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इको फ्रेंडली उद्योगों को नहीं लेना पड़ेगा पर्यावरण क्लीयरेंस
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, दिल्ली
Updated Sun, 06 Mar 2016 06:16 AM IST
सार
- पर्यावरण मंत्रालय ने कम प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को श्वेत श्रेणी में रखा है
- श्वेत श्रेणी के उद्योगों को वित्तीय सहायता के लिए भी मदद की जाएगी
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विस्तार
कम प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को अब पर्यावरण क्लीयरेंस नहीं लेना पडे़गा। पर्यावरण मंत्रालय ने ऐसे उद्योगों को श्वेत श्रेणी में रखा है। मंत्रालय ने नई श्रेणियां जारी करते हुए अधिक प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों को पर शिकंजा कसने का भी ऐलान किया है।
पर्यावरण राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि श्वेत श्रेणी के उद्योगों को वित्तीय सहायता के लिए भी मदद की जाएगी।
उद्योगों की श्रेणियां उनके प्र्रदूषण लोड के आधार पर तय की गई है। जिन उद्योगों का प्रदूषण सूचकांक 60 और उससे अधिक है उन्हें लाल श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह 41 से 59 सूचकांक वाले उद्योग ओरेंज और 21 से 40 सूचकांक वाले उद्योग ग्रीन श्रेणी में आएंगे।
पूर्व के वर्गीकरण से कई समस्याएं पैदा हो रही थीं और उससे उद्योगों का प्रदूषम स्तर भी स्पष्ट नहीं हो रहा था। नई श्रेणियों के निर्धारण से ये समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। वायु, जल और कचरे फैलाने की मात्रा के आधार पर नई श्रेणियां तय की गईं हैं।
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पर्यावरण राज्य मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा है कि श्वेत श्रेणी के उद्योगों को वित्तीय सहायता के लिए भी मदद की जाएगी।
उद्योगों की श्रेणियां उनके प्र्रदूषण लोड के आधार पर तय की गई है। जिन उद्योगों का प्रदूषण सूचकांक 60 और उससे अधिक है उन्हें लाल श्रेणी में रखा गया है। इसी तरह 41 से 59 सूचकांक वाले उद्योग ओरेंज और 21 से 40 सूचकांक वाले उद्योग ग्रीन श्रेणी में आएंगे।
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पूर्व के वर्गीकरण से कई समस्याएं पैदा हो रही थीं और उससे उद्योगों का प्रदूषम स्तर भी स्पष्ट नहीं हो रहा था। नई श्रेणियों के निर्धारण से ये समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। वायु, जल और कचरे फैलाने की मात्रा के आधार पर नई श्रेणियां तय की गईं हैं।
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