रियल एस्टेट कानून में प्रस्तावित कर छूटों का हो रहा दुरुपयोग: संसदीय समिति
- संसदीय समिति ने की बिल्डर्स पर नकेल कसने की सिफारिश
- कर छूटों में खरीददार को भी फायदा देने का बने नियम, तय हो फ्लैट की कीमत
विस्तार
शहरी विकास संबंधी संसद की स्थायी समिति ने बिल्डर्स पर नकेल कसने की सिफारिश की है। समिति ने रियल एस्टेट कानून में प्रस्तावित कर छूटों के दुरुपयोग की आशंका जताई है। वहीं, क्षेत्रफल के हिसाब से फ्लैट की कीमत तय करने की बात कही है। सोमवार को समिति की रिपोर्ट सदन में रखी गयी।
दरअसल, बड़ी संख्या में लोग अपने सपनों के घर का सालों से इंतजार कर रहे हैं। प्रोजेक्ट की लेटलतीफी से उन्हें तय वक्त पर अपने फ्लैट की पजेशन नहीं मिल रहा।
रियल एस्टेट रेगुलेशन कानून के जरिये सरकार इस सेक्टर को नियमित करने जा रही है। इसमें निर्माण की गति तेज करने के लिये बिल्डर्स को कई तरह की छूट देने का प्रावधान है। मसलन, सेवाकर में छूट के साथ छोटे फ्लैटों के लाभांश पर कर में 100 फीसदी छूट का प्रावधान है। इस मामले में स्थायी समिति आशंका जाहिर की है कि कर छूटों का फायदा खरीददार को नहीं मिलेगा।
वहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) के तहत बनने वाले फ्लैट की कीमत तय न करके सरकार बिल्डर्स को खुली छूट दे रही है। समिति की सिफारिश है कि कर छूट का फायदा खरीददारों को दिलाने के लिये कड़ा कानून जरूरी है। इसके तहत छूट का कुछ हिस्सा पहले ही खरीददारों को दे दिया जाये। वहीं, पीएमएवाई में क्षेत्रफल के हिसाब से अंतिम के अनुसार फ्लैट की कीमत तय की जाये। जिससे अपेक्षा के अनुसार योजना का फायदा जरूरतमंदों को मिल सके।
संशोधित अनुमानों के भी खर्च न होने पर आपत्ति
संसद की स्थायी समिति ने आवास और शहरी गरीबी उपशमन मंत्रालय के बजटीय अनुमानों में आ रही गिरावट और इसे खर्च न कर पाने पर गहरी नाराजगी
जताई है। इससे प्रधानमंत्री के सबको आवास मुहैया कराने के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट पर असर पड़ रहा है।
समिति के मुताबिक, 12वीं पंचवर्षीय (2012-17) के पहले से चौथे साल तक बजट अनुमान व संशोधित अनुमान में भारी कटौती हुई है। कटौती पहले साल के 17 फीसदी से बढ़ते हुए तीसरे व चौथे साल में क्रमश: 43 व 65 फीसदी तक पहुंच गई है। इसकी सीधी जिम्मेदारी समिति ने मंत्रालय पर डाली है। समिति का मानना है कि इस कटौती के बावजूद मंत्रालय पूरी राशि खर्च नहीं कर पा रहा है।
चिंता की बात इसलिये भी है कि मंत्रालय पीएमएवाई के तहत 2022 तक सबको घर मुहैया कराने की प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना समेत कई दूसरे प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। समिति का मानना है कि क्षमता का पूरा इस्तेमाल न होने से योजना खटाई में पड़ सकती है। इसके लिये समिति से एक विशेषज्ञ कार्यबल गठित करने की सिफारिश की है।