मकान, सोसाइटी को भी मिलेगी स्टार रेटिंग, देश भर में जल्द लागू होगा होटलों की तरह ग्रीन कोड
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होटलों की तरह आने वाले दिनों में रिहायशी भवनों के लिए भी स्टार रेटिंग होगी। इससे भवन की खूबियों और सुविधाओं को एक नजर में परखा जा सकेगा। ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) दुनिया के कई विकसित देशों की तर्ज पर ग्रीन कोड लाकर घरों के लिए यह व्यवस्था जल्द लागू करेगा, जिसका एक मकसद भवन की उचित संरचना से बिजली बचाना और प्रकृति को हो रहे नुकसान में कमी लाना है।
देश में आवासीय भवन की अलग बनावट से जुड़ा यह कोड एक अनूठी पहल है। ऑस्ट्रिया, स्विट्जरलैंड और सिंगापुर समेत कई देशों में लागू ग्रीन कोड भारत में पहली बार लागू होगा। अब तक यह सिर्फ होटल के लिए मानक निर्धारित किए जाने तक सीमित था, जबकि अब भवनों के अंदरूनी बनावट का एक मानक भी होगा।
यह भवन के डिजाइन और मौसम के प्रभाव के तालमेल से बिजली उपकरणों से होने वाली खपत को कम करने का तरीका होगा। गर्मी, उमस, प्रदूषण, ठंड और बारिश समेत तमाम प्राकृतिक पहलुओं को ध्यान में रखकर घरों की संरचना की जाएगी। इसका प्रभाव स्टार रेटिंग वाले भवन में प्रवेश करने के साथ ही होगा।
अगले दो माह में होगा जारी
बीईई के एक अधिकारी के मुताबिक, कोड की तैयारी अंतिम चरण में है। इसके बाद राज्यों, विशेषज्ञों और अन्य हिस्सेदारों से चर्चा की जाएगी। उम्मीद है कि अगले दो माह में इसे जारी कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बिल्कुल उसी तरह से होगा, जैसा होटल की स्टार रेटिंग के आधार पर उसकी खूबियां तय होती हैं।
उसी तरह किसी भवन, निजी आवास या फ्लैट के लिए तय होगी। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि इसमें तमाम सुविधाएं रेटिंग के आधार होंगे। प्रधानमंत्री आवास योजना यानी सस्ते घरों की योजना में भी इसे लागू किया जाएगा।
उनके मुताबिक, मौसम की चुनौतियों से निपटने में भवन की संरचना या बनावट की अहम भूमिका होती है। कोई फ्लैट गर्मी में कम गर्म रहता है, जबकि दूसरा काफी गर्म रहता है। इसी तरह ठंड और उमस से बचने में भी बनावट सहायक होती है।
4-5 फीसदी अतिरिक्त आएगा खर्च
भवन की बनावट के फायदों पर उन्होंने बताया कि अगर संरचना और घर में लगे बिजली उपकरण अच्छी गुणवत्ता के हैं, तो बिजली की अच्छी-खासी बचत हो सकती है। यह ग्रीन कोड का सिर्फ एक मकसद है, जबकि दूसरा भूजल संरक्षण, प्रदूषण से बचाव, क्षेत्रीय समस्याएं और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कमी जैसे तमाम पहलू हैं।
रेटिंग लागू होने के विभिन्न स्तरों पर आवासीय भवन निर्माण के दौरान बिल्डर को हर पहलू का खयाल रखना होगा। जानकारों के मुताबिक, स्टार रेटिंग निर्माण में सामान्य की तुलना में 4 से 5 प्रतिशत अतिरिक्त खर्च जाएगा। लेकिन बिजली बचत, प्रदूषण से बचाव, मौसम अनुकूलन और आम घरों की तुलना में रख-रखाव 20 फीसदी कम आएगा।