जेपी ग्रुप की सुप्रीम कोर्ट में गुहार, हम बेचना चाहते हैं यमुना एक्सप्रेसवे
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जेपी ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाते हुए कहा कि वो अपने यमुना एक्सप्रेसवे प्रोजेक्ट को बेचना चाहते हैं, जिसके लिए उन्हें अनुमति दी जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले दिए अपने आदेश में जेपी ग्रुप को 27 अक्टूबर तक कोर्ट में रजिस्ट्री के 2000 करोड़ रुपये जमा करने को कहा था। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और डी वाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा कि वो मामले की अगली सुनवाई 23 अक्टूबर को करेंगे।
Jaypee Associates sought permission from SC to sell its Yamuna Expressway project. In last hearing SC asked Jaypee to deposit Rs 2000 crore.
— ANI (@ANI) October 13, 2017विज्ञापन
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जेपी ग्रुप को यमुना अथॉरिटी ने दिया था झटका
यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी ने जेपी ग्रुप को झटका देते हुए उसकी SEZ लीज को खत्म कर दिया है। जेपी ग्रुप पर यमुना अथॉरिटी का 453 करोड़ रुपये का बकाया था। अथॉरिटी ने 500 एकड़ की जमीन अलॉट की थी।
यह जमीन ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ है। इस जमीन के पास में ही बुद्ध इंटरनेशनल सर्किट और जेपी की स्पोर्ट्स सिटी मौजूद है। जेपी ने अथॉरिटी से लीज पर जमीन लेकर के कई प्राइवेट बिल्डरों को सब-लीज पर दे दी थी।
प्राधिकरण के पास है जमीन का मौलिक अधिकार
नोएडा, ग्रेटर नोएडा और यमुना प्राधिकरण में दी गई जमीन 90 साल की लीज पर थी। लीज होल्ड होने के कारण मालिकाना हक प्राधिकरणों के पास ही है। ऐसे में कोई भी बैंक या संस्था तब तक यहां की किसी भी संपत्ति की नीलामी नहीं कर सकती, जब तक कि प्राधिकरण से एनओसी न ले ले। प्राधिकरणों का कहना है कि किसी भी संपत्ति की नीलामी की अनुमति देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्राधिकरण और खरीदारों का पैसा न डूबे।
ऐसे में अगर जेपी इंफ्राटेक के नाम पर आवंटित संपत्ति की नीलामी का आदेश होता है तो भी प्राधिकरण की मर्जी के बिना बैंक नीलामी नहीं कर सकेगा। यमुना प्राधिकरण के मुताबिक जेपी इंफ्राटेक के नाम पर यमुना एक्सप्रेसवे ही है। नोएडा में स्थित एलएफडी वन (विश टाउन, अमन आदि) आदि भी जेपी इंफ्राटेक के नाम पर है।