रियल एस्टेट क्षेत्र में नियम सख्त होने से 51 फीसदी घटी बिल्डरों की संख्या
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
भारतीय रियल एस्टेट बाजार समेकन के दौर से गुजर रहा है। डाटा एनालिटिक कंपनी प्रोपइक्विटी का कहना है कि साल-दर-साल बड़ी गिरावट और सख्त नियमों से रियल एस्टेट क्षेत्र के छोटे खिलाड़ी (बिल्डर) खत्म हो रहे हैं। देश के प्रमुख नौ शहरों में 2011-12 की तुलना में आधे से अधिक बिल्डर इस उद्योग से बाहर हो गए या फिर उन्होंने बड़े बिल्डरों से हाथ मिला लिया। ये नौ शहर गुरुग्राम, नोएडा, मुंबई, थाणे, पुणे, बंगलूरू, हैदराबाद, चेन्नई और कोलकाता हैं।
एक साल में 51 फीसदी घटी बिल्डरों की संख्या
प्रोपइक्विटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि इन नौ शहरों में बिल्डरों की संख्या 2017-18 में 51 फीसदी घटकर 1,745 रह गई, जबकि 2011-12 में बिल्डरों की संख्या 3,538 थी। यह छह साल में रियल एस्टेट क्षेत्र में 50 फीसदी से अधिक का समेकन दर्शाता है।
इन शहरों में बिल्डरों की संख्या में 70-80 फीसदी की गिरावट
आंकड़ों के मुताबिक, समीक्षाधीन अवधि के दौरान गुरुग्राम, नोएडा और चेन्नई में बिल्डरों की संख्या में 70-80 फीसदी की गिरावट आई है। कोलकाता, बंगलूरू और हैदराबाद में 60-65 फीसदी की गिरावट देखी गई है। वहीं, थाणे में बिल्डरों की संख्या में 48 फीसदी, मुंबई में 32 फीसदी और पुणे में 19 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। इस समेकन के कारण सभी नौ शहरों में शीर्ष-10 बिल्डरों की बिक्री में इजाफा हुआ है। साथ ही परियोजनाओं के लांच होने की संख्या में भी वृद्धि देखी गई है।
पूंजी डूबने का खतरा कम
रियल एस्टेट क्षेत्र में टाटा, महिंद्रा, गोदरेज, पिरामल और अडानी जैसे बड़े कॉरपोरेट घरानों की एंट्री और रियल्टी कंपनियों की ओर से मकान खरीदारों को समय पर डिलीवरी नहीं करना इस समेकन प्रक्रिया में बड़े उत्प्रेरक का काम कर रहा है। प्रोपइक्विटी के संस्थापक एवं एमडी समीर जसूजा का कहना है कि उपभोक्ता अब बिल्डरों के उत्कृष्ट ट्रैक रिकॉर्ड और गुणवत्ता के आधार पर ही रियल एस्टेट में निवेश कर रहे हैं। बड़े कॉरपोरेट घरानों के आने से मकान खरीदारों की पूंजी डूबने का खतरा कम हो जाएगा।