'मिलेनियल्स' को फिट और स्वस्थ रहने के लिए कम उम्र में क्यों जरूरी है बीमा कवर लेना
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मिलेनियल्स या हमारी नौजवान पीढ़ी अपने स्वास्थ्य और बेहतरी की तुलना में अपने स्मार्टफोन और नवीनतम एप्स के बारे में अधिक चिंतित नजर आती है। ऐसे में जरूरी है कि उनको स्वास्थ्य बीमा के फायदों के बारे में बताया जाए, ताकि भविष्य में वो किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित न हो।
गैजेट से घिरे रहते है मिलेनियल्स
मिलेनियल्स चौबीसों घंटे गैजेट से संचालित होने वाली अपनी जिंदगी में इतने अधिक व्यस्त हैं कि चिकित्सा या स्वास्थ्य बीमा शायद उनके दिमाग में आने वाली आखिरी चीज है। अगर सच कहा जाए, तो बीमा की कमी से वे यह गलत धारणा बना लेते हैं कि सब कुछ ठीक है और उन्हें डॉक्टर के पास जाने और शारीरिक जांच कराने की जरूरत नहीं है। कई बार ऐसा भी होता है कि कोई बीमा कराने जाता भी है, तो चेक-अप, ब्लड टेस्ट और अन्य जांच के बाद उसे लगता है कि वह तो एकदम फिट है।
मिलेनियल्स के बीच लोकप्रिय इस मानसिकता के विपरीत स्वास्थ्य बीमा उनके जीवन में व्यापक परिवर्तन ला सकता है, क्योंकि यह बीमाधारक को सेहतमंद होने और बेहतर जीवन जीने के महत्व से अवगत कराता है। ‘‘मैं युवा हूं और स्वस्थ हूं। मुझे डॉक्टर की आवश्यकता नहीं है, मुझे परीक्षणों की भी कोई जरूरत है, मुझे किसी दवाई की जरूरत भी नहीं है। तो फिर मुझे बीमा कराने की जरूरत ही क्यों है?‘ इस तरह के कथन उनके मुंह से सुने जा सकते हैं। इस पीढ़ी की मानसिकता शायद यही है।उन्हें सुस्त और आलसी जिंदगी से सीधे सक्रिय जीवन शैली में ले आता है और इस तरह उनके कामकाजी जीवन और उससे परे अच्छे स्वास्थ्य को सुनिश्चित करता है।
स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस के ज्वाइंट मैनेजिंग डायरेक्टर आनंद रॉय ने कहा कि सौभाग्य की बात यह है कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाली मिलेनियल पीढी अब एक तरफ अस्वास्थ्यकर जीवनशैली के जोखिमों को लेकर सतर्क हो रही है और दूसरी ओर उन्हें यह भी लगता है कि उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार की आवश्यकता है।
आजकल लोग अपने जीवन पर मंडराने वाले नकारात्मक प्रभावों को दूर करने की तरफ लगातार ध्यान दे रहे हैं। ये ऐसे प्रभाव हैं, जो देर से काम करने, सक्रिय सामाजिक जीवन और व्यायाम की कमी, क्रोध के मुद्दों से उपजते हैं। इनका असर कम करने के लिए लोग कार्यालय में वर्कआउट और स्वस्थ आहार, फिटनेस, नियमित अवकाश, साहसिक खेल और ध्यान के साथ-साथ मेडिटेशन जैसे तरीकों से नकारात्मक प्रभावों को हराने की कोशिश कर रहे हैं।
64 फीसदी मिलेनियल्स के पास नहीं बीमा
हालांकि इन सब के बावजूद बीमा हासिल करने वाले मिलेनियल्स की तादाद बेहद कम है। इस समूह के लगभग एक चौथाई लोगों ने स्वास्थ्य बीमा नहीं लिया है और सिर्फ 13 फीसदी लोगों ने विकलांगता कवरेज लिया है। 36 फीसदी लोगों के पास अन्य बीमा योजनाएं हैं। इसका मतलब यह हुआ कि मिलेनियल पीढी के 64 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिनके साथ अगर कुछ दुर्भाग्यपूर्ण घटता है, तो वे अपने आश्रितों को बीच मझधार में छोड़ सकते हैं।
कम उम्र में बीमा लेना फायदे का सौदा
इसके अलावा, चूंकि आजकल इनवेसिव ट्रीटमेंट सहित हेल्थकेयर से संबंधित खर्चे आसमान छू रहे हैं, इसलिए यह बेहद जरूरी है कि मिलेनियल्स कम उम्र में ही बीमा खरीदें, क्योंकि इससे उन्हें बड़ा फायदा होता है। यानी जोखिमों को कम करते हुए फायदा उठाना। उदाहरण के लिए, 22-35 वर्ष की आयु के मिलेनियल्स को कम प्रीमियम पर व्यापक कवरेज मिलता है। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती है, आपको अधिक प्रीमियम अदा करना होता है यानी फायदे भी कम होते जाते हैं।
इरडा ने किया है नियमों में बदलाव
मिलेनियल्स को बीमा सुरक्षा की छतरी के तहत लाने का इरादा करते हुए, भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने स्वास्थ्य बीमा विनियम, 2016 अधिसूचित किया हैं, जिनमें अन्य बातों के अलावा, एक व्यक्ति की उम्र के आधार पर प्रीमियम तय किया गया है। कम उम्र में ही बीमा खरीदने वालों को कम प्रीमियम अदा करने की आवश्यकता होती है और वे नो क्लेम बोनस के हकदार होते हैं। यह कदम बीमा की ओर नई पीढ़ी को आकर्षित करने और बीमाकृत रहने के लिए उठाया गया था।
इसी सिलसिले में कुछ बीमा कंपनियां बीमा में निवेश करने के लिए मिलेनियल्स को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिहाज से वैलनेस और प्रिवेंटिव केयर को अपने प्रोडक्ट्स के साथ जोड़ रही हैं। वे उपभोक्ताओं के साथ संवाद करते हैं और उन्हें नई सेवाओं और स्वस्थ रहने के तरीकों के बारे में जानकारी देते हैं। वे स्वास्थ्य शिविरों का संचालन करते हैं और साथ ही साथ उपभोक्ताओं को उनके बीमा संबंधी प्रीमियम के नवीकरण की तारीखों के बारे में जानकारी देते हैं। इन प्रयासों से संस्थान को कंपनी और ग्राहक के बीच विश्वास और संबंधों को बनाए रखने में मदद मिलती है।
इन बीमारियों से होते हैं पीड़ित
40-50 मिलियन लोग किसी भी समय स्वास्थ्य संबंधी खतरे में होते ही हैं और अनगिनत संख्या ऐसे लोगों की है, जो हृदय संबंधी समस्याओं, उच्च रक्तचाप और मधुमेह जैसे जीवन शैली के रोगों से पीड़ित होते हैं। भारत में 356 मिलियन लोग 22-37 वर्ष की उम्र के हैं - यानी दुनिया में सबसे बड़ी युवा आबादी - ऐसी सूरत में चिकित्सा बीमा बेहद जरूरी हो जाता है।
बीमा बचाता है कर्ज के महाजाल से
पर्याप्त बीमा के बिना बीमारियों का इलाज करना आपकी बचत को नष्ट कर सकता है, आपके लिए गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सहायता को असंभव बना सकता है। नौकरी में हानि हो सकती है, और किसी को भी कर्ज के गहरे समंदर में फंसा सकता है और यहां तक कि उसे विनाश की तरफ भी धकेल सकता है। यानी एक अच्छा और उपयोगी स्वास्थ्य बीमा आपकी जिंदगी में मंडराते खतरों को कम करने में मदद कर सकता है।
आखिर में सबसे महत्वपूर्ण बात- भारत का भविष्य, इसका वित्तीय विकास और संपन्नता सब कुछ मिलेनियल्स के बेहतर स्वास्थ्य और उनके कल्याण में ही निहित है। मिलेनियल्स के बाद जरनेशन जेड है, जिसे कभी पता नहीं चलेगा कि जीवन वाई-फाई के बिना क्या है। इसलिए बीमा कंपनियों को अपनी हेल्थ केयर बेनिफिट्स संबंधी रणनीतियों को मिलेनियल्स के साथ-साथ इस पीढ़ी की अनूठी जरूरतों के अनुरूप डिजाइन करना चाहिए। कोशिश यह रहे कि जितनी जल्दी संभव हो, उन्हें बीमा की छतरी के नीचे लाया जाए।