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Hindi News ›   Business ›   Personal Finance ›   There is binding of 12 percent employee and employer contribution each for wage of Rs 15000 or below

कर्मचारी व नियोक्ता कितना कर सकते हैं EPF में योगदान? जानिए श्रम एवं रोगजार सचिव ने क्या कहा

Wed, 10 Feb 2021 04:46 PM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Wed, 10 Feb 2021 04:46 PM IST
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There is binding of 12 percent employee and employer contribution each for wage of Rs 15000 or below
रुपये - फोटो : pixabay

भविष्य निधि को लेकर हर नौकरीपेशा व्यक्ति काफी उत्सुक रहता है। हर महीने वेतन से कटकर भविष्य निधि में जाने वाला पैसा पहले तो खटकता है लेकिन बाद में बार-बार बैलेंस चेक करने पर वही राशि सुकून भी देती है। कर्मचारी और उनके नियोक्ता हर महीने ईपीएफ में योगदान करते हैं, जो एक रिटायरमेंट बेनेफिट स्कीम है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों वेतन का 12-12 फीसदी ईपीएफ में जमा करते हैं।

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कर्मचारी पेंशन योजना के लिए सैलरी की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये प्रति महीने है। श्रम और रोगजार सचिव अपूर्वा चंद्रा ने कहा कि 12 फीसदी से अधिक योगदान देने वाला स्वैच्छिक योगदानकर्ता है, उस पर कोई कानूनी बंधन नहीं है।
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खाताधारकों को मिलती है आंशिक निकासी की सुविधा
कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) अपने खाताधारकों को आंशिक निकासी की सुविधा देता है, जो आपके पीएफ खाते में जमा कुल रकम की 90 फीसदी धनराशि के बराबर हो सकती है। पीएफ से निकाली जाने वाली राशि पूरी तरह कर मुक्त होती है। 

पीएफ खाते से भी मिलता है लोन
बता दें कि पीएफ खाते से आप लोन भी ले सकते हैं। पीएफ खाते से मकान खरीदने के दो विकल्प होते हैं। पहला ईपीएफओ की हाउसिंग स्कीम के तहत और दूसरा खाते से आंशिक निकासी कर। सरकारी या निजी क्षेत्र के हर कर्मचारी के पास पीएफ खाता होता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने कानून में संशोधन कर 12 अप्रैल, 2017 को अपने सदस्यों के लिए हाउसिंग स्कीम का प्रावधान लागू किया। इसका फायदा ईपीएफओ के करीब छह करोड़ सदस्य उठा सकते हैं। इसके तहत मकान खरीदने, बनाने या प्लॉट खरीदने के लिए कर्मचारी अपने फंड से 90 फीसदी राशि निकाल सकते हैं।  


सरकार जल्द कर सकती है ये बदलाव
मालूम हो कि केंद्र सरकार नौकरीपेशा लोगों को जल्द ही खुशखबरी दे सकती है। सरकार जल्द ही कंपनियों को लचीलेपन के साथ सप्ताह में चार दिन काम की मंजूरी दे सकती है। लेकिन इसके लिए आपको लंबी शिफ्ट में काम करना पड़ सकता है। लेबर सचिव अपूर्वा चंद्रा ने पहले बताया था कि सप्ताह में 48 घंटे काम करने का नियम जारी रहेगा। लेकिन कंपनियों को तीन शिफ्ट में काम कराने की मंजूरी दी जा सकती है। आइए जानते हैं इसके बारे में- 

  • 12 घंटे की शिफ्ट वालों को सप्ताह में चार दिन काम करना होगा। 
  • इसी तरह 10 घंटे की शिफ्ट वालों को सप्ताह में पांच दिन काम करना होगा। 
  • आठ घंटे की शिफ्ट वालों को सप्ताह में छह दिन काम करना होगा।
     
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