने दोनों समाज के कुछ लोगों को बुलाकर नकल रोकने व झगडों पर अंकुश लगाने की जिमेवारी सौंपी थी। इसके बाद शरारती तत्वों से निपटने व नकल को रोकने के लिए पुलिस के सहयोग से दोनों समुदाय के गणमान्य लोगों की एक संयुक्त कमेटी गठित की गई।
कमेटी के सदस्यों का प्रभाव काफी हद तक नजर आया और नकल कराने वाले शरारती तत्व दूर दूर तक नजर नहीं आये। बोर्ड की प्रथम समेस्टर की परीक्षाओं में भी कमेटी के सदस्य अपनी जिमेवारी निभाते नजर आये। लेकिन गत आठ मार्च से प्रारम्भ हुई बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं में कमेटी के सदस्य दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रहे है।
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इसकी वजह से शरारती तत्वों के हौंसले बुंलद है और वह कभी भी शांति को खराब कर सकते है। हांलाकि पुलिस के सहयोग से ही बीते वर्ष इस कमेटी का गठन किया गया था। इस बार पुलिस भी कमेटी के सदस्यों को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है।
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काबिलेगोर है की परीक्षाओं में नकल को लेकर पिछले दो तीन वर्षों से छात्र गुटों के बीच खूनी संघर्ष चला आ रहा था। इसकी वजह से क्षेत्र की शांति व्यवस्था पर भी बुरा असर पड रहा था और सदियों से चले आ रहे भाईचारे पर बहुत बुरा प्रभाव देखने को मिला।
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बीते वर्ष माहौल इतना खराब हो गया की दोनो समाज के लोगों ने एक दूसरे समुदाय का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया। क्षेत्र के बुजुर्गो ने सदियो पुराने भाईचारे को बनाने के लिए एक पंचायत कर इस मामले का पटाक्ष कराया।
तत्कालीन थाना प्रभारी अशोक कुमार ने दोनों समाज के कुछ लोगों को बुलाकर नकल रोकने व झगडों पर अंकुश लगाने की जिमेवारी सौंपी थी। इसके बाद शरारती तत्वों से निपटने व नकल को रोकने के लिए पुलिस के सहयोग से दोनों समुदाय के गणमान्य लोगों की एक संयुक्त कमेटी गठित की गई।
कमेटी के सदस्यों का प्रभाव काफी हद तक नजर आया और नकल कराने वाले शरारती तत्व दूर दूर तक नजर नहीं आये। बोर्ड की प्रथम समेस्टर की परीक्षाओं में भी कमेटी के सदस्य अपनी जिमेवारी निभाते नजर आये। लेकिन गत आठ मार्च से प्रारम्भ हुई बोर्ड की वार्षिक परीक्षाओं में कमेटी के सदस्य दूर दूर तक दिखाई नहीं दे रहे है।