डिबेंचर: इस सरकारी कंपनी ने दिया मोटी कमाई का मौका, जानिए योजना के बारे में सब कुछ
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अगर आप चाहते हैं कि आपको सालाना 7.15 पीसदी की दर से ब्याज मिले, तो आपके लिए निवेश का मौका आ गया है। भारत के अग्रणी वित्तीय संस्थानों में एक पॉवर फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 5,000 करोड़ रुपये के कर-योग्य गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (NCD) निर्गम पेश किया है।
आपको कितना मिलेगा ब्याज?
- तीन वर्ष की अवधि के एनसीडी में 4.65 फीसदी वार्षिक से 4.80 फीसदी वार्षिक तक निर्धारित ब्याज दर की पेशकश है।
- पांच वर्ष की अवधि के एनसीडी में 5.65 फीसदी वार्षिक से 5.80 फीसदी वार्षिक ब्याज दर की पेशकश की गई है।
- 10 वर्ष की अवधि के एनसीडी में निर्धारित और अस्थिर ब्याज में निर्धारित न्यूनतम दर या अधिकतम दर के अधीन है। निर्धारित ब्याज दर 6.63 फीसदी वार्षिक से 7.00 फीसदी वार्षिक है।
- 15 वर्ष की अवधि के एनसीडी में 7.15 फीसदी वार्षिक की अधिकतम ब्याजदर के साथ अनेक निर्धारित ब्याज दरें हैं।
सबसे कम है जमा जोखिम
एनसीडी की रेटिंग केयर रेटिंग लिमिटेड द्वारा 'केयर एएए' स्थिर, क्रिसिल लिमिटेड द्वारा 'क्रिसिल एएए/स्थिर' तथा इक्रा लिमिटेड द्वारा 'इकरा एएए (स्थिर)' रेटिंग दी गई है। ऐसी रेटिंग वाले एनसीडी को वित्तीय दायित्वों का समय पर पालन के संबंध में उच्च रूप से सुरक्षित माना जाता है और इनमें जमा जोखिम सबसे कम होता है।
शुक्रवार को निर्गम की शुरुआत के पहले दिन 4,700 करोड़ रुपये या 94 फीसदी बॉन्ड के लिए ग्राहकों की बोली मिल चुकी थी। आगे खुदरा निवेशकों के लिए केवल 300 करोड़ रुपये के बॉन्ड बचे हैं, जिन्हें 18 जनवरी को आसानी से सब्सक्राइब कर लिया जाएगा। पीएफसी का यह एनसीडी डिमैट फॉर्मैट में उपलब्ध है और निवेशक यूपीआई के जरिए पेमेंट कर सकते हैं।
इसलिए अगर आप भी इसमें निवेश की योजना बना रहे हैं, तो आइए जानते हैं कि डिबेंचर क्या होते हैं और इससे निवेशक और कंपनी को क्या फायदा होता है।
क्या है डिबेंचर?
डिबेंचर इक्विटी शेयरों से भिन्न, एक तरह का ऋण का साधन है। इसके माध्यम से सरकार या कंपनियां धन जुटाती हैं। डिबेंचर खरीदने वाला वास्तव में कर्जदाता होता है। डिबेंचर जारी करने वाली कंपनी गिरवी के तौर पर कुछ नहीं रखती, लेकिन खरीदार उनकी साख और प्रतिष्ठा को देखते हुए डिबेंचर खरीदते हैं। डिबेंचर जारी करने वाली कंपनी या संस्थान कर्जदाताओं (डिबेंचर खरीदने वालों को) निश्चित ब्याज देते हैं।
कंपनियों के लिए ब्याज देना जरूरी
कंपनियां शेयरधारकों को भले ही लाभांश नहीं दे लेकिन उसे कर्जदाताओं (डिबेंचरधारकों) को ब्याज देना अनिवार्य होता है। सरकार द्वारा जारी किया जाने वाला ट्रेजरी बॉन्ड या ट्रेजरी बिल आदि भी जोखिम रहित डिबेंचर ही होते हैं।
एफडी से लाभदायक हो सकता है डिबेंचर
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा ब्याज दरों में कटौती से बैंकों ने फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरें काफी नीचे रखी हैं। मौजूदा समय में ज्यादातर बैंक पांच से छह फीसदी की दर पर एफडी की पेशकश कर रहे हैं। ऐसे में आपके लिए डिबेंचर निर्गम में निवेश करना लाभदायक साबित हो सकता है।
दो प्रकार के होते हैं डिबेंचर
- पहला - परिवर्तनीय डिबेंचर या परिवर्तनीय बॉन्ड ऐसे बॉन्ड होते हैं, जिन्हें पूर्व निर्धारित अवधि के बाद जारी करने वाली कंपनी के इक्विटी शेयरों में परिवर्तित कर सकते हैं। ये डिबेंचर पूरी तरह से, आंशिक या वैकल्पिक रूप से परिवर्तनीय हो सकते हैं। निवेशकों को कंपनी द्वारा किए जा रहे ब्याज के भुगतान से फायदा होता है और उनके पास लोन को इक्विटी में बदलने का विकल्प भी होता है। इस तरह ये कंपनी की वृद्धि में हिस्सेदार बन सकते हैं।
- दूसरा - अपरिवर्तनीय डिबेंचर केवल नियमित डिबेंचर होते हैं। यानी इन्हें उत्तरदायी कंपनी के इक्विटी शेयरों में परिवर्तित नहीं किया जा सकता है। परिणामस्वरूप, आम तौर पर परिवर्तनीय प्रतिरूप के मुकाबले उन पर उच्च ब्याज दर लगता है।