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चिंता-मनी 30: घर खरीदना अच्छा रहेगा या किराये पर रहना ही बेहतर है?
Tue, 15 Sep 2020 01:33 AM IST
योगेश साहू
नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार
Published by: योगेश साहू
Updated Tue, 15 Sep 2020 01:33 AM IST
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : pixabay
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सुमित अवस्थी अपनी पत्नी और छह साल की बेटी के साथ दिल्ली में किराये के घर में रहते हैं और पिछले कई साल से कर्ज लेकर अपना घर खरीदने के बारे में सोच रहे हैं। कोविड-19 के प्रसार के बीच उनके दलाल ने उन्हें सुझाव दिया है कि घर खरीदने का यह सबसे अच्छा समय है, क्योंकि कीमत गिर रही है।
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सुमित जानना चाहते हैं कि इस समय घर खरीदना ठीक रहेगा या किराये पर रहना। हर भारतीय यह सपना देखता है कि उसका अपना घर हो। बैंकों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों द्वारा होम लोन मुहैया कराए जाने के कारण पिछले दो दशकों में घर खरीदने की प्रवृत्ति काफी तेजी से बढ़ी है। चूंकि होम लोन लेने पर ब्याज और मूलधन चुकाने के समय कर छूट मिलती है, इसलिए भी घर खरीदना सुविधाजनक पड़ता है।
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सुमित अगर होम लोन लेकर घर खरीदते हैं, तो वह उन असंख्य भारतीयों की श्रेणी में आ जाएंगे, जिन्होंने होम लोन लेकर घर खरीदने का सपना साकार किया है। दूसरी तरह के लोग वे हैं, जो होम लोन लेकर भी अपने शहर से दूर दूसरे शहर में घर खरीदना गवारा नहीं कर सकते, इसलिए किराये पर रहते हैं।
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इन दोनों ही विकल्पों के फायदे और नुकसान हैं। और यह नहीं कहा जा सकता कि इन दो विकल्पों में से कौन-सा अच्छा है, क्योंकि अपना घर खरीदना या किराये पर रहना किसी व्यक्ति के फैसले और उसकी क्षमता पर निर्भर करता है। लेकिन ईएमआई ने न केवल घर खरीदना संभव कर दिया है, बल्कि यह आर्थिक रूप से फायदेमंद भी है, जिसका असंख्य भारतीयों ने लाभ उठाया है।
घर खरीदने के फायदे
घर खरीदकर आप संपत्ति बनाते हैं, जो आपका अपना होता है, और इससे आपकी कुल संपत्ति में वृद्धि होती है। इसके अलावा घर खरीदने के बाद आपको किराया देने की चिंता नहीं रहती, न ही इसका डर रहता है कि न जाने, कब मकान मालिक आपको घर खाली करने के लिए या फिर किराया बढ़ाने की बात कहे।
सुविधाओं के अलावा होम लोन लेने पर आप टैक्स रियायत का दावा भी कर सकते हैं। आयकर कानून की धारा 80 सी के तहत आप अपने मूलधन पर 1.50 लाख रुपये तक की कर छूट का दावा कर सकते हैं। इसमें स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क को भी शामिल किया जा सकता है, लेकिन ऐसा एक बार ही किया जा सकता है।
इसी तरह धारा 24 के तहत आप कर्ज के ब्याज पर दो लाख रुपये तक की छूट का दावा कर सकते हैं। लेकिन यह छूट तभी हासिल की जा सकती है, जब आपके द्वारा खरीदे गए घर का निर्माण होम लोन लेने के पांच साल के अंदर पूरा हुआ हो। अगर इस अवधि में निर्माण कार्य पूरा नहीं हुआ हो, तो आप कर में 30,000 रुपये की छूट का दावा कर सकते हैं।
इसके अलावा पहली बार घर खरीदने वाले 50 लाख से कम कीमत वाले घर की खरीद पर धारा 80 सी के तहत प्रत्येक साल 50,000 रुपये की कर छूट का दावा कर सकते हैं, पर शर्त यह है कि इसमें होम लोन 35 लाख से अधिक नहीं होना चाहिए।
किराये पर रहने के लाभ
किराये के घर पर रहने के भी फायदे हैं। बेशक आप होम लोन नहीं चुका रहे, लेकिन आप एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) का लाभ ले सकते हैं और आपके पास एक से दूसरा घर किराये पर लेने की सहूलियत भी रहती है। किराये पर रहना वैसे लोगों के लिए अच्छा रहता है, जिनकी ट्रांस्फर वाली नौकरी है और जिनके पास उन शहरों में घर है, जहां वे नहीं रहते।
किराये पर रहना उन लोगों के लिए भी सुविधाजनक है, जो मानते हैं कि कर्ज चुकाना कठिन होता है। अगर आप एचआरए का दावा कर रहे हैं, तो आपको जानना चाहिए कि यह इनमें से सबसे कम होता है- (1) नियोक्ता द्वारा प्राप्त एचआरए; (2) चुकाया गया वास्तविक किराया मासिक मूल वेतन के 10 प्रतिशत से कम; (3)करदाता मेट्रो शहर में रहता है, तो किराया मूल वेतन का 50 प्रतिशत; (4)करदाता गैर मेट्रो शहर में रहता है, तो किराया मूल वेतन का 40 प्रतिशत।
सुमित को घर खरीदने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति की पड़ताल करनी चाहिए। अगर वह कर्ज लेने के बारे में सोच रहे हैं, तो उन्हें अपनी नौकरी और भविष्य की आय का आकलन करना चाहिए, क्योंकि कोविड का असर आगे भी रहने वाला है। सिर्फ सस्ते कर्ज और कर छूट से आकर्षित होकर होम लोन लेना खतरनाक है। अगर आप कर्ज लेते हैं, तो निश्चित करें कि 15-20 साल के बजाय 10-12 साल में ही कर्ज चुका देंगे।