आयकर रिटर्न : टैक्स बचाने में काम आएंगे तीन छुपे विकल्प, पढ़ें पूरा गणित बताती यह रिपोर्ट
इस सप्ताह आयकर रिटर्न भरने का आखिरी महीना शुरू हो रहा है। वित्त वर्ष 2020-21 का आयकर रिटर्न भरने की अंतिम तिथि 31 दिसंबर है।
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इस सप्ताह आयकर रिटर्न भरने का आखिरी महीना शुरू हो रहा है। नौकरीपेशा हो या पेशेवर टैक्स बचाने की हर कोई जुगत कर रहा है। वेतनभोगियों को तीन ऐसे रास्तों से टैक्स छूट मिलती है, जो ज्यादा प्रचलित नहीं हैं। कर रियायत के ये छुपे रास्ते कौन से हैं और इनका लाभ कैसे उठाया जा सकता है, पूरा गणित बताती प्रमोद तिवारी की रिपोर्ट-
कैश वाउचर : खर्च कर दिया तो कोई टैक्स नहीं
कर सलाहकार अतुल गर्ग का कहना है कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी को रोजमर्रा खर्च के लिए कंपनी की ओर से मिलने वाला कैश वाउचर टैक्स के दायरे से बाहर होता है। रिटर्न में टैक्स छूट का दावा करने के लिए जरूरी है कि इस राशि को पूरा खर्च किया जाए। कंपनी की ओर से मिलने वाले फॉर्म-16 के जरिये यह पता किया जा सकता है कि कहीं नियोक्ता ने इस राशि को कर योग्य मानकर आपके वेतन में तो शामिल नहीं कर दिया।
अमूमन नियोक्ता इस राशि को पूरा खर्च हुआ मानते हैं और इसे कर योग्य राशि में नहीं जोड़ते। बावजूद इसके अगर आपने पूरी राशि खर्च नहीं की है, तो शेष राशि को अपनी आय में शामिल कर टैक्स देने में ही भलाई है। रिटर्न भरते समय यह ध्यान रखें कि वाउचर की खर्च हुई राशि और बिना खर्च राशि का अलग-अलग ब्योरा भरें।
एचआरए : वेतन में नहीं तो किराये पर लाभ
कई नियोक्ता अपने कर्मचारियों को एचआरए (हाउस रेंट अलाउंस) नहीं देते और उनके वेतन में इसका जिक्र भी नहीं होता। ऐसे वेतनभोगी अगर किराये के मकान में रहते हैं, तो हर साल इस पर खर्च होने वाली रकम पर टैक्स छूट का दावा कर सकते हैं। आयकर की धारा 80जीजी के तहत किराये पर कर छूट का लाभ उन्हीं कर्मचारियों को मिलेगा, जिन्हें कंपनी एचआरए नहीं देती। साथ ही जिस शहर में नौकरी करता है, उसी शहर में खुद का मकान हुआ तो भी लाभ नहीं मिलेगा।
तीन तरह से होती है किराये पर टैक्स छूट की गणना
- किराये के रूप में दी गई कुल रकम में से करदाता की कुल आय की 10 फीसदी रकम घटाकर (कुल किराया 1.5 लाख, कुल आय 7.5 लाख तो वास्तविक टैक्स छूट 75 हजार रुपये मिलेगी।)
- औसत पांच हजार रुपये प्रति महीने (कुल टैक्स छूट 60 हजार)
- आय की 25% रकम (आय 7.5 लाख रुपये तो छूट 1.87 लाख)
नोट : यह छूट नौकरी की जगह और नियोक्ता के नियमों के अधीन होगी।
गिफ्ट : आपके दिए पैसों से पत्नी को हुई कमाई
वैसे तो आपकी तरफ से पत्नी को दी गई रकम तोहफा मानी जाती है और इस पर टैक्स नहीं लगता। लेकिन, अगर उसने यह राशि शेयर बाजार या अन्य किसी विकल्प में निवेश कर उस पर रिटर्न कमाया है, तो टैक्स की देनदारी और नियम बदल जाएंगे। आयकर की धारा 64 के तहत तोहफे में पैसे देने वाले को यह राशि अपनी कमाई में शामिल करना होगा, जिस पर देनदारी बनती है तो स्लैब के हिसाब से कर का भुगतान भी करना पड़ेगा। दूसरी ओर, पत्नी को इन पैसों से मिलने वाला रिटर्न अगर कर छूट के तय दायरे से ऊपर होगा तो उसे भी आयकर रिटर्न भरना पड़ेगा और टैक्स भी चुकाना पड़ सकता है।
जल्दबाजी में न करें गलत दावे
आयकर रिटर्न भरते समय यह ध्यान रखें कि आपके पास टैक्स छूट के दावों के पर्याप्त दस्तावेज होने चाहिए। अगर विभाग एसेसमेंट के समय आपसे संबंधित दस्तावेज मांगता है और आप नहीं दे पाते, तो जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। रिटर्न सावधानी से भरें और गलत दावों से दूर रहें। -एके निगम, निदेशक बीपीएन फिनकैप