मजदूरों के बच्चों ने मजबूरी को पछाड़ा, जमा दो में बने टॉपर
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निजी स्कूलों की महंगी चकाचौंध पर दिहाड़ी लगाकर परिवार का पेट पालने वाले हिमाचल के जिला सोलन के दो गरीब परिवारों के होनहार भारी पड़े हैं। जमा दो कक्षा के आर्टस संकाय में प्रदेश भर में 94.12 फीसदी अंक लेकर अव्वल रहने वाला मेधावी रोशन लाल एक पेंटर का बेटा है।
तो पत्थर तोड़ कर मजदूरी करने वाले प्रकाश चंद की होनहार बेटी दीक्षा ने 92.02 फीसदी अंक लेकर प्रदेश भर में चौथा स्थान हासिल करके एक मिसाल कायम की है। आर्थिक परिस्थितियां दोनों के भविष्य में बड़ी बाधा बनकर सामने आ रही हैं।
रोशन लाल का परिवार आईएएस की महंगी कोचिंग के लिए चिंतित है तो दीक्षा के पिता की आर्थिक स्थिति बेटी को चंडी से दूर सोलन या धर्मपुर कॉलेज में भेजने के पक्ष में नहीं हैं। लिहाजा आगे पढ़ाई छुड़ाने की बात उसके पिता कर रहे हैं। ऐसे में आर्थिक बदहाली दोनों के सुनहरे भविष्य में आड़े आ सकती हैं।
बच्चे होनहार पर आगे पढ़ाना मुश्किल
रोशन लाल को प्रदेश भर में प्रथम आने की सूचना अमर उजाला के माध्यम से ही पता लगी। वह अपने पिता के साथ अपने मूल निवास स्थान बिहार किसी रिश्तेदार की शादी में गया हुआ था। इस उपलब्धि पर उसके पिता फूले नहीं समाए। रोशन लाल ने कहा कि उसके पिता पेशे से पेंटर हैं।
वह दिहाड़ी पर काम करते हैं। वह शंकरपुर पीओ हसननगर टेपरी जिला मुज्जफरनगर बिहार राज्य के रहने वाले हैं। पिछले कई वर्षों से अर्की में किराये के कमरे में रह कर अपने बच्चों एवं परिवार की परवरिश कर रहे हैं। तीन भाई बहनों में वह सबसे बड़ा है।
उसका कहना है कि वह आईएएस बनना चाहता है। लेकिन इसकी कोचिंग काफी महंगी है और धन की कमी आढ़े आ सकती है। साल भर उसने नियमित रूप से पढ़ाई की तथा हमेशा अपने काम के प्रति गंभीरता से मेहनत की। जिसके परिणाम स्वरूप उसे कामयाबी हासिल हुई है। माता रंजना गृहिणी है।
वहीं चंडी स्कूल की होनहार दीक्षा के पिता प्रकाश चंद निजी ठेकेदारों के अधीन पत्थर तोड़ने का काम करते हैं। उनकी माता प्रोमिला देवी आशा वर्कर हाल ही में लगी हैं। घर में आर्थिक परिस्थितियां ठीक नहीं है। पांच भाई बहनों में वह सबसे बड़ी है।
पिता प्रकाश चंद का कहना है कि वह उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर है। वह दूर कॉलेज भेजने का खर्च वहन नहीं कर सकते। पांचों बच्चों में सबसे बड़ी दीक्षा की पढ़ाई तो जमा दो तक हो गई। लेकिन बाकी बच्चों की पढ़ाई भी जरूरी है।
मजदूर की बेटी ने झटका मेरिट में स्थान
हमीरपुर के अवाहदेवी में रावमापा चंबोह की छात्रा सुनीता ने जमा दो की आर्ट्स संकाय की परीक्षा में 11वां स्थान झटका है। सुनीता के पिता प्यार चंद मजदूरी करते हैं, जबकि माता आशा देवी गृहणी है। सुनीता का सपना आईपीएस अधिकारी बनना है।
परीक्षा के लिए सुनीता रोजाना आठ से दस घंटे पढ़ाई करती थी। सुनीता ने बताया कि ग्रेजुएशन करने के बाद वह आईपीएस बनूंगी। अपनी सफलता का श्रेय सुनीता ने अपने माता पिता और अध्यापकों को दिया है। सुनीता ने बताया कि हमें अभिभावकों का कहना मान कड़ी मेहनत करनी चाहिए। इसी से सफलता प्राप्त की जा सकी है।