निवेश के लिए नहीं हैं सोने के गहने

नई दिल्ली/कारोबार डेस्क Updated Mon, 22 Oct 2012 05:59 PM IST
gold jewellery for not invest
परंपरागत रूप से लोग सोने के गहनों की खरीदारी को ही सोने में निवेश मानते रहे हैं। जब कभी दुर्दिन आए, तो इन गहनों को बेचकर काम चलाया। सोने के गहनों की लिक्विडिटी यानी तुरंत बिकने की सुविधा ने इसको लोकप्रिय बनाया। लेकिन गहनों को बेचने पर जो रिटर्न मिलती है वह निवेश की परिभाषा में सटीक नहीं बैठती। एक तो गहनों की खरीदारी के समय ही सोने के ऊपर उसकी मेकिंग-पॉलिश के खर्चे, जब बेचने जाएं तो पहले तो ये खर्चे कम होंगे उसके बाद सोने की शुद्धता के आधार पर आगे और कटौती होगी। इसलिए, निवेश के लिहाज से सोने के गहने खरीदना उचित निर्णय नहीं है।

तो क्यों नहीं खरीदें सोने के गहने
ऐसा भी नहीं हो सकता कि घरों में सोने के गहने खरीदे ही न जाएं। शादी-ब्याह जैसे मांगलिक अवसर पर घरों में जेवर जरूर खरीदे जाते हैं। इन अवसरों के लिए खरीदे गए गहने निवेश को ध्यान में रखकर नहीं लिए जाते, बल्कि परंपरा के निर्वाह, सामाजिक चलन और फैशन के हिसाब से लिये जाते हैं। फिर भी थोड़ी सी सावधानी रखने से गहनों की खरीदारी में भी निवेश का पुट डाला जा सकता है। मसलन, हमेशा हॉलमार्क गहने खरीदें। कोशिश करें कि सोने के गहने में पत्थर आदि कम लगे हों, पोलकी जैसे गहनों में मेकिंग अधिक जाती है और शुद्ध सोने का अनुपात कम हो जाता है।

गहनों के बिल जरूर लें
गहनों की खरीदारी में जितना जरूरी हॉलमार्क गहने खरीदना है, उतना ही जरूरी है खरीद की पक्की रसीद लेना। टैक्स के रूप में मामूली सी रकम देकर न सिर्फ दुकानदार द्वारा दी गई चीज पर गारंटी मिल जाती है, बल्कि इनका बीमा कराने में भी आपको सुविधा मिल जाती है। रसीद होने से गोल्ड लोन लेने में भी काफी आसानी हो जाती है, एक तो प्रोसेसिंग में कम समय लगता है साथ ही लोन की रकम भी अधिक हो जाती है।

सोने की खपत करीब 30 फीसदी घटी
वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, इस साल अप्रैल से जून के दौरान देश में सोने का आयात 56 फीसदी तक घट गया। भारत में सोने की मांग में 38 फीसदी की कमी आई है। ऊंची कीमतों की वजह से भारत में आभूषणों में भी सोने की खपत करीब 30 फीसदी घट गई है। इतना ही नहीं सोने की निवेश मांग में भी भी 50 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का दावा है कि अप्रैल से जून के दौरान तक दुनिया में सोने की मांग 23 फीसदी तक घटी है। हालांकि चीन की मांग में गिरावट कम है।

शुरू हो रहा है रंगीन सोने का फैशन
सोना मतलब पीले रंग की चमकीली धातु। सोने में अन्य धातुओं के मिश्रण से अब सोना पीला के अलावा गुलाबी, लाल, हरे रंग में भी उपलब्ध हो रहा है। यूरोपीय बाजार में रंग-बिरंगे सोने के गहनों का चलन काफी समय से है। सोने को रंगीन बनाने में कई तरह के धातु विभिन्न अनुपात में इस्तेमाल किए जाते हैं, जिससे इन गहनों में सोने का प्रतिशत कई बार काफी कम हो जाता है। यूरोप सहित दुनिया के कई बाजारों में ऐसे गहने फैशन आभूषण के रूप में बिकते हैं। भारत में अभी ऐसे गहनों का बाजार जोर नहीं पकड़ पाया है।

महत्वपूर्ण एसेट क्लास है सोना
सोना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे काफी लंबे समय से एक कीमती कमोडिटी के तौर पर संभालकर रखा जाता रहा है। यही वजह है कि सोने को काफी महत्वपूर्ण एसेट क्लास माना जाता है। सोने में निवेश नितांत सुरक्षित होता है। यह इसलिए क्योंकि, सोने का इस्तेमाल न केवल मुद्रास्फीति के खिलाफ हेज करने के लिए किया जा सकता है, बल्कि इसका इक्विटी और डेट जैसी एसेट क्लास से भी कोई संबंध नहीं होता है। सोने की कीमतों पर अमेरिकी डॉलर का असर भी पड़ता है। साल 2011 में अंतरराष्ट्रीय बाजार में फिजिकल सोने और गहनों की कुल मांग 4,067 टन रही। इसमें भारत की हिस्सेदारी 23 फीसदी रही। हालांकि भारत और चीन में सोने की कीमतों में निरंतर बढ़ोतरी से मौजूदा साल में दोनों देशों की खुदरा मांग में कमी देखी गई।

--भारत में सोने की मांग में कमी पर वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल ने भी अपनी मुहर लगा दी है। अब भारत की बजाए चीन में सोने की मांग सबसे ज्यादा हो गई है।
--वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक इस साल अप्रैल से जून के दौरान भारत में सोने का आयात 56 फीसदी तक घट गया है। भारत में सोने की मांग में 38 फीसदी की कमी आई है।
--ऊंची कीमतों की वजह से भारत में आभूषणों में भी सोने की खपत करीब 30 फीसदी घट गई है। इतना ही नहीं सोने की निवेश मांग में भी 50 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है।
--पूरी दुनिया में भी सोने की मांग में कमी देखने को मिली है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का दावा है कि अप्रैल से जून के दौरान तक दुनिया में सोने की मांग 23 फीसदी तक घट गई है। हालांकि चीन की मांग में गिरावट कम है।
--वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल का दावा है कि अब चीन दुनिया में सबसे ज्यादा सोने की खपत वाला देश हो जाएगा।

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