चिंता मनी-33ः क्या मैं ग्रेच्युटी से पैसे निकाल सकता हूं?

नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार Updated Fri, 18 Sep 2020 07:38 AM IST
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रुपये - फोटो : pixabay

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रमेश त्यागी एक छोटे स्तर के ऑटो कंपोनेंट मैन्यूफैक्चरर कंपनी में पिछले 25 साल से काम कर रहे हैं। वह 56 साल के हैं और उनके रिटायरमेंट में अभी चार साल हैं। कोविड-19 के कारण पिछले छह महीने उनके लिए बेहद कठिनाई भरे रहे हैं और वह जानना चाहते हैं कि अपनी ग्रेच्युटी से वह रुपये निकाल सकते हैं या नहीं। हरियाणा के रेवाड़ी में नौकरी करते हुए रमेश त्यागी के जीवन के करीब ढाई दशक बहुत आराम से निकल गए। अपनी उम्रदराज मां, पत्नी और दो बेटों के साथ कुल पांच लोगों का परिवार अपने ही घर में रहता है। 
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उनका बड़ा बेटा पिछले तीन साल से एप आधारित टैक्सी चलाता था, लेकिन छह महीने से उसका काम बंद है। उनके छोटे बेटे ने एक साल पहले एक ऑटो मैन्यूफैक्चरिंग कंपनी में नौकरी शुरू की थी, पर कोरोना के कारण कुछ ही महीने बाद उसकी नौकरी छूट गई। महामारी ने त्यागी परिवार की आर्थिक मुश्किलें इतनी बढ़ा दी हैं कि अचानक भविष्य अंधकारमय दिखने लगा है। रमेश त्यागी ने इस साल अपने बड़े बेटे की शादी के बारे में सोचा था, पर फिलहाल ऐसा संभव नहीं है।
इस साल की शुरुआत में परिवार के तीन सदस्य कमाने वाले थे, लेकिन अब फिर से रमेश त्यागी अकेले कमाने वाले हैं। उन्हें वह कार लोन भी चुकाना है, जो उनके बड़े बेटे ने दो साल पहले लिया था। चूंकि कोविड के कारण त्यागी जी की आय 30 फीसदी कम हो गई है, इसलिए वह ग्रेच्युटी से कर्ज लेने के बारे में सोच रहे हैं, ताकि कार लोन चुका सकें और घर में भी कुछ अतिरिक्त नकदी रहे।
वे जानना चाहते हैं कि ग्रेच्युटी किसे मिलती है?
ग्रेच्युटी एक अनिवार्य रिटायरमेंट लाभ है, जो संस्थानों में कर्मचारियों की सेवा के लिए नियोक्ताओं द्वारा दिया जाता है। शुरुआत में इसका लाभ सिर्फ फैक्टरियों में काम करने वाले कर्मचारियों को मिलता था, लेकिन बाद में सरकारी नियंत्रण वाले तथा कई राज्यों में शाखाओं वाले संस्थानों तक इसका विस्तार किया गया। एक ही कंपनी में लगातार पांच साल तक नौकरी करने वाले कर्मचारी ग्रेच्युटी के हकदार होते हैं। हालांकि पहले ही मृत्यु होने या दिव्यांगता की स्थिति में पांच साल से कम काम करने वालों को भी इसका लाभ मिलता है। 

ग्रेच्युटी की गणना पीएफ के विपरीत, जिसमें कर्मचारी तथा नियोक्ता, दोनों अंशदान करते हैं, ग्रेच्युटी का भुगतान कंपनियां अपनी जेब से करती हैं। पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी ऐक्ट, 1972 के मुताबिक, कर्मचारी के वेतन के कुछ प्रतिशत की गणना कर उसे ग्रेच्युटी खाते में डाल दिया जाता है। इस तरह कंपनी से निकलने वक्त ग्रेच्युटी सेवानिवृत्ति लाभ के रूप में काम करती है।

10 से अधिक कर्मचारियों वाली हर कंपनी में ग्रेच्युटी ऐक्ट लागू होता है। ग्रेच्युटी की राशि इस्तीफा, रिटायरमेंट, अस्थायी छंटनी या स्वैच्छिक रिटायरमेंट, मृत्यु, छंटनी, दिव्यांगता और नौकरी से निकाले जाने पर मिलती है। कर्मचारी की मृत्यु होने की स्थिति में यह राशि उसके नॉमिनी को मिलती है। ग्रेच्युटी की गणना कंपनी में सेवा के साल तथा आखिरी बार मिले मूल वेतन व महंगाई भत्ते के आधार पर की जाती है।

ग्रेच्युटी की गणना के नियम के अनुसार, प्रत्येक बार साल पूरा होने के छह महीने या उसके कुछ समय बाद 15 दिन के वेतन की गणना की जानी चाहिए। यह गणना आखिरी बार मिले वेतन के आधार पर होती है। महीने में काम करने के 26 दिन गिने जाते हैं। हर साल की ग्रेच्युटी की गणना के लिए आखिरी बार मिले वेतन को 26 से भाग किया जाता है, फिर 15 से उसे गुणा किया जाता है। 

यानी ग्रेच्युटी  = आखिरी बार मिले मूल वेतन व महंगाई भत्ता x (15/26) x नौकरी के कुल साल। यानी अगर किसी का मूल वेतन 10,000 और महंगाई भत्ता 2,000 रुपये है और वह 10 साल काम करने के बाद कंपनी छोड़ता है, तो उसकी ग्रेच्युटी 69,230 रुपये होगी।

चूंकि रमेश अब भी कंपनी में काम कर रहे हैं, इसलिए वह अपनी ग्रेच्युटी से रकम नहीं निकाल सकते। लेकिन वह अपनी कंपनी से बात कर इस्तीफा देकर ग्रेच्युटी निकाल सकते हैं, और कुछ महीने बाद दोबारा कंपनी में काम शुरू कर सकते हैं। लेकिन मौजूदा दौर में, जब कंपनियां कर्मचारियों की संख्या कम करने के मूड में हैं, इस तरह का फैसला जोखिम भरा हो सकता है।

चूंकि उनकी नौकरी दो दशक से अधिक की हो चुकी है, ऐसे में, वह पीएफ से कर्ज लेकर कार लोन चुका सकते हैं। इसके अलावा वह परिवार में आर्थिक सहायता के लिए अपने बेटों के रोजगार की भी राह तलाश सकते हैं।
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