एनसीआर में कम कीमत वाले मकानों की मांग बढ़ी, 75 फीसदी नई परियोजनाएं हुई लांच
- नाइट फ्रेंक की छमाही रिपोर्ट इंडिया रियल एस्टेट का दावा निम्न मध्यम वर्ग व मध्यम वर्ग से मांग तेज
- जल्द पूरी होने वाली परियोजनाओं से संबंधित पूछताछ बढ़ी
- 75 फीसदी परियोजनाएं गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा में हुई शुरू
- 15 फीसदी की कमी इन्वेंट्री में 2018 में एक वर्ष पहले के मुकाबले
- वाणिज्यिक इकाइयों की भी मांग में हो रही है बढ़ोतरी
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नोटबंदी के बाद से ही सुस्त पड़े रियल एस्टेट बाजार को आने वाले कुछ समय में राहत मिल सकती है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में सस्ते मकानों की मांग में एक बार फिर से बढ़ोतरी हुई है। 2018 के दौरान एनसीआर में नई परियोजनाओं को शुरू करने के मामलों में 35 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इनमें से करीब 75 फीसदी परियोजनाएं गुरुग्राम और ग्रेटर नोएडा में लांच हुई हैं।
इसका खुलासा नाइट फ्रेंक की छमाही रिपोर्ट (इंडिया रियल एस्टेट) में हुआ। रियल एस्टेट क्षेत्र की सलाहकार कंपनी नाइट फ्रेंक के कार्यकारी निदेशक (उत्तर) मुदस्सिर जैदी ने कहा कि एनसीआर के आवासीय बाजार में सुस्ती का दौर बीतता हुआ दिख रहा है। इससे स्पष्ट होता है कि किफायती आवासीय इकाइयों की मांग बढ़ रही है। इस रुझान का सबसे ज्यादा असर ग्रेटर नोएडा में देखने को मिला है।
एनसीआर में बिक्री आठ फीसदी बढ़ी
रिपोर्ट के मुताबिक एनसीआर में मध्यम वर्ग व निम्न मध्यम वर्ग की तरफ से मांग ज्यादा आई है। इनके अनुरूप ही नई परियोजनाओं को शुरू किया गया है। इस समय एनसीआर में 50 लाख से एक करोड़ रुपये मूल्य की आवासीय इकाइयों की एक बार फिर से शुरुआत होने लगी है।
बिक्री की बात करें तो एनसीआर में बिक्री में आठ फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिससे बाजार में विश्वास बढ़ा है। रिपोर्ट में इस तरफ भी इंगित किया गया है कि अब रेडी टू मूव या जल्द पूरी होने वाली परियोजनाओं से संबंधित पूछताछ बढ़ी है।
ग्रेटर नोएडा की हिस्सेदारी 50 फीसदी
मुदस्सिर जैदी ने कहा कि 2018 के दौरान भी एनसीआर में 1.42 लाख इकाइयों की इन्वेंट्री पड़ी है। इसलिए यहां मकानों की कीमतों में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। हालांकि एक साल पहले से तुलना करें तो इस साल इंवेंट्री में 15 फीसदी की कमी हुई है।
2017 के दौरान एनसीआर में 1.66 लाख आवासीय इकाइयों की इन्वेंट्री थी। उनके मुताबिक बाजार में वर्ष 2013 से ही कीमतों में मंदी देखी जा रही है और तब से लेकर अब तक माहौल नहीं बदला है। जहां तक सस्ते मकानों की बात है तो इसमें 50 फीसदी से भी ज्यादा की हिस्सेदारी ग्रेटर नोएडा की रही है। इसके बाद 19 फीसदी के साथ गाजियाबाद और 17 फीसदी के साथ गुरुग्राम का स्थान रहा है।
बढ़ी हैं लीजिंग गतिविधियां
इस क्षेत्र में वाणिज्यिक इकाइयों की मांग में भी बदलाव देखे गए हैं। वर्ष 2018 के दौरान एनसीआर में लीजिंग गतिविधियों में कई बड़े करार हुए हैं। हालांकि ऑफिस कार्यालयों के लिए जो बड़े करार हुए, उनमें से गुरुग्राम की हिस्सेदारी ज्यादा रही। बीते वर्ष गुरूग्राम में एक साल पहले के मुकाबले 66 फीसदी ज्यादा करार हुआ, जबकि गाजियाबाद में 26 फीसदी ज्यादा करार हुए।