उद्योग नगरी में नीचे जा रहा है निवेश का ग्राफ

नई दिल्ली/कानपुर/ब्यूरो Updated Wed, 31 Oct 2012 12:33 AM IST
investment graph is below in Kanpur
उत्तर प्रदेश की उद्योग नगरी और कारोबार के प्रमुख केंद्र कानपुर में लोगों की बचत में कमी आ रही है। शहर की सरकारी वित्तीय संस्थानों में निवेश जहां 20-25 फीसदी कम हुआ है, वहीं इक्विटी, म्यूचुअल फंड निवेश में शहर राजधानी लखनऊ से पिछड़ गया है। इसी तरह बीमा क्षेत्र में भी निवेश गिरा है, साथ ही शेयर बाजार से भी रिटेल निवेशक दूर हो रहा है।

पूंजी बाजार से जुड़े लोगों की मानें, तो मंदी की मार और लगातार घटते औद्योगिक उत्पादन का असर शहर पर साफ दिख रहा है। फाइनेंशियल कंसल्टेंट आलोक अग्रवाल के अनुसार कि शेयर बाजार और म्यूचुअल फंड आदि में निवेश में रिटेल निवेशकों ने कमी कर दी है। जबकि बड़ी पूंजी वाले निवेशकों ने कम जोखिम वाले (लो वोलेटाइल) विकल्प के रूप में म्यूचुअल फंड में निवेश करना शुरू कर दिया है।

कानपुर में निवेश पर कैम, कार्वी-एमएफएस, फ्रैंकलिन टेम्पलटन इनवेस्टमेंट, सुंदरम बीएनपी परिबा फंड सर्विस के निवेश संबंधी आंकड़ों के अनुसार जुलाई 2012 तक कानपुर में ऐसा निवेश करीब 3,600 करोड़ रुपये रहा है। नार्थ सेंट्रल जोन इंश्योरेंस इंप्लाइज फेडरेशन (एनसीजेडआईईएफ) के जनरल सेक्रेट्री अशोक तिवारी के अनुसार इंश्योरेंस क्षेत्र में भी बाजार का मोह कम हुआ। निजी बीमा कंपनियों को इसका खासा नुकसान हुआ।

वहीं इंडस्ट्री जगत का कहना है कि भले ही शहर में अभी निवेश कम हो रहा है, पर जिस तरह से राष्ट्रीय स्तर पर साल 2003 से म्यूचुअल फंड उद्योग सात लाख करोड़ रुपये के स्तर तक आज पहुंचा है उसे देखते हुए उसके 2020 तक 20 लाख करोड़ पर पहुंच जाने की संभावना है। इसे देखते हुए कंपनियों का प्रमुख फोकस छोटे शहरों पर ही रहेगा। कंपनियां ऐसे में कानपुर जैसे शहरों के ग्राहकों को देखते हुए नए उत्पाद लाएगी।

कानपुर के डाक विभाग के अधिकारियों के अनुसार सेविंग बैंक, आरडी, एनएससी, केवीपी, एमआईएस आदि विकल्प में निवेश दर औसतन प्रति वर्ष 20 प्रतिशत घट रहा है। लीड डिस्ट्रिक्ट मैनेजर यूके उपाध्याय (बैंक ऑफ बड़ौदा) के अनुसार शहर की राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं में जमा 20 प्रतिशत तक कम हुई है।

इसी तरह बुलियन बाजार में भी निवेश कम हुआ है। एआरजे फाइनेंशियल कंसलटेंट प्राइवेट लिमिटेड के जितेंद्र कुमार वर्मा के अनुसार बढ़ती महंगाई से परचेजिंग पावर (क्रय शक्ति) कम हुई है। एलआईसी में निवेश की बात करें, तो, नार्थ सेंट्रल जोन, उत्तर प्रदेश-उत्तराखंड में सिंगल प्रीमियम में ग्रोथ पिछले वर्ष के -74.70 से -21.94 पर आ गई है।

वहीं, नॉन सिंगल प्रीमियम में पिछले वर्ष -2.14 के स्तर पर रहा ग्राफ 12.41 पर पहुंच गया। डाक विभाग की  योजनाओं में 2010-11 में निवेश 15 करोड़ था, जो 2011-12 में घटकर 12 करोड़ हो गया। 2012 में अब तक करीब नौ करोड़ ही हुआ है।

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