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सरकारी कर्मचारियों को सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत, सभी निजी अस्पतालों में करा सकेंगे इलाज
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 14 Apr 2018 01:37 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को 44 लाख वर्तमान और रिटायर्ड केंद्रीय कर्मचारियों को बड़ी राहत देते हुए कहा कि सीजीएचएस देश के सभी निजी अस्पतालों में लागू होगा, चाहे वो पैनल में शामिल हो या नहीं हो।
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सरकारी कर्मचारियों का है अधिकार
कोर्ट ने कहा कि अच्छी मेडिकल सुविधाएं पाना प्रत्येक सरकारी कर्मचारी का अधिकार है। इसलिए केंद्र सरकार ऐसे किसी भी बिल का भुगतान करने से मना नहीं कर सकती है, अगर कर्मचारी ने पैनल में नहीं शामिल किसी भी प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराया हो।
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इलाज लिया है या नहीं यह जानना जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि सरकार को यह देखना जरूरी है कि क्या वाकई में संबंधित व्यक्ति ने इलाज लिया है या नहीं। अगर उसने ऐसे किसी प्राइवेट अस्पताल में इलाज लिया है, जो पैनल में शामिल नहीं है तब भी उसे सभी बिलों का भुगतान होना चाहिए। केवल एक टेक्निकल आधार पर भुगतान किसी भी हालत में रुकना नहीं चाहिए।
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नंबर लेने के लिए होगी ऑनलाइन व्यवस्था
सीजीएचएस की देश भर के ज्यादातर बड़े शहरों में डिस्पेंसरियां हैं, जहां केंद्रीय कर्मचारियों, पेंशनरों और उनके आश्रितों को मुफ्त इलाज की सुविधा है। इसके साथ ही दवाएं भी डिस्पेंसरियों में मुफ्त भी मिलती हैं। डॉक्टर को दिखाने और दवाएं लेने के लिए लाभार्थियों को वेलनेस सेंटर यानी डिस्पेंसरी के काउंटर से नंबर लेना पड़ता है।
लाभार्थियों में ज्यादा संख्या पेंशनरों की है, सो नंबर लेने के लिए अक्सर उन्हें लंबी लाइन में खड़े होकर इंतजार करना पड़ता है। इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि वेलनेस सेंटर के काउंटर के साथ नंबर लेने की व्यवस्था ऑनलाइन भी कर दी जाए ताकि लाभार्थियों को इसके लिए लंबी लाइन न लगानी पड़ी।