फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Personal Finance ›   give special attention to conditions attached to Health Insurance

हेल्थ इंश्योरेंस से जुड़ी शर्तों पर दें खास ध्यान

Tue, 09 Oct 2012 07:15 PM IST
हर्ष रूंगटा (सीईओ अपना पैसा डॉटकॉम)
हर्ष रूंगटा (सीईओ अपना पैसा डॉटकॉम) Updated Tue, 09 Oct 2012 07:15 PM IST
विज्ञापन
give special attention to conditions attached to Health Insurance
मैं अपने परिवार के लिए फैमिली फ्लोटर हेल्थ इंश्योरेंस लेना चाहता हूं। कई राष्ट्रीयकृत बैंकों की ओर से भी ऐसी पॉलिसियों के ऑफर दिए जा रहे हैं, जोकि ग्रुप इंश्योरेंस जैसे होने के चलते कई तरह के अन्य ऑफरों से सस्ते दिखाई दे रहे हैं। क्या इन्हें लेना मेरे लिए मुनासिब होगा?
विज्ञापन


कुछ सरकारी बैंकों द्वारा की जा रही ग्रुप हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी की पेशकश सामान्यत: देश में काम कर रही चार में से किसी एक सामान्य बीमा कंपनी के जरिये की जा रही है। जहां तक हमारी जानकारी है, इन पॉलिसियों में रीएंबर्समेंट पर रूम रेंट और कई तरह की अन्य पाबंदियां जुड़ी हुई हैं। इनमें रूम रेंट के रूप में बीमा राशि (सम अश्योर्ड) की अधिकतम एक फीसदी राशि के भुगतान का ही प्रावधान है। रूम रेंट संबंधी सब-लिमिट की यह शर्त आपके लिए आगे चलकर अपने आप में एक बड़ी परेशानी खड़ी कर सकती है। मान लीजिए कि आपने दो लाख रुपये सम-अश्योर्ड वाली पॉलिसी ले रखी है। ऐसे में रूम रेंट पर एक फीसदी की सब-लिमिट के चलते आपको कमरे के किराये के रूप में अधिकतम प्रतिदिन 2,000 रुपये तक का ही भुगतान मिलेगा, जबकि किसी भी बड़े शहर के अच्छे अस्पताल में आज की तारीख में इतने कम रूम रेंट पर जनरल वार्ड के अलावा कोई कमरा मिल पाना तकरीबन नामुमकिन नजर आता है। ऐसे में अगर आप जनरल वार्ड में दाखिल होते हैं, तो चिकित्सा संबंधी आपके अन्य खर्चों का भुगतान भी उसी श्रेणी के अनुरूप किया जाएगा, जोकि आपके द्वारा उठाए जाने वाले वास्तविक खर्चों से काफी कम होगा। इस तरह इन पॉलिसियों में दी जा रही रूम रेंट की छोटी सब-लिमिट ही अकेले आपके लिए कई तरह की व्यावहारिक समस्याएं खड़ी कर सकती है, जब तक कि आपकी पॉलिसी बीमा राशि पांच लाख रुपये जितनी न हो। इतनी राशि का इंश्योरेंस लेने पर तो यूं भी सब-लिमिट काफी बेहतर हो जाती है।   
विज्ञापन


निजी बीमा कंपनियों की टर्म बीमा योजनाएं एलआईसी के टर्म बीमा प्लान की तुलना में कितनी विश्वसनीय हैं? क्या निजी कंपनियों की टर्म बीमा पॉलिसी ऑनलाइन खरीदना ठीक होगा?
विज्ञापन
विज्ञापन

एलआईसी समेत देश की सभी बीमा कंपनियां इरडा के नियमन के तहत चलती हैं। ऐसे में यदि आपने पॉलिसी लेते वक्त सभी जरूरी दस्तावेज लगाए हैं और अपनी हेल्थ हिस्ट्री व आपकी अन्य बीमा पॉलिसियों जैसी जरूरी जानकारियां अपने फार्म में बीमा कंपनी को दी हैं, तो क्लेम के भुगतान में कंपनी के सरकारी या निजी होने का कोई फर्क नहीं पड़ेगा। इस तरह निजी बीमा कंपनियों पर भी आप सरकारी बीमा कंपनी जितना ही भरोसा कर सकते हैं। जहां तक ऑनलाइन टर्म प्लान की बात है, तो एलआईसी के पास फिलहाल कोई भी ऑनलाइन टर्म प्लान नहीं है। इस तरह ऑनलाइन टर्म प्लान लेने के लिए आपके पास केवल निजी बीमा कंपनी की पॉलिसी लेने का ही विकल्प बचता है, जोकि एलआईसी के ऑफ लाइन टर्म प्लान से अच्छी खासी सस्ती बैठेंगी।   

एजेंट के जरिये कोई बीमा पॉलिसी या म्यूचुअल फंड खरीदने पर एजेंट को उस खरीद पर कितना कमीशन मिलता है। क्या पॉलिसी या फंड सीधे कंपनी से खरीद कर ग्राहक इस राशि को बचा सकता है?
अलग-अलग बीमा पॉलिसियों पर एजेंट का कमीशन अलग-अलग होता है। यह पहले साल के प्रीमियम के 5 से 40 फीसदी तक हो सकता है, जबकि दूसरे साल और उसके बाद के प्रीमियमों पर 2 से 5 फीसदी तक का कमीशन एजेंट को मिलता है। दूसरी ओर म्यूचुअल फंड की खरीद में एजेंट का शुरुआती कमीशन (अपफ्रंट कमीशन) 0.30 फीसदी से 0.75 फीसदी तक होता है, जबकि बाद का कमीशन (ट्रेेल कमीशन) सालाना 0.50 फीसदी से 0.75 फीसदी तक होता है। अगर आपके म्यूचुअल फंड डिस्ट्रीब्यूटर ने यह विकल्प चुना है, तो आपको ट्रंाजेक्शन चार्ज देना ही पड़ेगा। दूसरी ओर बीमा पॉलिसी में एजेंट के कमीशन से बचने के लिए आप ऑनलाइन प्लान खरीद सकते हैं, जिन्हें की कुछ बीमा कंपनियां वर्तमान में उपलब्ध करा रही हैं। म्यूचुअल फंड के मामले में भी सेबी ने म्यूचुअल फंड हाउसों को निर्देश दिए हैं कि वह 1 जनवरी 2013 से ऐसे डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लान लांच करें, जिन्हें ग्राहक सीधे कंपनी से खरीद सकें और उन्हें किसी एजेंट को कोई भी कमीशन न देना पड़े।

मैंने 15 लाख रुपये की एलआईसी की अनमोल जीवन टर्म बीमा पॉलिसी ले रखी है, जिसके लिए मैं सालाना 5,900 रुपये का प्रीमियम अदा कर रहा हूं। अब मैं अपने बीमा कवर को बढ़ा कर 50 लाख रुपये करना चाहता हूं। क्या मुझे अपनी मौजूदा पॉलिसी को जारी रखते हुए इसमें 35 लाख रुपये का टॉप अप ले लेना चाहिए या फिर मौजूदा पॉलिसी को खत्म कर मुझे 50 लाख रुपये की कोई ऑनलाइन टर्म बीमा पॉलिसी लेनी चाहिए। किसी अच्छी ऑनलाइन टर्म बीमा पॉलिसी के बारे में भी बताएं।

खर्च बचाने के लिए पहले आपको 50 लाख रुपये की ऑनलाइन टर्म बीमा पॉलिसी लेनी चाहिए। नई बीमा पॉलिसी लेते वक्त आपको अपनी हेल्थ हिस्ट्री और मौजूदा बीमा पॉलिसियों समेत सभी तरह की जानकारियां ठीक ढंग से कंपनी को दे देनी चाहिए। ऑनलाइन टर्म बीमा पॉलिसी खरीद लेने के बाद आप अपनी मौजूदा बीमा पॉलिसी को खत्म कर सकते हैं। ऑनलाइन टर्म प्लानों में कोटक की ई-प्रिफर्ड, एचडीएफसी की क्लिक टू प्रोटेक्ट और आईसीआईसीआई की आई-केयर पॉलिसियां अच्छी मानी जा रही हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Budget 2022 से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed