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गिल्ट फंड...लघु अवधि का सबसे सुरक्षित निवेश, डिफॉल्ट की कोई गुंजाइश नहीं

Mon, 17 Aug 2020 06:16 AM IST
संजीव कुमार झा बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: संजीव कुमार झा Updated Mon, 17 Aug 2020 06:16 AM IST
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invest for short term, invest with gilt funds for risk free returns
रुपये - फोटो : pixabay

2020 की शुरुआत से अब तक पूंजी बाजार ने ऐतिहासिक गिरावट और तेज सुधार दोनों का ही सामना किया है। इस कारण निवेशक भी पैसे लगाने को लेकर ज्यादा भरोसा नहीं कर पा रहे हैं। उतार-चढ़ाव के माहौल में गिल्ट फंड कम अवधि के लिए निवेश का सबसे सुरक्षित विकल्प बन सकता है, क्योंकि इससे सरकारी प्रतिभूतियों में पैसा लगाया जाता है, जिसमें भरोसा और बड़ा रिटर्न दोनों ही मिलते हैं। 

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बीपीएन फिनकैप कंसल्टेंट के सीईओ और निदेशक एके निगम का कहना है कि ये फंड सरकारी प्रतिभूतियों से जुड़े होते हैं, जिसमें 80 फीसदी निवेश जरूरी होता है। लिहाजा, इसमें डिफॉल्ट की आशंका शून्य होती है और क्रेडिट क्वालिटी उच्च स्तर की रहती है। निवेशक योजना के अनुसार शॉर्ट टर्म के अलावा लॉन्ग टर्म में 5 से 30 साल की परिपक्वता अवधि का निवेश कर सकते हैं।  2019 में गिल्ट फंडों ने 15 फीसदी से ज्यादा रिटर्न दिया है।
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हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से देखें तो लॉन्ग टर्म में निवेश पर जोखिम ज्यादा होता है क्योंकि लंबी अवधि में ब्याज दरों उतार-चढ़ाव की आशंका ज्यादा रहती है। लेकिन, कई गिल्ट फंड लंबी अवधि में भी बेहतर रिटर्न दिलाते हैं।
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क्या होते हैं गिल्ट फंड
केंद्र या राज्य सरकार को पूंजी उपलब्ध कराने के लिए आरबीआई बैंकों और बीमा कंपनियों से पैसे लेता है और बदले में प्रतिभूतियां जारी करता है। गिल्ट फंड इन्हीं प्रतिभूतियों को सब्सक्राइब करते हैं, जो निर्धारित अवधि के लिए होते हैं।

ब्याज दरें घटने से लाभ के ज्यादा मौके
गिल्ट फंड में पैसे लगाने का यह बेहतर समय है, क्योंकि आरबीआई ने अपनी नीतिगत ब्याज दरों में बड़ी कटौती की है। ब्याज घटने से गिल्ट फंड से मिलने वाला प्रतिफल बढ़ जाता है। आईबीआई इस साल अब तक रेपो रेट में 2.5% कटौती कर चुका है और दरें 20 साल के निचले स्तर पर हैं। लिहाजा, अभी गिल्ट फंड में शॉट टर्म का निवेश कर बड़ा मुनाफा कमाया जा सकता है।

हालांकि, लंबी अवधि का निवेश करना जोखिम भरा हो सकता है, क्योंकि इस दौरान ब्याज दरें बढ़ने की गुंजाइश ज्यादा होती है, जिससे प्रतिफल में कमी आती है। टैक्स और शुल्क की गणना जरूरी गिल्ट फंड में निवेश पर भी अन्य फंडों की तरह प्रबंधन शुल्क देना पड़ता है, जो सेबी ने कुल प्रबंधन संपत्ति का 2.25% निर्धारित किया है। कोई भी फंड मैनेजर इससे ज्यादा शुल्क नहीं वसूल सकता है।

लिहाजा, फंड में पैसे लगाते समय अपने प्रबंधन शुल्क की गणना भी जरूर करनी चाहिए। अन्य फंडों की तरह इसमें निवेश की अवधि के हिसाब से टैक्स भी देना पड़ता है, जो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन से निर्धारित होता है। हालांकि, निवेशकों को इंडक्सेशन सहित अन्य लाभ भी दिया जाता है। 


ब्याज दरों पर नजर बनाए रखना जरूरी
गिल्ट फंडों में निवेश करने वालों को ब्याज दरों पर करीबी नजर रखनी होती है। आपको पता होना चाहिए कि योजना से कब बाहर निकलना है और कब निवेश करना है। बाजार में ब्याज दरें सरकारी प्रतिभूतियों और कॉरपोरेट बॉन्ड से तय होती हैं, इसलिए रिटर्न पर ब्याज का काफी प्रभाव रहता है। ऐसे फंड में पैसे लगाने से पूर्व अपने फंड मैनेजर से जोखिम और रिटर्न के संबंध में अच्छी तरह जानकारी ले लेनी चाहिए। 
-संदीप जैन, निवेश सलाहकार

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