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सैलरी क्लास पर पड़ता है अभी भी टैक्स का सबसे ज्यादा बोझ

Tue, 23 Oct 2018 03:43 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 23 Oct 2018 03:43 PM IST
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salary class bear the burnt for paying more income tax

केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) द्वारा सोमवार को जारी किए गए आंकड़ों के मुताबिक अभी भी आयकर भरने में सैलरी क्लास सबसे आगे है। वहीं डॉक्टर, वकील, आर्किटेक्ट और फिल्म जैसे पेशों से जुड़े लोग आज भी सबसे कम आयकर देते हैं। जबकि ऐसे लोगों की कमाई हर साल एक करोड़ रुपये से ज्यादा की होती है। देश में 8.6 लाख डॉक्टरों में केवल आधे ही टैक्स भरते हैं। केवल 13500 नर्सिंग होम संचालकों ने अपना इनकम टैक्स जमा किया। वही तीन में से केवल एक चार्टेड अकाउंटेंट ही अपना आयकर भरता है।  

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60 फीसदी बढ़े करोड़पति करदाता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीते चार साल के कार्यकाल के दौरान देश में कंपनी या फर्म, हिंदू अविभाजित परिवार आदि की श्रेणी में करोड़पति करदाताओं की संख्या में 60 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यही नहीं, यदि सिर्फ वैयक्तिक करदाताओं की श्रेणी में देखें तो आलोच्य अवधि में करदाताओं की संख्या में 68 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। यह खुलासा आयकर विभाग के आंकड़ों से हुआ है।
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सीबीडीटी के अध्यक्ष सुशील चंद्रा ने सोमवार को यहां बीते चार वर्षों के आंकड़े जारी करते हुए यह जानकारी दी। सीबीडीटी के अनुसार आकलन वर्ष 2014-15 में कारपोरेट कंपनियों या फर्मो, हिंदू अविभाजित परिवार आदि की श्रेणी में कुल 88649 करदाताओं ने अपनी आमदनी एक करोड़ रुपये या उससे ज्यादा बतायी थी।
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आकलन वर्ष 2017-18 तक ऐसे करदाताओं की संख्या बढ़ कर 140139 हो गई जो कि 60 फीसदी की बढ़ोतरी है। इसी के साथ एक करोड़ रुपये या इससे ज्यादा सालाना आमदनी बताने वाले वैयक्तिक करदाताओं की संख्या तो 68 प्रतिशत की रफ्तार से बढ़े हैं। आकलन वर्ष 2014-15 में यह संख्या 48416 थी जो 2017-18 में 81344 हो गई।

रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या में इजाफा

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आयकर रिटर्न दाखिल करने वालों की संख्या देखें तो बीते चार वर्षों के दौरान इनकी संख्या में 80 फीसदी से भी ज्यादा का इजाफ़ा हुआ है। उन्होंने बताया कि आकलन वर्ष 2013-14 में रिटर्न दाखिल करने वालों की तादाद 3.79 करोड़ थी जबकि 2017-18 में यह संख्या 6.85 करोड़ हो चुकी है। यदि वैयक्तिक करदाताओं की श्रेणी में देखें तो इसमें करीब 65 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। आकलन वर्ष 2013-14 में ऐसे करदाताओं की संख्या 3.31 करोड़ थी जो कि आकलन वर्ष 2017-18 में बढ़ कर 5.44 करोड़ हो गई है। 

इसलिए दर्ज हुई बढ़ोतरी

सीबीडीटी अध्यक्ष का कहना है कि कराधान और कर संग्रह से जुड़ी संस्थाओं ने बीते सालों में जो कानूनी, सूचनात्मक प्रचार-प्रसार अभियान से संबंधित और दबावकारी कदम उठाए हैं, उनके नतीजे में यह बढ़त दर्ज हो रही है। 

आय घोषित में भी बढ़ोतरी

सीबीडीटी के अनुसार आईटी रिटर्न में घोषित आय में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है। उदाहरण के लिए आकलन वर्ष 2014-15 में कुल 26.92 लाख करोड़ रुपये की कुल आय घोषित हुई थी। यह वर्ष 2017-18 में 44.88 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गई जो कि 67 फीसदी की बढ़ोतरी को दर्शाता है।

इस दौरान वेतनभोगी करदाताओं की संख्या में भी 37 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2014-15 में ऐसे करदाताओं की संख्या 1.70 करोड़ थी जो कि वर्ष 2017-18 में बढ़ कर 2.33 करोड़ हो गई। इसी अवधि में गैर वेतन भोगी करदाताओं की संख्या में 19 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। 

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