निवेशक को चुकाना होगा इस तिमाही मिले लाभांश पर टैक्स, ऐसे करें कैल्कुलेट
- 20 फीसदी टैक्स अधिकतम लगेगा डिविडेंड के रूप में अर्जित कुल आय पर
- 1 अप्रैल, 2020 से कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाले डिविडेंड पर नया नियम
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घरेलू कंपनियां पहली तिमाही (अप्रैल-जून) के नतीजे जारी कर रही हैं। जिन कंपनियों को मुनाफा हुआ है, वे अपने निवेशकों को डिविडेंड (लाभांश) के रूप में मुनाफे में हिस्सेदारी देंगी। हालांकि, निवेशकों को अब इस डिविडेंड आय पर टैक्स का भुगतान करना होगा, जो पहले कंपनियां करती थीं।
दरअसल, कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स की ओर मिलने वाली डिविडेंड आय पर लाभांश वितरण कर (डीडीटी) खत्म कर दिया गया है। 1 अप्रैल, 2020 से प्रभावी नए नियम के मुतिबक, म्युचुअल फंड्स और घरेलू कंपनियों से मिलने वाली डिविडेंड आय पर आम निवेशकों यानी आपको टैक्स देना होगा। आसान शब्दों में कहें तो मिलने वाला डिविडेंड आपकी कुल आमदनी में जुड़ जाएगा, जिस पर स्लैब के हिसाब से टैक्स चुकाना होगा।
10 फीसदी देना पड़ता था टैक्स
आयकर अधिनियम-1961 की धारा 57 में संशोधन के अनुसार डिविडेंड के रूप में अर्जित कुल आय के अधिकतम 20 फीसदी ही टैक्स लगेगा। नए नियम का उद्देश्य कंपनियों और म्यूचुअल फंड्स की ओर दिए गए डिविडेंड पर डीडीटी का भार खत्म कर निवेशकों पर डालना है। इससे पहले 10 लाख रुपये तक की डिविडेंड आय कर टैक्स नहीं लगता था। लेकिन, 10 लाख से ज्यादा डिविडेंड आय 10 फीसदी टैक्स लगता था।
ऐसे समझें गणित...
- व्यक्तिगत भारतीय निवेशकों के लिए: सरकार ने आम निवेशकों के लिए सालाना 10 लाख रुपये से ज्यादा डिविडेंड आय पर लगने वाले 10 फीसदी टैक्स खत्म कर दिया है। इसलिए ऐसे निवेशकों के लिए डिविडेंड पर टैक्स की गणना स्लैब के अनुसार होगी।
- भारतीय कंपनियों के लिए: कॉरपोरेट्स निवेशकों के लिए डिविडेंड आय पर टैक्स की गणना प्रभावी स्लैब के अनुसार होगी, जो 25.17 फीसदी से 34.94 फीसदी के दायरे में है। इसमें सरचार्ज एवं सेस दोनों शामिल हैं।
- अनिवासी भारतीयों के लिए: वैसे अनिवासी भारतीय जिन्होंने भारतीय शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड्स में निवेश किया है, उन्हें डिविडेंड पर 20 फीसदी टैक्स देना होगा। हालांकि, विदेशी कंपनियों को 5 से 15 फीसदी तक डिविडेंड चुकाना है, जो इस बात पर निर्भर है कि किस देश से भारत के टैक्स समझौते कैसे हैं।
डिविडेंड पर 7.5 फीसदी टीडीएस भी
नए नियम के तहत, अगर डिविडेंड के जरिए 5,000 रुपये की कमाई होती है तो टीडीएस नहीं कटेगा। लेकिन, डिविडेंड आय 5,000 रुपये से ज्यादा होने पर 10 फीसदी की दर से टीडीएस का भुगतान करना होगा।
14 मई, 2020 से 31 मार्च, 2021 तक के लिए टीडीएस दर घटाकर 7.5 फीसदी कर दी गई हैं। इस दौरान मिले डिविडेंड पर 7.5 फीसदी टीडीएस ही कटेगा। अगर कंपनी के पास आपके पैन की डिटेल नहीं है तो 20 फीसदी टीडीएस कटेगा।
निवेशकों पर कर का दोहरा बोझ पड़ेगा
इस कदम से निवेशकों पर कर का दोहरा बोझ पड़ेगा। एक तो डिविडेंड पर टीडीएस देना होगा और दूसरा डिविडेंड के उनकी सालाना कमाई में जुड़ने पर स्लैब के अनुसार टैक्स का भी भुगतान करना होगा। हालांकि, टीडीएस पर क्लेम ले सकेंगे। -अतुल गर्ग, कर विशेषज्ञ