क्या इस तरह लग सकेगी काले धन और नकली नोटों पर लगाम?
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देश की अर्थव्यवस्था को समानांतर ढंग से चुनौती दे रही काले धन और जाली नोटों की समस्या पर लगाम लगाने के लिए मोदी सरकार इलेक्ट्रॉनिक लेन-देन (ई-ट्रांजेक्शन) को बढ़ावा देने की तैयारी में है। इस बारे में एक प्रस्ताव तैयार है, जिसमें नकदी के बजाय डेबिट व क्रेडिट कार्डों के जरिए ज्यादा से ज्यादा भुगतान को तरजीह देकर अर्थव्यवस्था को ज्यादा से ज्यादा प्लास्टिक मनी पर आधारित बनाने की बात कही गई है।
केंद्रीय वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार किए गए प्रस्ताव के मसौदे के मुताबिक ई-ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के कदम से काले धन और जाली मुद्रा की समस्या पर प्रभावी ढंग से काबू पाया जा सकता है। साथ ही कर वसूली करने वाले विभागों को भी व्यक्तियों और कंपनियों द्वारा किए जा रहे भुगतानों का पता चल सकेगा। इससे यह भी पता करने में मदद मिलेगी कि करों का भुगतान आय या खर्चों के अनुरूप किया जा रहा है या नहीं।
प्रस्ताव में छोटे दुकानदारों तक को इलेक्ट्रॉनिक भुगतान के दायरे में लाकर अर्थव्यवस्था के साथ ज्यादा बेहतर ढंग से जोड़ने की बात कही गई है। इन दुकानदारों द्वारा ग्राहकों से कार्ड के जरिए भुगतान लेने और खुद के भुगतान भी इसी तरह करने को बढ़ावा दिया जाएगा। ऐसा करके लगातार बढ़ती जा रही नकली नोटों व सिक्कों की समस्या से भी काफी हद तक निजात पाई जा सकेगी।
मंत्रालय के प्रस्ताव में ई-ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए ग्राहकों और कारोबारियों दोनों ही को लाभान्वित करने की बात कही गई है। ऐसा नकद भुगतान के बजाय इलेक्ट्रानिक ट्रांजेक्शन करने के एवज में उन्हें एक निश्चित सीमा तक कर छूट देकर किया जा सकता है। उदाहरण के लिए कुल लेनदेन का 50 फीसदी ई-ट्रांजेक्शन के जरिए करने वाले कारोबारियों या दुकानदारों को मूल्य वर्धित कर (वैट) में एक-दो फीसदी की छूट दी जा सकती है।
ई ट्रांजेक्शन में होगी नरमी
इसी तरह ग्राहकों को भी एक तयशुदा सीमा के अनुरूप अपने बिलों इलेक्ट्रॉनिक भुगतान करने पर कर छूट दी जा सकती है। ई-ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के लिए प्रस्ताव में ऐसे भुगतानों के लिए जरूरी प्रमाणन (ऑथेंटिकेशन) या पुष्टि से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी कुछ नरमी लाने की बात कही गई है।
नियमों-प्रक्रियाओं में यह नरमी विभिन्न श्रेणी के भुगतानों के लिए उनसे जुड़े जोखिमों और सुरक्षा के स्तर के अनुरूप अलग-अलग तरह की हो सकती है। प्रस्ताव में सामान्य इस्तेमाल से जुड़ी सेवाएं या सुविधाएं देने वाले सेवा प्रदाताओं को अपने ग्राहकों उनके छोटे-मोटे भुगतान भी कार्ड के जरिए करने को बढ़ावा देने के लिए कुछ रियायतें या ऑफर देने की छूट प्रदान करने की बात भी कही गई है।
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि नकद के बजाय इलेक्ट्रॉनिक भुगतान को बढ़ावा देने से कालेधन, जाली नोटों पर लगाम लगाने और कर वसूली बढ़ाने के अलावा भी कई तरह के फायदे हो सकते हैं। इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजेक्शनों के विवरण से लोगों द्वारा विभिन्न मदों में किए जा रहे खर्चों की जानकारी भी सुगमता से मिल सकेगी, जोकि सरकार के लिए वित्तीय समावेशन (फाइनेंशियल इन्क्लूजन) को आगे बढ़ाने में काफी मददगार हो सकती है। इसके साथ ही सरकार इन जानकारियों के आधार पर अपनी आर्थिक और वित्तीय नीतियां बना सकती है या उनमें बदलाव कर सकती है।
नकली नोटों की तादाद होगी कम
नकदी के बजाय ई-भुगतान बढ़ाए जाने की हिमायत काफी अर्से से देश की कई सतर्कता व गुप्तचर एजेंसियां भी करती आई हैं क्योंकि नकली नोटों की बढ़ती तादाद इन सभी के लिए बड़ा सिरदर्द बनी हुई है । इंटेलीजेंस ब्यूरो (आईबी), रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ), राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से तैयार एक साझा रिपोर्ट के मुताबिक देश में प्रचलित हजार रुपये के नोटों में से हर चौथा नोट यानी करीब एक चौथाई नोट नकली है।
ऐसे में नोटों के जरिए भुगतान को कम करके ही इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। इसी तरह कालेधन पर काबू पाने में भी ई-ट्रांजेक्शन काफी मददगार हो सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक ई-ट्रांजेक्शन के जरिए किए जाने वाले बड़े भुगतानों पर कर छूट देकर कर वंचना पर लगाम लगाई जा सकती है। हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नि:शुल्क एटीएम ट्रांजेक्शनों की संख्या घटाए जाने का निर्णय इसमें एक बाधा बन सकता है। इसके तहत ग्राहक अब अपने बैंक के एटीएम से प्रतिमाह अब ज्यादा से ज्यादा पांच नि: शुल्क ट्रांजेक्शन ही कर सकते हैं। इससे ज्यादा एटीएम ट्रांजेक्शन करने पर बैंकों द्वारा ग्राहकों से शुल्क वसूला जा रहा है।