भीम ऐप पर केवल बोलने से होगा पेमेंट, यह नई तकनीक जल्द होगी लॉन्च
इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना मंत्रालय के तहत देशभर में चल रहे कैशलेस अभियान को गति देने के मद्देनजर एनपीसीआई ने गत छह माह में ध्वनि आधारित यूपीआई भुगतान के परीक्षण भी किए हैं।
डिजिटल भुगतान का नया तरीका शुरू करने से पहले वह पुख्ता जांच कर रहा है, जिसमें तीन कंपनियां फोनपे, टोनेटैग और अल्ट्राकैश भी सहयोग कर रही हैं। प्रारंभिक परीक्षण में कुछ निजी बैंक भी अपने स्वतंत्र मोबाइल वॉलेट उत्पादों के साथ इसमें शामिल हुए हैं, जो वॉलेट की प्रक्रिया को सरल बनाना चाहते हैं।
तकनीकी अड़चन आई आड़े
अगस्त 2016 से यूपीआई लेनदेन में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, लेकिन व्यापारी वर्ग तकनीकी अड़चनों के मद्देनजर अब तक इसके पक्ष में नहीं है। जबकि एनपीसीआई ने यूपीआई में भुगतान को सरल बनाने के लिए क्यूआर कोड भी लाया, फिर यह सामने आया कि बड़े पैमाने पर लोग डिजिटल पेमेंट के तौर-तरीकों से अंजान हैं। इसके बाद निगम ने ध्वनि आधारित भुगतान की ओर कदम बढ़ाने का निर्णय लिया।
अन्य तरीकों से आसान
आईटी मंत्रालय के मुताबिक, यूपीआई के जरिए भुगतान में कई सौ गुना बढ़ोतरी हुई है। नवंबर 2016 में जो आंकड़ा 90,000 पर था, वह गत फरवरी में 19.10 करोड़ प्रति माह पर पहुंच गया। एनपीसीआई लगातार डिजिटल लेनदेन व्यवस्था को सरल बनाकर उसे गति देने पर काम कर रहा है। टोनेटैग के ध्वनि आधारित भुगतान को आईसीआईसीआई बैंक के एप के जरिए ट्रायल पर चलाया गया। प्रयोग करने वालों ने इसे डिजिटल भुगतान के अन्य तरीकों से आसान बताया।
आवाज से भुगतान ज्यादा सुरक्षित
भारतीय भुगतान परिषद के अध्यक्ष नवीन सूर्या का कहना है कि ध्वनि आधारित भुगतान एक बड़ा तकनीकी नवाचार जैसा है, लेकिन अभी भारतीय बाजार में वह साबित नहीं हुआ है। हालांकि यह तरीका अन्य की तुलना में तनाव रहित है।
एनपीसीआई के एक अधिकारी के मुताबिक, आवाज से भुगतान ज्यादा सुरक्षित व्यवस्था है, क्योंकि आवाज की प्रकृति में कोई भी बदलाव होने पर किसी भी सूरत में भुगतान संभव नहीं है, जबकि अन्य में डिवाइस या कार्ड खोने पर जोखिम रहता है। परीक्षण पूरा होने पर सरकार की ओर से इस व्यवस्था को लागू करने की घोषणा की जाएगी।
सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट से होगा लागू
टोनेटैग कंपनी का दावा है कि ध्वनि आधारित भुगतान की व्यवस्था को नए हार्डवेयर के बिना लागू किया जा सकता है। ग्राहक और व्यापारी के बीच यह सबसे सरल तरीका हो सकता है, जो महज एक सॉफ्टवेयर अपडेट करके लागू किया जा सकता है।