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काम की खबर: आयकर दायरे में नहीं आते बोनस में मिले शेयर

Mon, 15 Mar 2021 05:45 AM IST
Kuldeep Singh बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kuldeep Singh Updated Mon, 15 Mar 2021 05:45 AM IST
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Shares received in bonus do not come under income tax
शेयर बाजार - फोटो : File Photo

कंपनियां कई बार शेयरधारकों को नकद बोनस के बजाए इक्विटी के रूप में भुगतान करती हैं। आयकर विभाग नकद बोनस पर टैक्स वसूलता है, लेकिन शेयर के रूप में मिला बोनस पर कर नहीं लगता। टैक्स छूट के अलावा बोनस शेयर किस तरह कंपनी व निवेशक का मुनाफा कराते हैं, पेश है प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-

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एंजेल ब्रोकिंग के सीईओ विनय अग्रवाल का कहना है कि कंपनियां पूंजी की कमी होने या बाजार में अपनी साख बढ़ाने के लिए बोनस शेयर जारी करती हैं। मसलन, अगर कंपनी के पास शेयरधारकों को नकद बोनस देने के लिए राशि नहीं है, तो वे इक्विटी के रूप में बोनस दे सकती हैं।
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सिर्फ शेयरों की संख्या बढ़ती है, पूंजी नहीं
आयकर विभाग धारा 56(2)(vii) के तहत बोनस के रूप में मिले शेयर पर उनके बाजार मूल्य के आधार पर टैक्स की मांग करता है, लेकिन कर्नाटक हाईकोर्ट ने पिछले दिनों एक फैसले में कहा, चूंकि बोनस शेयर सिर्फ इक्विटी की संख्या बढ़ाते हैं।
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इससे शेयरधारक या कंपनी की पूंजी पर कोई असर नहीं पड़ता। लिहाजा इन्हें अन्य स्रोत से मिली आय नहीं माना जा सकता और ये कर के दायरे से बाहर होंगे। आयकर विशेषज्ञों का भी यही कहना है कि जब बोनस में मिले शेयर से धारक की आय में इजाफा नहीं हुआ, तो कर भी नहीं वसूला जा सकता। कंपनी भी इस पर कोई शुल्क नहीं लेती है।

मौजूदा शेयरों के अनुपात में तय होता है बोनस
कंपनी बाजार में मौजूद शेयरों के अनुपात में ही बोनस शेयर देती है। कोई कंपनी 1:1 की दर से बोनस शेयर दे रही, तो इसका मतलब है कि उसके हर शेयर पर धारक को एक और शेयर मिलेगा। इसी तरह, कंपनी 4:1 का बोनस देती है, तो धारक को 1 शेयर के साथ 4 बोनस शेयर मिलेंगे। यानी शेयरधारकों के पास पहले 100 शेयर थे, तो 500 हो जाएंगे। हां, शेयर का मूल्य संख्या के अनुपात में घटता जाएगा, जिससे बाजार पूंजी पर असर नहीं पड़ेगा।

दोनों शेयरों पर अवधि की गणना अलग
मूल शेयर पर अवधि की गणना उसे खरीदने की तारीख से होगी और उसी हिसाब से टैक्स लगेगा। बोनस शेयर पर अवधि की गणना कंपनी की ओर से जारी करने के बाद की जाएगी। इस तरह दोनों शेयरों को भले ही एकसाथ बेचा जाए, लेकिन कर की गणना अलग-अलग होगी। - अर्जित गुप्ता, सीईओ, क्लियरटैक्स

बेचने पर दो तरह से लगेगा टैक्स

  • शेयर को एक साल के भीतर बेचा जाता है, तो मुनाफे पर 15 फीसदी दर से शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।
  • एक साल बाद बेचते हैं, तो एक लाख रुपये से ज्यादा के मुनाफे पर 10 फीसदी दर से लांग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा।

कंपनी व शेयरधारक के मुनाफे का गणित
बोनस शेयर जारी करने वाली कंपनी व शेयरधारक दोनों को ही भविष्य में तगड़ा मुनाफा हो सकता है। बाजार में कंपनी के शेयर का मूल्य कम होने से तरलता और मांग बढ़ जाती है। शेयर की कीमत कम होगी तो उसे ज्यादा लोग खरीद सकेंगे। बाजार में मांग बढ़ी तो उसकी कीमत भी ज्यादा होती जाएगी।



इस तरह कंपनी पूंजीकरण बढ़ा सकती है। शेयरधारक के लिहाज से देखें तो, पहले उसके पास 10 शेयर थे, जिनका कुल मूल्य 1,000 रुपये था। कंपनी 4:1 का बोनस देती है, तो कुल शेयर 50 हो जाएंगे। एक साल बाद 200 रुपये मूल्य पर बेचा तो 10,000 रुपये मिलेंगे।

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