ई-वे बिल फरवरी से होगा लागू, जीएसटी काउंसिल ने दी अपनी मंजूरी
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जीएसटी काउंसिल ने देश भर में ई-वे बिल को लागू करने पर अपनी मुहर लगा दी है। अब पूरे देश में 1 फरवरी, 2018 से ई-वे बिल प्रणाली लागू होगी। जीएसटी काउंसिल की 24वीं बैठक में इस पर फैसला किया गया है।
वहीं 1 जून से इंटर-स्टेट ट्रांसपोर्ट पर ई-वे बिल लागू होगा। 16 जनवरी से ई-वे बिल सिस्टम का ट्रायल रन शुरू होगा। इसके अलावा जिन राज्यों की ई-वे बिल को लेकर तैयारी पूरी हो गई होगी ऐसे राज्यों में 1 फरवरी से ई-वे बिल लागू किया जा सकेगा। पहले खबर आई थी कि ट्रायल 15 जनवरी से शुरू होगा।
#CORRECTION The e-Way Bill system to be ready by January 16, 2018 for trial runs and not January 15, 2018 as reported earlier
— ANI (@ANI) December 16, 2017
GST Council approves mandatory inter-state e-Way Bill compliance frm Feb 1&compulsory intra-state e-Way Bill compliance frm Jun 1.e-Way Bill system to be ready by Jan 15 for trial runs.States ready may roll-out inter-state,intra state e-Way Bill frm Feb 1:Finance Ministry sources
— ANI (@ANI) December 16, 2017
क्या है ई-वे बिल
यह मान्यता प्रोडक्ट ले जाने की दूरी के आधार पर तय होगा। जैसे 100 किलोमीटर तक की दूरी के लिए 1 दिन का ई-बिल बनेगा, जबकि 1,000 किलोमीटर से अधिक की दूरी के लिए 15 दिन का ई-बिल बनेगा।
एजेंडा नहीं था तय
यूं तो इस बैठक का कोई अजेंडा जारी नहीं किया गया था लेकिन अधिकारी का कहना है कि पिछले महीने जीएसटी संग्रह में कमी दर्ज की गई है। इसके परिप्रेक्ष्य में जीएसटी परिषद जनवरी से ई-वे बिल लागू किए जाने पर शनिवार को प्रस्तावित बैठक में चर्चा करेगा।
ऐसी खबरें हैं कि जांच और नियंत्रण के अभाव में डीलर जीएसटी को दरकिनार कर रहे हैं। इस बारे में अभी कुछ फैसला लेना इसलिए भी जरूरी हो गया है क्योंकि कर संग्रह में आई कमी की भरपाई के लिए सरकार के पास अब तीन ही महीने का समय बचा है। यदि अभी कुछ उचित कदम नहीं उठाए गए तो सरकार का घाटा बढ़ सकता है।
4 लाख लोगों से आता है 95 फीसदी कर
फिक्की के एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि जीएसटी संग्रहण को लेकर किए गए अध्ययन के मुताबिक, नए कर शासन के तहत जितने लोग पंजीकृत हैं, उनमें से 4 लाख लोगों से 95 फीसदी कर प्राप्त होता है, जबकि 35 फीसदी लोग बेहद मामूली कर का भुगतान करते हैं।
उन्होंने स्वीकार किया कि रिटर्न अनुपालन का बोझ एक वाजिब समस्या है और जीएसटी परिषद इसकी जांच कर रही है। जेटली ने कहा कि संघीय संस्था महज 3-4 महीनों में ही कई वस्तुओं पर दरों को तर्कसंगत बनाने में सफल रही है।
इसी बैठक में बिहार के वित्त मंत्री और जीएसटी परिषद के सदस्य सुशील मोदी ने कहा था कि बिजली, रियल एस्टेट, स्टाम्प ड्यूटी और पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के तहत लाने के लिए परिषद जल्द ही विचार करेगी।
जीएसटी परिषद इसके लिए प्रयासरत है। हालांकि, उन्होंने इसके लिए कोई समय सीमा बताने से इनकार किया था। उन्होंने कहा था कि इन चीजों को जीएसटी में संविधान में संशोधन के बिना शामिल किया जाएगा।