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वसीयत न होने पर झेलनी पड़ती हैं ये परेशानियां
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Wed, 16 Jan 2013 05:35 PM IST
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उत्तराधिकार के कानून सभी धर्मों के लिए हैं। धार्मिक मान्यताओं के आधार पर देश में हिंदुओं के लिए हिंदू उत्तराधिकार कानून हैं तो मुस्लिम संप्रदाय में शिया और सुन्नियों के लिए अलग कानून हैं। ईसाई और पारसी के भी उत्तराधिकार कानून हैं। वसीयत के मामले में हर कोई अपना वसीयत लिख सकता है। सादे कागज पर लिखा गया वसीयत भी कानून की नजर में वैध होता है।
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इच्छानुसार बंटवारा नहीं
वसीयत न होने पर व्यक्ति की इच्छानुसार संपत्ति का बंटवारा नहीं होता, बल्कि संपत्ति का कानूनी बंटवारा इंडियन सक्सेशन एक्ट, हिन्दू सक्सेशन एक्ट, मुस्लिम पर्सनल लॉ के प्रावधानों के तहत होता है।
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लंबी कानूनी प्रक्रिया
वसीयत न होने पर उत्तराधिकारियों को लंबी कानूनी प्रक्रिया का पालन कर सक्सेशन सर्टिफिकेट लेना होता है, जिसमें छह महीने से एक साल तक का समय लग जाता है।
भारी-भरकम खर्चे
सक्सेशन सर्टिफिकेट हासिल करने में समय के साथ-साथ पैसा भी काफी खर्च करना पड़ता है, क्योंकि इसके लिए कुल संपत्ति के मूल्य के करीब 8 से 10 प्रतिशत तक की कोर्ट फीस और अन्य कई तरह के कानूनीखर्चे भी अदा करने होते हैं।
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परिवार में विवाद
वसीयत के जरिये संपत्ति का बंटवारा न किए जाने पर अकसर परिवार में जायदाद को लेकर विवाद खड़े हो जाती हैं और कई वर्षों तक चलने वाली मुकदमेबाजी के बाद ही संपत्ति के उत्तराधिकार का फैसला हो पाता है।
संपत्ति से वंचित
वसीयत न लिखे जाने का सबसे बड़ा नुकसान ऐसे मामलों में होता है, जब परिवार के सदस्यों को व्यक्ति की संपत्तियों की ठीक-ठीक जानकारी नहीं होती। ऐसे कुछ संपत्तियां तो उन्हें प्राप्त नहीं हो पातीं।
टैक्स प्लानिंग में दिक्कत
वसीयत न होने पर उत्तराधिकार की संपत्ति के बारे में स्थिति स्पष्ट न होने से वारिसों को टैक्स प्लानिंग में भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है, जिसके चलते वारिस पर्याप्त टैक्स बचत नहीं कर पाते हैं, जबकि वसीयत के तहत वारिसों की टैक्स प्लानिंग सही ढंग से की जा सकती है।
‘उत्तराधिकार टैक्स’ की तैयारी
आने वाले बजट में सरकार कुछ नए तरह के टैक्स लगा सकती है। सरकार को पैसे की दरकार है और अब वह टैक्स बढ़ाने के उपाय सोच रही हैं। सरकार की इस कोशिशों के संदर्भ में उसे ‘उत्तराधिकार टैक्स’ लगाने का सुझाव मिला है। यानी, अगली पीढ़ी को संपत्ति ट्रांसफर करने पर टैक्स लगाया जाए।
पिछले दिनों वित्तमंत्री पी. चिदंबरम के साथ बैठक में चुनिंदा अर्थशास्त्रियों ने उत्तराधिकार टैक्स लगाने का सुझाव दिया है। यानी, अगर किसी व्यक्ति को विरासत में पैसे या संपत्ति मिलती है, तो उस पर सरकार टैक्स लगाए।