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RTGS और NEFT मुफ्त होने से इतना बचेगा पैसा, एटीएम भी जल्द हो सकता है फ्री

Thu, 06 Jun 2019 08:58 PM IST
paliwal पालीवाल बीबीसी हिंदी
बीबीसी हिंदी Published by: paliwal पालीवाल Updated Thu, 06 Jun 2019 08:58 PM IST
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this much money you will save as rtgs and neft has become free by rbi to all

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया यानी आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती का ऐलान किया है। इसी के साथ अब नया रेपो रेट 5.75 फीसदी हो गई है। इसका फायदा लोगों को लोन की ईएमआई में मिल सकता है। रेपो रेट वह दर है जिस पर रिजर्व बैंक वाणिज्यिक बैंकों को कर्ज देता है।

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आरबीआई की पिछली दो बैठकों में भी रेपो रेट में 0.25 फीसदी की कटौती कर चुकी है। यानी रेपो रेट में यह लगातार तीसरी कटौती है। इसके साथ ही आरबीआई ने एक और फैसला किया है जो इंटरनेट के जरिये पैसे का लेन-देन करने वाले लोगों की जेब को राहत देगा।
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आरबीआई ने आरटीजीएस (RTGS) और एनईएफटी (NEFT) के जरिये होने वाले लेन-देन पर निशुल्क कर दिया है। आरबीआई ने कहा है कि धन के डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने के लिए यह फैसला किया गया है।
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आइए, जानते हैं कि RTGS और NEFT क्या होता है और इसके तहत लेन-देन का क्या मतलब है?

क्या होता है RTGS

RTGS का मतलब है रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम। 'रियल टाइम' का मतलब है तुरंत। मतलब जैसे ही आप पैसा ट्रांसफर करें, कुछ ही देर में वह खाते में पहुंच जाए। आरटीजीएस दो लाख रुपये से अधिक के ट्रांसफर के लिए इस्तेमाल किया जाता है।


भारत का सबसे बड़ा सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (एसबीआई) आरटीजीएस के तहत पैसा भेजने पर 5 से 50 रुपये का शुल्क लेता है।

क्या है NEFT

NEFT का मतलब है नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर। इंटरनेट के जरिये दो लाख रुपये तक के लेन-देन के लिए एनईएफटी का इस्तेमाल किया जाता है। इसके जरिये किसी भी शाखा के किसी भी बैंक खाते से किसी भी शाखा के बैंक खाते को पैसा भेजा जा सकता है।

बस इकलौती शर्त ये है कि भेजने वाले और पैसा पाने वाले, दोनों के पास इंटरनेट बैंकिंग सेवा का होना जरूरी है। अगर दोनों खाते एक ही बैंक के हैं तो सामान्य स्थिति में कुछ सेकेंड्स के अंदर पैसा ट्रांसफर हो सकता है।

दरअसल आरबीआई अब तक आरटीजीएस और एनईएफटी लेन-देन पर एक लेवी बैंकों से लिया करता था और बदले में बैंक अपने ग्राहकों से यह पैसा वसूलते थे। अब यह लेवी की व्यवस्था हटा ली गई है।

आरबीआई ने कहा है, "इसके बदले बैंकों को अपने ग्राहकों को यह लाभ देना होगा। इस बारे में हफ्ते भर के भीतर निर्देश जारी कर दिए जाएंगे।" एसबीआई के शुल्क के मुताबिक, 5 लाख रुपये भेजने पर आप अब तक 50 रुपये और जीएसटी शुल्क के तौर पर देते थे। वो अब आपको नहीं देनी होगी।

जेब पर राहत के लिहाज से यह कोई बड़ी रकम नहीं है लेकिन मकसद डिजिटल लेन-देन को बढ़ावा देने का है। यानी आरबीआई चाहता है कि आप दिन में जितनी बार चाहें इंटरनेट बैंकिंग के इस्तेमाल से पैसे का लेन-देन करें।



इसके अलावा आरबीआई ने एटीएम के इस्तेमाल को निशुल्क करने की मांग पर पुनर्विचार के लिए एक समिति बनाने का फैसला किया है। यह कमेटी दो महीनों के भीतर अपनी पहली सिफारिश भेजेगी।

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