फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   cbse, school bag, private school, school, cbse school, new delhi, chandigarh

बस्ते के बोझ से दबे बच्चों के लिए cbse ने दी अच्छी खबर

Thu, 21 Apr 2016 04:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़। Updated Thu, 21 Apr 2016 04:01 PM IST
विज्ञापन
cbse, school bag, private school, school, cbse school, new delhi, chandigarh
भारी स्कूल बैग - फोटो : amar ujala
देश भर में बस्ते के बोझ से दबे जा रहे बच्चों के लिए एक अच्छी खबर है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) ने एक बार फिर से स्कूलों को बच्चों के बस्ते का बोझ कम करने की हिदायत दी है। स्कूलों को कहा गया है कि वह पाठ्य पुस्तकों की संख्या को स्कूल बैग से कम करें। इस प्रयास के लिए सीबीएसई की ओर से स्कूलों को सुझाव दिए गए हैं। सीबीएसई ने अभिभावकों पर बिना अतिरिक्त वित्तीय भार डाले इन सुझावों के सही क्रियान्वयन की बात कही है।
विज्ञापन


बस्ते के बोझ से बच्चों को हो रही परेशानियों को देखते सीबीएसई 2006, 2007 और 2008 में पाठ्यपुस्तकों को कम करने के सुझाव जारी कर चुका है। बोर्ड के सुझावों के बावजूद बच्चों के बस्ते से पुस्तकें कम होने के बजाए बढ़ती जा रही हैं। ऐसे में बोर्ड ने एक बार फिर से स्कूलों को सुझाव दिए हैं। सीबीएसई ने कहा है कि शिक्षक व अभिभावक इस बात को सुनिश्चित करें कि बच्चे टाइम टेबल के मुताबिक ही पुस्तकें लेकर जाएं। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि पाठ्यक्रम सह शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी) पर आधारित हो। बस्ते का बोझ कम करने के लिए गृहकार्य को क्रमबद्ध तरीके से दिया जाए। 
विज्ञापन


बोर्ड ने कहा है कि पुस्तकें नॉन-बायोडिग्रेडेबल शीट से कवर नहीं होनी चाहिए। स्कूल दूसरी कक्षा तक की पुस्तकों को स्कूल में ही रखने का प्रयास करें। एक अन्य उपाय स्कूलों में ही बस्ते को रखने का प्रबंध सुनिश्चित करना हो सकता है। स्कूलों में ही रेफरेंस बुक, स्पोर्ट्स उपकरण, वर्दी रखने के लिए रैक व लॉकर की व्यवस्था की जाए। बस्ते का बोझ कम करने के लिए शिक्षकों व अभिभावकों की काउंसिलिंग की सिफारिश भी सीबीएसई ने की है। रोजाना सह शैक्षणिक गतिविधियों का आयोजन करने के लिए भी कहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed