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स्टांप ड्यूटी में छूट से शिवराज सरकार के खजाने में आया 48 फीसदी अधिक राजस्व, रजिस्ट्री करना हुआ महंगा

Wed, 13 Jan 2021 01:43 PM IST
स्वाति सिंह बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: स्वाति सिंह Updated Wed, 13 Jan 2021 01:43 PM IST
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Shivraj government earn 48% revenue due to exemption in stamp duty, now registration in Madhya Pradesh became expensive
रियल एस्टेट - फोटो : pixabay

कोरोना वायरस महामारी के कारण संकट में गुजरे साल 2020 में मध्यप्रदेश सरकार ने नगरीय निकाय शुल्क में तीन में से दो फीसदी की छूट दी थी। नतीजन,  प्रदेश में साल 2019 के मुकाबले 2020 में 46 फीसदी रजिस्ट्री की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। बता दें कि साल 2019 में प्रदेश में केवल 1,07,470 रजिस्ट्री हुई थी। लेकिन कोरोना काल में मिली छूट के बाद 2020 में यह संख्या 1,57,090 रही। 

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जबकि पंजीयन विभाग ने लक्ष्य 919 करोड़ के मुकाबले 1359 करोड़ रुपये का राजस्व कमाया। जोकि बीते वर्ष की तुलना में लगभग 440 करोड़ रुपये अधिक है। 440 करोड़ स्र्पये अधिक है। अधिकारियों की मानें तो शिवराज सरकार से मिली छूट अन्य राज्य जैसे महाराष्ट्र और कर्नाटक से ज्यादा कारगर साबित हुआ।
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बता दें की मध्यप्रदेश में साल के आखिरी महीने दिसंबर में संपत्तियों के पंजीयन से सरकार के खजाने में 200 करोड़ रुपये से अधिक आए।  दिसंबर, 2019 से तुलना करें तो यह आय दोगुनी है। राज्य शासन ने नगर निगम और अन्य नगरीय निकायों की सीमा में संपत्ति की खरीदी-बिक्री पर स्टाम्प ड्यूटी पर दो फीसदी की छूट दी थी। यह छूट 31 दिसंबर तक ही थी जो गुरुवार को खत्म हो गई। छूट का फायदा लेने के लिए दिसंबर के पूरे महीने संपत्ति के पंजीयन भी खूब हुए।
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वहीं, छूट की अवधि खत्म होते ही पंजीयन कार्यालयों में संपत्ति के दस्तावेजों के पंजीयन में अचानक भारी गिरावट आ गई है। संपत्ति की रजिस्ट्रियां करीब आधी हो गई हैं। दिसंबर अंत तक तो हर दिन करीब 800 रजिस्ट्री होती थी, लेकिन नए साल में इनकी संख्या अचानक कम हो गई है।

जनवरी के पहले सप्ताह में यह आंकड़ा करीब 350 रजिस्ट्री पर आ गया है। इस तरह यह गिरावट आधी से भी ज्यादा है। संपत्ति के पंजीयन से टैक्स संग्रहण में कमी को देखते हुए पंजीयन और मुद्रांक विभाग को चिंता हुई। 

इसके अलावा संभावना जताई जा रही है कि एक अप्रैल से नई गाइडलाइन लागू हो सकती है। यानी शहर में जमीनों के भाव इस दिन से फिर नए सिरे से तय होंगे। राज्य सरकार ने पिछले साल दाम में कोई बढ़ोतरी नहीं की थी। 

इससे लोगों को राहत मिली थी, लेकिन आरआरसी के मकान का कंस्ट्रक्शन रेट 670 रुपए से बढ़ाकर 1022 रुपये कर दिया था। इससे मकान की रजिस्ट्री कराना महंगा हो गया था। नई गाइडलाइन एक अप्रैल 2021 से फिर लागू होगी। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है कि जमीनों के दाम बढ़ेंगे या नहीं।


गौरतलब है कि फिलहाल महाराष्ट्र में तीन फीसदी स्टांप ड्यूटी है, जबकि मेघालय में 9.9 फीसदी, मिजोरम में 9.0 फीसदी, नागालैंड में 8.25 फीसदी, असम में 8.25 फीसदी, केरल में 8.0 फीसदी और मध्यप्रदेश में 10.5 फीसदी स्टांप ड्यूटी है। 

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