15 शहरों में रिलांयस-बीपी करेगा घरों में गैस का वितरण, लाइसेंस लेने के लिए लगाई बोली
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शहरों में गैस वितरण (सीजीडी) का लाइसेंस देने के अब तक के सबसे बड़े और नौवें चरण के लिए बोली लगाने की अवधि मंगलवार शाम को समाप्त हो गई। सूत्रों के मुताबिक रिलायंस इंडस्ट्रीज और ब्रिटेन की बीपी पीएलसी की 50:50 संयुक्त उपक्रम कंपनी इंडिया गैस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने पहली बार शहरों में गैस वितरण के क्षेत्र में कदम बढ़ाते हुए 15 शहरों के लाइसेंस के लिए बोली लगाई है।
जबकि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में गैस की खुदरा आपूर्ति करने वाली कंपनी इंद्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (आईजीएल) ने 13 शहरों के लाइसेंस के लिए बोली लगाई है। वहीं, एसेल इन्फ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने सात शहरों के लिए बोली लगाई है।
174 जिलों के 86 परमिट
नौवें चरण में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 174 जिलों में सीएनजी और पाइप्ड कुकिंग गैस बेचने के लिए 86 परमिट पेश किए गए हैं। ये 86 परमिट 86 जॉगरैफिकल क्षेत्रों (जीए) के लिए हैं। हर एक जीए आसपास के कुछ जिलों को मिलाकर बनाया गया है।
86 परमिट के दायरे में देश का 24 फीसदी क्षेत्रफल और 29 फीसदी आबादी आती है। पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड (पीएनजीआरबी) के मुताबिक इस चरण में 70,000 करोड़ रुपये का निवेश होने का अनुमान है।
इन शहरों के लिए लाइसेंस की बोली
जिन प्रमुख शहरों के लिए सीजीडी लाइसेंस पेश किए जा रहे हैं, वे हैं मध्य प्रदेश में भोपाल, महाराष्ट्र में अहमदनगर, पंजाब में लुधियाना और जालंधर, राजस्थान में बाड़मेर, अलवर और कोटा, तमिलनाडु में कोयंबटूर और सेलम, उत्तर प्रदेश में इलाहाबाद, फैजाबाद, अमेठी और रायबरेली, उत्तराखंड में देहरादून और पश्चिम बंगाल में बर्दवान।
सरकार बढ़ाना चाहती है प्राकृतिक गैस का उपयोग
सरकार अगले कुछ साल में प्राथमिक गैस बास्केट में प्राकृतिक गैस का हिस्सा बढ़ाकर मौजूदा छह फीसदी से 15 फीसदी करना चाहती है। इस चरण का मकसद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2020 तक एक करोड़ घरों तक पाइप्ड कुकिंग गैस कनेक्शन पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा करना भी है। यह लक्ष्य मौजूदा कनेक्शन का करीब तीन गुना है।
इस नौवें चरण से पहले 91 जीए आईजीएल और गेल गैस लिमिटेड जैसी कंपनियों को दिए जा चुके हैं, जो 24 करोड़ की आबादी, 42 लाख घरेलू उपभोक्ताओं और 31 लाख सीएनजी वाहनों को सेवा दे रही हैं। इनमें से 56 जीए बोली प्रक्रिया के जरिए और शेष सरकार के मनोनयन से दिए गए हैं।
बदली गई हैं शर्तें
पिछले चरणों में एक पैसा की दर पर बोली लगने के बाद इस बार शर्तों में कुछ बदलाव किए गए हैं। इस बार बोली जमा करने वालों से यह बताने के लिए कहा गया है कि वे संचालन के पहले आठ साल में कितने सीएनजी स्टेशन स्थापित करेंगी और कितने घरेलू कुकिंग गैस कनेक्शन देंगी। पहले के आठ चक्रों में बोली लगाने वालों से सिर्फ पाइपलाइन का किराया कोट करने के लिए कहा गया था, जिसके जरिए शहर में गैस आपूर्ति की जाती है।