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GST: महंगा हो जाएगा फ्लैट का मेंटीनेंस चार्ज, सोसाइटी को कराना होगा रजिस्ट्रेशन
amarujala.com, Written By: अनंत पालीवाल
Updated Sat, 27 May 2017 04:02 PM IST
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- फोटो : amar ujala
वस्तु व सेवाकर (जीएसटी) के लागू होने से उन लोगों पर काफी असर पड़ेगा जो महानगरों में फ्लैट में रहते हैं और हर महीने मेंटीनेंस चार्ज अदा करते हैं। ऐसे लोगों पर भी असर पड़ने की संभावना है, जिनकी सोसाइटी का सालाना फंड 20 लाख रुपये से अधिक का है।
जीएसटी के लागू होने के बाद टैक्स में 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। अभी यह टैक्स 15.55 फीसदी है, जो कि 1 जुलाई के बाद 18 फीसदी हो जाएगा। हालांकि इसका असर उन लोगों पर ज्यादा पड़ेगा, जिनको 5 हजार रुपये से अधिक का मासिक मेंटीनेंस देना पड़ता है। इस मेंटीनेंस में प्रॉपर्टी टैक्स, स्टांप ड्यूटी और पानी व बिजली का बिल शामिल नहीं है।
सोसाइटी और RWA को कराना होगा रजिस्ट्रेशन
जीएसटी में लागू होने वाले इस नियम का असर उन सोसाइटी और RWA पर भी पड़ेगा, जिनका वार्षिक फंड 20 लाख रुपये से ज्यादा का है। टैक्स एक्सपर्ट सीए अतुल गर्ग ने amarujala.com को बताया कि जिन सोसाइटी और RWA ने अपना रजिस्ट्रेशन जीएसटी में नहीं कराया है, उनको अब ऐसा कराना जरुरी हो जाएगा। इसके अलावा जीएसटी में 37 अलग-अलग तरह के वार्षिक रिटर्न फाइल करने होंगे, जो कि पहले एक ही करना होता था।
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जीएसटी से पड़ेगा सोसाइटी के फंड पर असर पड़ेगा
सोसाइटी और RWA के पदाधिकारियों के मुताबिक इससे फंड के इस्तेमाल करने पर असर पड़ेगा, क्योंकि इस फंड का इस्तेमाल सोसाइटी में इमरजेंसी के दौरान होता है। कोई भी सोसाइटी इस फंड का इस्तेमाल तब तक नहीं करती है, जब तक कोई बड़ा खर्चा न आ जाएं। अब टैक्स ज्यादा लगने से उनको फंड का स्टेटस सही रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।
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जीएसटी के लागू होने के बाद टैक्स में 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी हो जाएगी। अभी यह टैक्स 15.55 फीसदी है, जो कि 1 जुलाई के बाद 18 फीसदी हो जाएगा। हालांकि इसका असर उन लोगों पर ज्यादा पड़ेगा, जिनको 5 हजार रुपये से अधिक का मासिक मेंटीनेंस देना पड़ता है। इस मेंटीनेंस में प्रॉपर्टी टैक्स, स्टांप ड्यूटी और पानी व बिजली का बिल शामिल नहीं है।
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सोसाइटी और RWA को कराना होगा रजिस्ट्रेशन
जीएसटी में लागू होने वाले इस नियम का असर उन सोसाइटी और RWA पर भी पड़ेगा, जिनका वार्षिक फंड 20 लाख रुपये से ज्यादा का है। टैक्स एक्सपर्ट सीए अतुल गर्ग ने amarujala.com को बताया कि जिन सोसाइटी और RWA ने अपना रजिस्ट्रेशन जीएसटी में नहीं कराया है, उनको अब ऐसा कराना जरुरी हो जाएगा। इसके अलावा जीएसटी में 37 अलग-अलग तरह के वार्षिक रिटर्न फाइल करने होंगे, जो कि पहले एक ही करना होता था।
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जीएसटी से पड़ेगा सोसाइटी के फंड पर असर पड़ेगा
सोसाइटी और RWA के पदाधिकारियों के मुताबिक इससे फंड के इस्तेमाल करने पर असर पड़ेगा, क्योंकि इस फंड का इस्तेमाल सोसाइटी में इमरजेंसी के दौरान होता है। कोई भी सोसाइटी इस फंड का इस्तेमाल तब तक नहीं करती है, जब तक कोई बड़ा खर्चा न आ जाएं। अब टैक्स ज्यादा लगने से उनको फंड का स्टेटस सही रखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा।