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चिंता-मनी 1: मेरा वेतन 30 फीसदी कम हो गया है... प्लान कैसे करूं

Wed, 12 Aug 2020 04:22 PM IST
‌डिंपल अलवधी नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार, नई दिल्ली
नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलवधी Updated Wed, 12 Aug 2020 04:22 PM IST
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financial tips which may be useful to save money if your income is reduced
रुपये - फोटो : pixabay

राजेश जी की तनख्वाह 30 फीसदी कम हो गई है। वह जानते हैं कि समय कठिन है, सब इसी से गुजर रहे हैं। वेतन कटौती या आय का साधन नहीं रहने से अनेक लोग आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। चाहे जो भी वजह हो, नियमित वेतन या पे-चेक पर हमारी आर्थिक निर्भरता ने अनेक लोगों को एहसास दिला दिया है कि अगर सावधानी और योजना ना हो, तो संकट दोहरा हो जाता है।

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हमारे परिवार के खर्च प्रबंधन की एक कमी यह है कि हम घर खर्च का बजट नहीं बनाते, उस पर सख्ती से अनुपालन की तो बात ही छोड़ दें। घर का बजट दरअसल एक वित्तीय योजना है, जो आय के अनुसार, खर्च, बचत और कर्ज चुकाने की व्यवस्था सुझाती है। घरेलू बजट का अनुपालन करने से हम स्पष्ट रूप से जान सकते हैं कि पैसा कहां से आ रहा है। यह प्रणाली हमें यह भी बताती है कि वे कौन-कौन से खर्च हैं, जिनपर अंकुश लगाकर बचत को प्राथमिकता दी जा सकती है, जिससे कि हम भविष्य के आर्थिक लक्ष्य पूरे कर सकें।

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आदर्श तरीका

वेतन से आय को सही तरीके से विभाजित करने के लिए 50-30-20 के नियम का पालन करना चाहिए:

  • इसके तहत वेतन का 50 फीसदी हमारी जरूरतों पर खर्च हो, इसमें भोजन, किराया, शिक्षा और आईएमआई आदि शामिल है।
  • वेतन का अगला 30 फीसदी हिस्सा उन चीजों पर खर्च हो सकता है, जो मन को अच्छी लगती हैं। इसमें पर्यटन, फिल्म देखना, शॉपिंग और खाना खाने जैसे गैर जरूरी खर्च शामिल हैं। 
  • वेतन का आखिरी 20 फीसदी हिस्सा रिटायरमेंट, छुट्टियां बिताने या बच्चों की विशेष शिक्षा, विवाह जैसे भविष्य के वित्तीय लक्ष्य हासिल करने के लिए निवेश किया जाना चाहिए। यानी वेतन का 20 फीसदी हिस्सा बचत में ही जाना चाहिए। संकट कह कर नहीं आते। 

नौकरी छूट जाने या वेतन कटौती जैसी आपातकालीन स्थिति का मुकाबला करने के लिए हमेशा सलाह दी जाती है कि तीन से छह महीने की घर खर्च की राशि का इंतजाम हमेशा पास में होना चाहिए। इस आपातकालीन फंड को बैंक या म्यूचुअल फंड्स में रखा जाना चाहिए, ताकि जरूरत के समय इसे आसानी से निकाला जा सके।

इस फंड में अतिरिक्त ईएमआई चुका पाने जितनी राशि भी होनी चाहिए, ताकि भविष्य में जब आप कोई नया कर्ज लें, तो इसकी किस्त चुकाने में आसानी हो। अगर आपके पास ऐसा कोई फंड नहीं है, तो अगले एक-दो साल में ऐसा फंड बनाने की कोशिश करनी चाहिए।

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अभी की मुश्किल

अगर आप वेतन में कटौती या नौकरी छूट जानी जैसी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, जिस कारण अस्थायी तौर पर आपकी आय का साधन नहीं बचा है, तो सबसे पहले जरूरत की सूची और संचित बचत का हिसाब देखें। वर्क फ्रॉम होम यानी घर से काम करते हुए आपके कई खर्च स्वत: ही कम हो गए हैं - जैसे आपके दफ्तर आने-जाने का परिवहन व्यय बच गया है, बाहर खाने या कपड़े खरीदने जैसे आकस्मिक खर्च भी बच गए हैं।

इसके अलावा किसी नई चीज या शौक पर खर्च करने का सवाल भी नहीं उठता। आपको अपनी पेशेवर योग्यता को मांजने के साथ-साथ अब ज्यादा बारीकी से सोचना है। सबसे पहले बचत राशि से पैसे निकालें। अगर आप पहले से निवेश कर रहे थे, तो तब तक के लिए अपना निवेश रोक लें, जब तक स्थिति नहीं सुधरती। 

याद रखें, अपना स्वास्थ्य बीमा और जीवन बीमा का प्रीमियम कभी न रोकें। अगर आपने पहले से कर्ज ले रखा है और उसकी किस्त चुकाने में आपको समस्या आ रही है, तो आप कर्ज स्थगन (मोरेटोरियम) के लिए कह सकते हैं, या संभव हो, तो रिजर्व बैंक के नए निर्देशानुसार अपने कर्जदाता (बैंक) से मिलकर अपने कर्ज को री-स्ट्रक्चर करा सकते हैं, जिससे ईएमआई की राशि कम हो जाएगी, पर किस्त चुकाने की अवधि बढ़ जाएगी।

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अगर अभी नया कर्ज लें, तो ब्याज और अवधि पर नजर रखें। जहां संभव हो, किए गए निवेश से पैसे निकाल लें। जरूरत पड़ने पर भविष्य निधि से भी पैसे निकाल सकते हैं। ये चुनौतियों से निपटने के कुछ तरीके हैं, हालांकि अलग-अलग लोगों की नौकरियों का स्वरूप अलग-अलग है और यह आपकी आर्थिक स्थिति पर भी निर्भर करता है।

जिन राजेश जी का जिक्र हमने किया, उनके एक मित्र ने घर में पड़े संचित सोने पर कर्ज लेने का विकल्प चुना। उनका विचार सही था क्योंकि अन्य विकल्प उन्हें उलझा देते, संचय आड़े वक्त के लिए ही होता है। आपके बैंक खाते में पर्याप्त रकम नहीं है, तो अपने भाई-बहनों या परिवार के लोगों से कर्ज ले सकते हैं। संतुलन और धीरज के साथ सोचें, यदि कोई प्रॉपर्टी बेचना चाहते थे, तो यथासंभव रुक जाएं। 

कोरोना सिर्फ सेहत का संकट ही बनकर नहीं आया है। इसने सभी को आर्थिक संकट में भी डाल दिया है। इस वक्त बचत, निवेश, कर्ज और भविष्य की योजना जरूरी है। -नारायण कृष्णमूर्ति, आर्थिक सलाहकार

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