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टैक्स पेयर्स को मिल सकता है तैयार रिटर्न फॉर्म, I-T डिपार्टमेंट ने शुरू की तैयारी

शिशिर चौरसिया, अमर उजाला,नई दिल्ली Updated Tue, 16 Jan 2018 12:17 PM IST
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सरकारी, गैर सरकारी या स्थानीय निकाय में साधारण दर्जे की नौकरी करने वाले या ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करने के बारे में ज्यादा नहीं जानने वाले आयकरदाताओं की सहूलियत के लिए आयकर विभाग उन्हें पहले से भरे हुए फॉर्म उपलब्ध कराने की सेवा का तोहफा दे सकता है।


यदि सब कुछ ठीक रहा, तो इस फैसले की घोषणा आगामी आम बजट में हो सकती है। ऐसा हो जाने पर लाखों वैसे वेतनभोगियों को राहत मिलेगी, जिनके लिए आयकर विभाग का ऑनलाइन रिटर्न भरना पहाड़ सा लगता है। 


डिपार्टमेंट जल्द देगा तोहफा
आयकर विभाग से जुड़े एक सूत्र का कहना है कि सरकार इस समय आयकरदाताओं को अधिक से अधिक सुविधा उपलब्ध कराने पर काम कर रही है। इसी क्रम में छोटे दर्जे के वेतनभोगियों को राहत दिलाने के लिए उनके भरे हुए फॉर्म उपलब्ध कराने की दिशा में काम चल रहा है।

दरअसल, इस समय देश में लाखों कर्मचारी ऐसे हैं, जो सरकारी, गैर सरकारी या स्थानीय निकायों में साधारण दर्जे की नौकरी करते हैं और उनका वार्षिक वेतन पांच लाख रुपये या इससे ज्यादा बैठता है। 

लेनी पड़ती है सीए की सेवाएं
आयकर विभाग के नियमों के अनुसार, ऐसे करदाताओं को न सिर्फ रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है, बल्कि उन्हें ऑनलाइन रिटर्न दाखिल करना होगा। इसलिए गांव या छोटे शहरों में ही नहीं, बल्कि दिल्ली जैसे महानगर में रहने वाले छोटे कर्मचारियों के लिए यह चिंता का सबब है। मजबूरी में ऐसे आयकरदाता ऑनलाइन फॉर्म भरवाने के लिए या तो किसी जानकार की चिरौरी करते हैं या फिर किसी वित्तीय जानकार या सीए की सेवा लेनी पड़ती है।  
 

वेतनभोगियों के लिए होगी यह सुविधा

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सूत्र के मुताबिक, यह योजना पहले वैसे करदाताओं के लिए बनाई जा सकती है, जिनकी आमदनी का स्रोत सिर्फ वेतन है। उनका रिटर्न तैयार कर उनके ई-मेल आईडी पर भेज दिया जाए। यह उसी तरह बनाया जाएगा जैसे आयकर विभाग किसी करदाता का फॉर्म 26एएस तैयार करता है। 

आसान है रिटर्न फॉर्म तैयार करना 
आयकर विभाग के एक अन्य अधिकारी का कहना है कि यदि ऐसा फैसला होता है, तो पहले से भरा हुआ रिटर्न फॉर्म तैयार करना कोई मुश्किल नहीं है। जबसे पैन और आधार संख्या को जोड़ दिया गया है, आयकर विभाग के पास किसी भी वेतनभोगी के सारे वित्तीय ट्रांजेक्शन की जानकारी है।

विभाग को यहां तक जानकारी है कि उसने किसी विशेष वित्त वर्ष में कितनी राशि ब्याज के रूप में अर्जित की है। उसके नियोक्ता ने वर्ष भर में कितने रुपये की स्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) की है, इसकी भी जानकारी विभाग के पास रहती है।

इन सबको मिलाकर पहले से भरा हुआ रिटर्न आयकरदाता को भेजा जा सकता है। वह इसे खोल कर देखें, यदि कुछ संशोधन करना चाहे तो वैसा करें और फिर इसे आयकर विभाग की साइट पर अपलोड कर दे। 

सॉफ्टवेयर करना होगा दुरूस्त
भारतीय चार्टर्ड इंस्टीच्यूट संस्थान (आईसीएआई) के केंद्रीय परिषद सदस्य सीए मुकेश एस. कुशवाहा का कहना है कि यह विचार तो बेहतर है, लेकिन इसके लिए सॉफ्टवेयर बढ़िया तैयार करना होगा। क्योंकि यदि सॉफ्टवेयर सही नहीं होगा तो गलतियां होंगी और ऐसी स्थिति में वित्तीय रूप से कम जागरूक करदाताओं को सुविधा के बदले दुविधा होगी। 
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