2020 तक बढ़ी डिजिधन मिशन की मियाद, कारोबारियों को मिलती रहेगी टैक्स में छूट
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कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने डिजिधन मिशन को 2020 तक बढ़ाने का फैसला किया है। मिशन के तहत सरकार डिजिटल लेनदेन और उससे जुड़ी ढांचागत सुविधाओं को बढ़ाने की दिशा में काम करेगी। इसके तहत कैशलेस लेनदेन में टैक्स प्रोत्साहन और छूट मुहैया कराई जाएगी।
सरकार ने जारी की अधिसूचना
इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने डिजिधन मिशन को 31 मार्च, 2020 तक बढ़ाने के लिए अधिसूचना जारी की है। इसके मुताबिक, सरकार ने पूरे मिशन की समीक्षा की है, जिसमें इसे आगे बढ़ाने का फैसला किया गया। अधिसूचना में कहा गया है कि मिशन का प्राथमिक मकसद बढ़ावा देने और कैशलेस भुगतान की स्वीकृति की अवसंरचना यानी ढांचागत सुविधाएं बढ़ाना है। इसमें डिजिटल लेनदेन के लिए अनुकूल नीतिगत वातावरण तैयार करना और मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) की प्रतिपूर्ति करना शामिल है।
कैशलेस भुगतान के प्रोत्साहन का खाका और नकद लेनदेन पर आवश्यक सीमा निर्धारित करने के अपेक्षित नीतिगत उपाय भी इसी में किए जाएंगे। साथ ही इसमें डिजिटल भुगतान साक्षरता और संवर्धन अभियान भी चलाना शामिल है।
सरकारी कोशिशें हुईं धराशायी
अधिसूचना में कहा गया है मिशन के कैशलेस भुगतान को बढ़ाने को बड़े पैमाने पर नित नई गतिविधि शुरू की जाएगी। इसके तंत्र में डिजिटल भुगतान प्रौद्योगिकी, प्रक्रियाओं, प्रणालियों को अपनाने और सर्वोत्तम पद्धतियों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही डिजिटल लेनदेन में सोशल मीडिया में जियो टैगिंग द्वारा क्षेत्रीय इस्तेमाल की निगरानी के लिए कार्य विधि भी तैयार की जाएगी।
इसमें ग्रामीण इलाकों में डिजिटल भुगतान की व्यवस्था को प्राथमिकता दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि नोटबंदी के बाद महज 18 महीने के अंदर नकद लेनदेन उसके पिछले वाले स्तर पर पहुंच गया है। इस दौरान सरकार की डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा देने की तमाम कोशिशें धराशायी साबित हुई हैं।
नहीं कम हुआ नकदी का इस्तेमाल
नोटबंदी के बाद सरकार ने गत वर्ष कैशलेस लेनदेन को बढ़ावा देने के लिए मिशन डिजिधन की शुरुआत की थी। इसका मकसद 2018 तक 2,500 करोड़ डिजिटल लेनदेन करना था, जिसके लिए सरकार ने सभी सरकारी कार्यालयों में भुगतान को डिजिटल मोड में करने के साथ लोगों के लिए लकी ड्रॉ के जरिये रिझाने की कोशिश की थी। नोटबंदी के बाद डिजिटल लेनदेन की संख्या बढ़कर 110 करोड़ तो हुई, लेकिन लोगों ने नकदी का इस्तेमाल करना कम नहीं किया।
गौरतलब है कि मौजूदा समय उपभोक्ताओं को डेबिट कार्ड, भीम ऐप तथा अन्य भुगतान माध्यमों के जरिये 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर कोई शुल्क नहीं देना होता। यह फैसला सरकार ने इसी साल जनवरी में लिया था।