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CBSE 12 में आल इंडिया टॉपर बनी 2 बेटियों से लीजिए टिप्स
ब्यूरो/अमर उजाला, कुरुक्षेत्र/करनाल
Updated Mon, 23 May 2016 10:04 AM IST
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पलक और तृतीय रही सौम्या उप्पल से लीजिए सफलता के टिप्स।
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सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में ऑल इंडिया मेरिट में द्वितीय रही पलक और तृतीय रही सौम्या उप्पल से लीजिए सफलता के टिप्स।
पैरेंट्स को और ज्यादा प्राउड फील कराना चाहती हूं- पलक
मैं देश के लिए बेहतर से बेहतर काम करना चाहती हूं, इसीलिए इंजीनियरिंग फील्ड चुना है। मैं अपने पैरेंट्स को और ज्यादा प्राउड फील कराना चाहती हूं। मेरे उपलब्धियों की वजह से वह और गौरवांवित हो ताकि समाज में बेटियों के लिए सकारात्मक संदेश जाए और बेटों के साथ बेटियों को भी बराबरी का हक मिले। यह कहना है सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में नॉन मेडिकल वर्ग में 99.2 प्रतिशत अंक हासिल कर देश भर में दूसरे नंबर पर रही पिहोवा की पलक गोयल का। टैगौर पब्लिक स्कूल पिहोवा की छात्रा पलक ने बताया कि वह अपनी बड़ी बहन इति गोयल से प्रेरित होकर ही इंजीनियरिंग सेक्टर में जाना चाहती है। इस फील्ड में काम करने वालों के लिए बहुत स्कोप है।
मैं भी इस फील्ड में आकर देश के विकास में अपना योगदान देना चाहती हूं। राइस कमिशन एजेंट सुभाष गोयल की पुत्री पलक ने बताया कि मेरे फीजिक्स में 100 में से 100 नंबर आए हैं। अन्य विषयों में 99-99 अंक मिले हैं। वह कहती है मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि देश भर में दूसरे नंबर आऊंगी, लेकिन अब एक-एक नंबर कटने का भी अफसोस है। उसने बताया कि पढ़ाई के लिए कभी तनाव नहीं लिया। शेड्यूल बनाकर कर हर काम किया। हर दिन दो-दो घंटे की शिफ्ट में करीब 8 घंटे पढ़ाई को दिए। मस्ती भी खूब की। सबके लिए समय तय किया था। पलक की मां रंजना गोयल कहती है कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। मेरी बेटी दस बेटों के बराबर है। भगवान ऐसी बेटी सबको दे। दोनों बेटियां पढ़ाई में अच्छी है। बड़ी बेटी ने भी हर बार स्कूल में टॉप किया। स्कूल के निदेशक कीमती लाल ने बताया पलक ने स्कूल को देशभर में पहचान दी है। स्कूल की ओर से उसे एक लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। उनका कहना था कि पिहोवा को देश में शायद ही कोई इससे पहले जानता होगा। लेकिन अब जब हमारे बच्चे टीवी पर आ रहे हैं तो देशभर में इस शहर की पहचान बनी है।
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पैरेंट्स को और ज्यादा प्राउड फील कराना चाहती हूं- पलक
मैं देश के लिए बेहतर से बेहतर काम करना चाहती हूं, इसीलिए इंजीनियरिंग फील्ड चुना है। मैं अपने पैरेंट्स को और ज्यादा प्राउड फील कराना चाहती हूं। मेरे उपलब्धियों की वजह से वह और गौरवांवित हो ताकि समाज में बेटियों के लिए सकारात्मक संदेश जाए और बेटों के साथ बेटियों को भी बराबरी का हक मिले। यह कहना है सीबीएसई 12वीं की परीक्षा में नॉन मेडिकल वर्ग में 99.2 प्रतिशत अंक हासिल कर देश भर में दूसरे नंबर पर रही पिहोवा की पलक गोयल का। टैगौर पब्लिक स्कूल पिहोवा की छात्रा पलक ने बताया कि वह अपनी बड़ी बहन इति गोयल से प्रेरित होकर ही इंजीनियरिंग सेक्टर में जाना चाहती है। इस फील्ड में काम करने वालों के लिए बहुत स्कोप है।
मैं भी इस फील्ड में आकर देश के विकास में अपना योगदान देना चाहती हूं। राइस कमिशन एजेंट सुभाष गोयल की पुत्री पलक ने बताया कि मेरे फीजिक्स में 100 में से 100 नंबर आए हैं। अन्य विषयों में 99-99 अंक मिले हैं। वह कहती है मुझे यह उम्मीद नहीं थी कि देश भर में दूसरे नंबर आऊंगी, लेकिन अब एक-एक नंबर कटने का भी अफसोस है। उसने बताया कि पढ़ाई के लिए कभी तनाव नहीं लिया। शेड्यूल बनाकर कर हर काम किया। हर दिन दो-दो घंटे की शिफ्ट में करीब 8 घंटे पढ़ाई को दिए। मस्ती भी खूब की। सबके लिए समय तय किया था। पलक की मां रंजना गोयल कहती है कि उन्हें अपनी बेटी पर गर्व है। मेरी बेटी दस बेटों के बराबर है। भगवान ऐसी बेटी सबको दे। दोनों बेटियां पढ़ाई में अच्छी है। बड़ी बेटी ने भी हर बार स्कूल में टॉप किया। स्कूल के निदेशक कीमती लाल ने बताया पलक ने स्कूल को देशभर में पहचान दी है। स्कूल की ओर से उसे एक लाख रुपये का इनाम दिया जाएगा। उनका कहना था कि पिहोवा को देश में शायद ही कोई इससे पहले जानता होगा। लेकिन अब जब हमारे बच्चे टीवी पर आ रहे हैं तो देशभर में इस शहर की पहचान बनी है।
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लक्ष्य निर्धारित करें, अंक कम आए तो घबराएं नहीं: सौम्या
ऑल इंडिया मेरिट में तीसरा स्थान हासिल करने वाली सौम्या उप्पल
सीबीएसई बोर्ड की 12वीं में कामर्स संकाय में ऑल इंडिया मेरिट में तीसरा स्थान हासिल करने वाली सौम्या उप्पल आईएएस ऑफिसर बनना चाहती है। सौम्या बचपन से ही ऊंचे इरादों के साथ पढ़ाई में बेहतर प्रदर्शन कर रही है। हर बार की तरह इस बार भी सौम्या ने कड़ी मेहनत से 99 फीसदी अंक हासिल किए। अब वह दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम आनर्स की पढ़ाई कर सिविल सर्विस में जाना चाहती है। सौम्या के पिता विपिन उप्पल की इलेक्ट्रानिक्स शॉप है और उनका एक बेटा डीपीएस स्कूल में पढ़ रहा है।
विपिन उप्पल का कहना है कि सौम्या बचपन से ही सिविल सर्विस में जाने का लक्ष्य निर्धारित किए हुए हैं। ऊंचे के इरादों के साथ शिक्षा में हमेशा उसका प्रदर्शन अच्छा रहा है। इस बार सौम्या ने कामर्स संकाय में 500 अंकों में से 495 अंक हासिल कर देशभर में तीसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने कहा कि वे बटियों के प्रति समाज की जो धारणा है, उसे बदलना चाहते हैं। इसलिए वह अपनी बेटी को आईएएस बनाना चाहते हैं। सौम्या की मां रुचिका उप्पल गृहिणी है।
अपनी बेटी की उपलब्धि पर उन्होंने कहा कि बेटियां किसी से कम नहीं है। जरूरत उन्हें मौका और प्रोत्साहन देने की है। सौम्या ने बताया कि बारहवीं कक्षा में प्रवेश करते ही उसने जिला टॉप करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, उसी के मुताबिक की पढ़ना शुरू किया। शुरुआत में वह दिन में पांच से सात घंटे पढ़ती थी। सौम्या ने कहा कि जिन विद्यार्थियों के अंक कम आए हैं, उनको निराश होने की जरूरत नहीं है। सकारात्मकता के साथ फिर से तैयारी में जुट जाएं, निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी।
विपिन उप्पल का कहना है कि सौम्या बचपन से ही सिविल सर्विस में जाने का लक्ष्य निर्धारित किए हुए हैं। ऊंचे के इरादों के साथ शिक्षा में हमेशा उसका प्रदर्शन अच्छा रहा है। इस बार सौम्या ने कामर्स संकाय में 500 अंकों में से 495 अंक हासिल कर देशभर में तीसरा स्थान हासिल किया है। उन्होंने कहा कि वे बटियों के प्रति समाज की जो धारणा है, उसे बदलना चाहते हैं। इसलिए वह अपनी बेटी को आईएएस बनाना चाहते हैं। सौम्या की मां रुचिका उप्पल गृहिणी है।
अपनी बेटी की उपलब्धि पर उन्होंने कहा कि बेटियां किसी से कम नहीं है। जरूरत उन्हें मौका और प्रोत्साहन देने की है। सौम्या ने बताया कि बारहवीं कक्षा में प्रवेश करते ही उसने जिला टॉप करने का लक्ष्य निर्धारित किया था, उसी के मुताबिक की पढ़ना शुरू किया। शुरुआत में वह दिन में पांच से सात घंटे पढ़ती थी। सौम्या ने कहा कि जिन विद्यार्थियों के अंक कम आए हैं, उनको निराश होने की जरूरत नहीं है। सकारात्मकता के साथ फिर से तैयारी में जुट जाएं, निश्चित तौर पर सफलता मिलेगी।