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दुनिया के कोने-कोने तक जाती हैं लड्डू गोपाल की मूर्ति, सौ करोड़ तक पहुंचता है बाजार
Sat, 21 Dec 2019 12:30 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Sat, 21 Dec 2019 12:30 AM IST
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लड्डू गोपाल की मूर्ति
- फोटो : अमर उजाला
वृंदावन में ठाकुर बांकेबिहारी जी की मान्यता देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी है। कृष्ण नगरी से हर वर्ष लड्डू गोपाल की मूर्ति की मांग रहती है। मूर्ति का कारोबार हर साल करीब सौ करोड़ रुपये का आंकड़ा छू लेता है। इस साल भी दुकानों पर उपलब्ध पीतल, अष्टधातु सहित संगमरकर की मूर्तियां श्रद्घालुओं को लुभा रही हैं।
कान्हा की नगरी में लड्डूगोपाल का बाजार दिसंबर माह सामान्य स्तर पर चल रहा है। दुकानों पर पीतल, अष्टधातु,काला पत्थर, संगमरमर, मकराना, फाइबर के लड्डू गोपाल,राधाकृष्ण, निताई गौर की मूर्तियां 150 रुपए से लेकर लाखों रुपए तक उपलब्ध हैं।
मूर्ति व ठाकुरजी श्रृंगार व्यापारी सोनू अग्रवाल ने बताया कि लड्डृ गोपाल एवं अन्य देवी देवताओं की मूर्ति उपलब्ध हैं। मार्च, जुलाई, अगस्त एवं सितंबर माह में मूर्ति ज्यादा खरीदी जाती हैं। यहां से देश के कोने कोने एवं विदेशों तक मूर्ति जाती हैं। वर्ष का मूर्ति बाजार करीब 100 करोड़ से अधिक पहुंच जाता है।
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कान्हा की नगरी में लड्डूगोपाल का बाजार दिसंबर माह सामान्य स्तर पर चल रहा है। दुकानों पर पीतल, अष्टधातु,काला पत्थर, संगमरमर, मकराना, फाइबर के लड्डू गोपाल,राधाकृष्ण, निताई गौर की मूर्तियां 150 रुपए से लेकर लाखों रुपए तक उपलब्ध हैं।
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मूर्ति व ठाकुरजी श्रृंगार व्यापारी सोनू अग्रवाल ने बताया कि लड्डृ गोपाल एवं अन्य देवी देवताओं की मूर्ति उपलब्ध हैं। मार्च, जुलाई, अगस्त एवं सितंबर माह में मूर्ति ज्यादा खरीदी जाती हैं। यहां से देश के कोने कोने एवं विदेशों तक मूर्ति जाती हैं। वर्ष का मूर्ति बाजार करीब 100 करोड़ से अधिक पहुंच जाता है।
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