काम की बात: महंगाई को मात देने वाले सुरक्षित निवेश
- किसी भी निवेश विकल्प में पैसे लगाने से पहले उसकी पड़ताल करना बेहद जरूरी होता है। इसे ब्याज दर, लॉक इन अवधि, कर व्यवस्था और निकासी के नियमों से परखा जा सकता है
- 1.5 प्रतिशत का औसत अंतर है अभी रेपो रेट और महंगाई दर में
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एफडी व अन्य बचत योजनाओं पर घटती ब्याज दरों और बढ़ती महंगाई ने निवेशकों की मुश्किलें भी बढ़ा दी हैं। ज्यादा ब्याज के लिए बाजार का रुख करते हैं, तो वहां जारी अनिश्चितता निवेश पर जोखिम बढ़ा सकती है। ऐसे में सुरक्षा के साथ महंगाई को मात देने वाले विकल्पों की तलाश है तो ऐसे ही कुछ निवेश की जानकारी दे रही प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट...
सरकारी कर बचत योजनाएं
निवेश सलाहकार बलवंत जैन का कहना है कि अधिकतर बचत योजनाओं पर ब्याज दरें गिरने के बावजूद अभी कई विकल्प हैं, जो महंगाई को पार करके रिटर्न दे सकते हैं। दरअसल, महामारी से निपटने के लिए भारत सहित दुनियाभर की सरकारों ने भारी-भरकम राहत पैकेज दिया है, जिससे खुदरा महंगाई बढ़ना तय है। ऐसे में निवेश पर मिलने वाले अधिकतर रिटर्न को तो महंगाई ही खा जाती है।
1.5 प्रतिशत का औसत अंतर है अभी रेपो रेट और महंगाई दर में
अगर आपको एफडी पर 5.5 प्रतिशत ब्याज मिल रहा और खुदरा महंगाई भी 5 से 6 प्रतिशत के दायरे में चल रही तो साल भर में आपका वास्तविक रिटर्न शून्य हो जाएगा। इससे बचने के लिए वीपीएफ, आरबीआई टैक्स सेविंग बांन्ड और एनएससी जैसे विकल्पों में हाथ आजमा सकते हैं।
चार मानकों से परखें निवेश
किसी भी निवेश विकल्प में पैसे लगाने से पहले उसकी पड़ताल करना बेहद जरूरी होता है। इसे ब्याज दर, लॉक इन अवधि, कर व्यवस्था और निकासी के नियमों से परखा जा सकता है। वीपीएफ और ईएलएसएस इन मानकों पर सबसे ज्यादा खरे उतरते हैं। भारत में कुल निवेश का 57 प्रतिशत एफडी में जाता है लेकिन अभी न तो इस पर ब्याज ज्यादा है, न ही टैक्स छूट और न ही आपात निकासी की सरल व्यवस्था। - कार्तिक जावेरी, निवेश सलाहकार
इक्विटी विकल्पों पर यहां आजमाएं दांव
- इंडेक्स फंड सिप : बिना जोखिम उठाए शेयर बाजार से रिटर्न लेना चाहते हैं, तो इंडेक्स फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (सिप) के जरिये पैसे लगा सकते हैं। अप्रैल 2021 के पिछले 10, 20 और 30 वर्षों में इक्विटी ने औसत 10 प्रतिशत का रिटर्न दिया है।
- ईएलएसएस : इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम में निवेश और रिटर्न पर न सिर्फ टैक्स छूट मिलती है बल्कि लंबी अवधि के लिए पैसे लगाएं तो 15 प्रतिशत बड़ा रिटर्न हासिल किया जा सकता है। आयकर की धारा 80सी के तहत इस में सालाना 1.5 लाख रुपये तक निवेश पर अभी टैक्स छूट दी जा रही है।
यहां निवेश पर रिटर्न की गारंटी
वीपीएफ
कर्मचारी भविष्य निधि योजना (ईपीएफ) से जुड़ा विकल्प होता है वाल्यूटरी प्रोविडेंट फंड, जिस पर 8.50 प्रतिशत का समान ब्याज भी मिल रहा है। हालांकि, इस साल से योजना पर अधिकतम 2.5 लाख रुपये सालाना निवेश पर ही टैक्स छूट सीमा तय हो गई है, फिर भी इसमें निवेश कर बड़ा रिटर्न लिया जा सकता है।
आरबीआई बांड
रिजर्व बैंक की ओर से जारी किए जाने वाले टैक्स बचत बांड पर अभी 6.8 प्रतिशत का ब्याज मिल रहा है, जो बदलती रहती है। इसकी ब्याज दर एनएससी पर निर्भर करती है और इसमें बढ़ोतरी होने पर बांड का रिटर्न भी बढ़ जाता है। इस पर भी टैक्स छूट का लाभ मिलता है।
राष्ट्रीय बचत पत्र
इसकी ब्याज देने रेपो रेट पर आधारित होती हैं। अभी रेपो रेट 4 प्रतिशत के न्यूनतम स्तर पर है और भविष्य में इसके बढ़ने की उम्मीद ज्यादा है। ऐसा होने पर आने वाले समय में एनएससी का ब्याज भी बढ़ेगा, जो फिलहाल 6.80 प्रतिशत है। इस पर टैक्स छूट भी मिलती है।
वरिष्ठ नागरिकों की विशेष योजना
60 साल से ज्यादा उम्र वाले निवेशकों के लिए सरकार दो विकल्प देती है। प्रधानमंत्री वय वंदन योजना, जिसमें अभी 7.40 प्रतिशत रिटर्न दिया जाता है। इसी तरह वरिष्ठ नागरिक बचत योजना पर भी 7.40 प्रतिशत कर मुक्त ब्याज मिलता है। इसमें सालाना 15 लाख रुपये तक निवेश किया जा सकता है।