{"_id":"91fcaee14b69b639726e63fcea0f3109","slug":"gifts-value-more-than-50-thousand-pay-to-income-tax","type":"story","status":"publish","title_hn":"50 हजार से ज्यादा का गिफ्ट, टैक्स लगेगा","category":{"title":"Personal Finance","title_hn":"पर्सनल फाइनेंस","slug":"personal-finance"}}
50 हजार से ज्यादा का गिफ्ट, टैक्स लगेगा
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Tue, 23 Jul 2013 06:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
यदि आपने अभी तक आयकर रिटर्न नहीं भरा है, तो जल्दी करें। रिटर्न भरने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है।
विज्ञापन
आयकर रिटर्न भरने में अक्सर लोग वित्तीय वर्ष यानी फाइनेंशियल ईयर और असेसमेंट ईयर के बीच भेद नहीं कर पाते।
आयकर के हिसाब से वित्तीय वर्ष उसे कहा जाएगा जिसमें आपको आमदनी हुई। असेसमेंट वर्ष उसे कहा जाएगा जिस साल आप रिटर्न भरते हैं।
अभी 2013-14 का असेसमेंट वर्ष चल रहा है, जिसके रिटर्न में वित्तीय वर्ष 2012-13 की आमदनी का विवरण भरा जाएगा। रिटर्न भरने में इसका खास ध्यान रखना चाहिए।
--कर दाता के बैंक खातों पर ब्याज के रूप में मिलने वाली राशि उसकी कर योग्य आय मानी जाती है। धारा 80 टीटीए के तहत 10 हजार रुपये से अधिक ब्याज की आय पर टीडीएस काटा जाता है। अत: ब्याज से अर्जित आय को आयकर रिटर्न में दर्शाना न भूलें।
--नाबालिग बच्चों को प्राप्त आय को उसके उस अभिभावक की आय में जोड़ा जाता है। इसमें हर बच्चे पर 1,500 रुपये की छूट का प्रावधान है।
--किसी गैर रिश्तेदार व्यक्ति से मिलने वाला 50 हजार रुपये से अधिक मूल्य का उपहार (गिफ्ट) भी आयकर के दायरे में आता है।
--पीपीएफ खाते पर मिलने वाला ब्याज, किसी भारतीय कंपनी अथवा म्यूचुअल फंड में निवेश पर मिलने वाला लाभांश (डिविडेंड) हालांकि आयकर से मुक्त होता है, पर रिटर्न भरते वक्त इन्हें एक्जंपटेड इनकम के रूप में जरूर दिखाना चाहिए।
विज्ञापन
--यदि करदाता के पास एक से अधिक मकान हैं जोकि खाली हैं या किराए पर नहीं उठाए गए हैं, तो ऐसे में वह केवल एक मकान को ही अपने इस्तेमाल में दिखा सकता है। बाकी के मकान या मकानों के खाली होने या किराए पर न उठाने पर भी उनके अपेक्षित किराये (एक्सपेक्टेड रेंट) पर उसे आयकर चुकाना होगा।
विज्ञापन
--मकान का निर्माण पूरा होने से पहले होम लोन के ब्याज की अदायगी पर भुगतान के वर्ष में करछूट का दावा नहीं किया जा सकता। मकान का निर्माण पूरा होने के पांच साल के भीतर इसपर करछूट का दावा किया जा सकता है।
--मकान का निर्माण पूरा न होने पर हाउसिंग लोन के मूल धन (प्रिंसिपल अमाउंट) के भुगतान पर भी धारा 80 सी के तहत आयकर में छूट नहीं पाई जा सकती है।
--नौकरी में बदलाव के मामले में दोनों नियोक्ताओं से प्राप्त आय पर बेसिक एक्जंप्शन लिमिट का लाभ लेने पर करदाता को रिटर्न पर सेल्फ एसेसमेंट टैक्स का भुगतान करना होता है।
आयकर रिटर्न नहीं भरा तो:-
--यदि आपने रिटर्न नहीं भरा और बकाया टैक्स का भुगतान रिटर्न में नहीं किया, तो इस स्थिति में करदाता को प्रति माह 1 फीसदी की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।
--यदि करदाता ने समय पर रिटर्न नहीं भरा, तो उसे भविष्य में अपनी निर्धारित आमदनी के लिए रिटर्न में अपने नुकसान (लॉस) को कैरी फारवर्ड (आगे ले जाने) की अनुमति नहीं होगी।
--यदि 2012-13 के लिए समय पर या उससे पहले करदाता रिटर्न भरने में सक्षम नहीं है, तो वह 31 मार्च 2014 और उसके बाद 31 मार्च 2015 तक भी अपना रिटर्न भर सकता है। लेकिन, इस स्थिति में उसे 5,000 रुपये की पेनाल्टी चुकानी पड़ सकती है। यदि आगे भी करदाता रिटर्न नहीं भरता है, तो उसे इस पेनाल्टी पर ब्याज भी चुकाना होगा।
वित्त वर्ष 2012-13 के लिए टैक्स दरें (60 साल से कम उम्र के लिए)
स्लैब----आमदनी (रुपये में)----टैक्स दर(फीसदी में)
1----0-2,00,000----कुछ नहीं
2----2,00,001-5,00,000----10
3----5,00,001-10,00,000----20
4----10,00,001 व अधिक----30
नोट-
1- कुल टैक्स का 3 फीसदी की दर से शिक्षा उपकर (एजूकेशन सेस) देना होगा।
2- जो लोग 31 मार्च 2013 को या उससे पहले 60 साल पूरा कर चुके हैं, उन्हें वरिष्ठ नागरिक माना जाएगा।
3- 80 वर्ष या उससे ज्यादा उम्र के बुजुर्गों के लिए अलग से श्रेणी है।
विभिन्न करदाताओं के लिए रिटर्न भरने की आखिरी तारीख
31 जुलाई 2013
- ऐसे करदाता, जिन्हें वेतन, हाउस प्रॉपर्टी, ब्याज और कारोबार से आमदनी हो, जिनके अकाउंट की ऑडिट की जरूरत नहीं हो।
30 सितंबर 2013
--आयकर कानून की धारा 92ई के तहत रिपोर्ट पेश करने वाली कंपनियों को छोड़ कर अन्य सभी कंपनियों के लिए
--पार्टनरशिप फर्म के कार्यरत पार्टनर के लिए, जिनके अकाउंट की आईटी या अन्य दूसरे अधिनियम के तहत ऑडिट करने की आवश्यकता है।
--कंपनियों के अलावा अन्य दूसरे करदाता जिनके अकाउंट की आयकर या अन्य अधिनियम के तहत ऑडिट करने की आवश्यकता है।
30 नवंबर 2013
--ऐसे करदाता जिन्हें आयकर अधिनियम की धारा 92ई के तहत रिपोर्ट पेश करने की आवश्यकता होती है।