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काम की खबर: इस तरह आसानी से कैलकुलेट करें EPF का बैलेंस और ब्याज

Sat, 25 Apr 2020 11:45 AM IST
‌डिंपल अलवधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Sat, 25 Apr 2020 11:45 AM IST
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know ho to calculate EPF balance and inerest rate
सांकेतिक तस्वीर

पिछले माह कर्मचारी भविष्य निधि जमा पर चालू वित्त वर्ष 2019-20 के लिए ब्याज दर घटाकर 8.50 फीसदी कर दी गई थी, जो ईपीएफ की पिछले सात सालों में सबसे कम ब्याज दर है। वित्त वर्ष 2018-19 के लिए भविष्य निधि पर ब्याज दर 8.65 फीसदी थी।

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कर्मचारी और नियोक्ता करते हैं योगदान
हालांकि वित्त मंत्रालय ने अभी तक इसे अधिसूचित नहीं किया है। कर्मचारी और उनके नियोक्ता हर महीने ईपीएफ में योगदान करते हैं, जो एक रिटायरमेंट बेनेफिट स्कीम है। कर्मचारी और नियोक्ता दोनों वेतन का 12-12 फीसदी ईपीएफ में योगदान देतो हैं। 
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ईपीएस में भी जाता है योगदान 
इसमें से जो योगदान नियोक्ता अर्थात कंपनी करती है, उसमें से 8.33 फीसदी कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) में जाता है और बाकी की राशि कर्मचारी के पीएफ खाते में जाती है। कर्मचारी पेंशन योजना के लिए सैलरी की अधिकतम सीमा 15,000 रुपये प्रति महीने है। यानी ईपीएस में हर महीने अधिकतम योगदान की सीमा 1250 रुपये है। 

ऐसे होती है ब्याज की गणना 

  • अगर आपकी बेसिक सैलरी और अलाउंस कुल 20,000 रुपये है, तो इसके हिसाब से आपका ईपीएफ में योगदान 2400 रुपये होगा। वहीं आपके नियोक्ता का अधिकतम 15,000 रुपये पर 8.33 फीसदी यानी 1150 रुपये का योगदान होगा। इस तरह तो आपके ईपीएफ में कुल जमा 3550 रुपये होगी। 
  • अप्रैल में आपके ईपीएफ खाते में 3550 रुपये जमा हुए, लेकिन इसपर आपको कोई ब्याज नहीं मिलेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि सैलरी अप्रैल के अंतिम दिनों में आएगी। इसके बाद मई में दोबारा 3550 रुपये आपके खाते में जमा होंगे। अब आपके ईपीएफ खाते में कुल 7100 रुपये हैं। 
  • मौजूदा समय में ईपीएफ पर ब्याज दर 8.5 फीसदी है। इसे 12 से भाग करना होगा क्योंकि कर्मचारियों को 12 महीनों का ब्याज एक साथ मिलता है। 8.5 फीसदी को 12 से विभाजित करने पर 0.70 फीसदी मासिक ब्याज मिलेगा। यानी 7100 रुपये पर कर्मचारियों को करीब 50 रुपये का ब्याज मिलेगा। इसी तरह आप आगे के ब्याज की गणना कर सकते हैं।
     

ध्यान रहे कि ईपीएफ के नियमों में सितंबर 2014 के बाद कुछ बदलाव आया है। इसलिए यहां यह मान कर ब्याज की गणना की गई है कि कर्मचारी सितंबर 2014 से पहले ईपीएफओ का सदस्य बना था। ईपीएफ ब्याज की गणना हर माह होती है, लेकिन कर्मचारियों के खाते में वित्तीय वर्ष के अंत में ही राशि जमा होती है। 

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