{"_id":"a0ee9136-84a9-11e2-9052-d4ae52bc57c2","slug":"retail-investors-received-many-gifts-to-budget","type":"story","status":"publish","title_hn":"बजट में छोटे निवेशकों को मिले कई तोहफे","category":{"title":"Personal Finance","title_hn":"पर्सनल फाइनेंस","slug":"personal-finance"}}
बजट में छोटे निवेशकों को मिले कई तोहफे
ए. बालासुब्रमण्यन
Updated Mon, 04 Mar 2013 02:28 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इस साल के बजट में जहां वित्त मंत्री ने चालू खाते के घाटे और राजकोषीय घाटे पर लगाम कसने पर जोर देकर सरकार की बैलेंस शीट को सुधारने की कवायद की है, वहीं राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम के जरिये ज्यादा से ज्यादा निवेशकों को इक्विटी बाजार से जोड़ कर उनकी बचत के पैसे को अर्थव्यवस्था के प्रवाह में लाने का प्रयास भी किया गया है।
विज्ञापन
निवेशकों के लिए बजट में बहुत भारी-भरकम घोषणाएं तो नहीं की गई हैं, फिर भी बजट के कई प्रावधान निवेशकों को राहत देने वाले जरूर हैं। छोटे निवेशकों के लिए बजट की पहली पेशकश है आरजीईएसएस (राजीव गांधी इक्विटी सेविंग स्कीम) के दायरे का विस्तार। बजट भाषण में वित्त मंत्री की घोषणा के मुताबिक निवेशक अब आरजीईएसएस में तीन साल तक निवेश करके इसपर करछूट हासिल कर सकेंगे। पहले यह अवधि महज एक साल थी।
विज्ञापन
इसके साथ ही इस स्कीम में निवेश की पात्रता से जुड़ी एक प्रमुख शर्त में भी ढिलाई कर दी है। इसके तहत अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले लोग भी आरजीईएसएस के जरिये निवेश कर इसके तहत मिलने वाली करछूट का लाभ उठा सकेंगे। पहले आय की यह सीमा 10 लाख रुपये सालाना थी। इसके अलावा, आरजीईएसएस में इक्विटी आधारित फंड को भी निवेश की सूची में शामिल करके इस स्कीम में निवेश का दायरा भी बढ़ाया गया है। इसका मतलब है कि निवेशक आरजीईएसएस में निवेश करने के लिए अपनी पसंद के मुताबिक फंड चुन सकेंगे।
विज्ञापन
होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट का दायरा बढ़ाकर घर खरीदने में निवेश करने वालों को भी बढ़ावा देने का कदम उठाया गया है। बजट में होम लोन के ब्याज के पुनर्भुगतान (रीपेमेंट) पर ज्यादा टैक्स छूट देने की घोषणा की गई है। इसके तहत 40 लाख रुपये तक के मकान के लिए अगर 25 लाख रुपये या इससे कम का होम लोन लिया गया है, तो इसपर निवेशकों को 1 लाख रुपये तक की अतिरिक्त टैक्स छूट मिल सकेगी।
यह मौजूदा समय में मिलने वाली 1.5 लाख रुपये की टैक्स छूट से अलग होगी। इस टैक्स छूट को भी आसानी से क्लेम किया जा सकेगा, क्योंकि ये 2 साल के भीतर कभी भी लिया जा सकता है। हालांकि बजट के एक अन्य प्रावधान के मुताबिक अगर बेचने के समय प्रॉपर्टी की कीमत 50 लाख रुपये से ज्यादा हुई, तो संपत्ति बेचने पर 1 फीसदी की दर से टीडीएस लगेगा। सिक्यूरिटी ट्रांजेक्शन टैक्स (एसटीटी) में कमी के जरिये भी इक्विटी बाजार के प्रति आम निवेशकों का रुझान बढ़ाने की कोशिश बजट में की गई है।
वित्त मंत्री ने इक्विटी वायदा सौदों पर एसटीटी को 0.017 फीसदी से घटा कर 0.01 प्रतिशत कर दिया है। जाहिर है कि ट्रेडिंग पर कर की दर घटने से ज्यादा निवेशकों की रुचि शेयरों की खरीद-फरोख्त की ओर बढ़ेगी। विदेशी निवेशकों के भारतीय बाजार में कॉरपोरेट बांड्स के जरिये निवेश के मामले में विदहोल्डिंग टैक्स में कमी किया जाना घरेलू बांडों में विदेशी निवेशकों को धन लगाने के लिए आकर्षित करने वाला कदम है। इसके अलावा म्यूचुअल फंडों के जरिये कॉरपोरेट बांड के बाजार को बढ़ाने की कवायद भी बजट में की गई है। बांड के डिस्ट्रीब्यूशन में हिस्सा लेकर म्यूचुअल फंड हाउस अब एक तरह से स्टॉक एक्सचेंजों के सदस्यों के रूप में काम कर सकेंगे।
बजट में महंगाई आधारित बांड शुरू करने की घोषणा भी निवेश के लिहाज से एक महत्वपूर्ण कदम है। यह उन लोगों के लिए बाजार में निवेश के लिए दरवाजे खोलेगा, जो महज इस आशंका में निवेश नहीं करते कि कहीं उनके निवेश पर मिलने वाला रिटर्न तेजी से बढ़ती महंगाई के आगे नाकाफी साबित न हो। जो लोग अपने रिटर्न पर मिलने वाली आय को महंगाई की मार से बचाना चाहते हैं, उनके लिए महंगाई आधारित बांड और महंगाई आधारित नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट को भी लाया जाएगा। इसके जरिए परंपरागत निवेशक और सीनियर सिटीजन अपनी कमाई को बचा सकते हैं। इससे महंगाई बढ़ने के साथ-साथ ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने के बाद निवेशकों द्वारा कमाया जाने वाला ब्याज भी लगातार बढ़ सकेगा।