बैंकों की खराब सेवाओं के खिलाफ लोगों की शिकायतें हुईं दोगुनी
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बैंकों की खराब सेवाओं के खिलाफ शिकायतों में तेजी से इजाफा हो रहा है। बीते एक दशक में रोजाना शिकायतों का आंकड़ा दोगुने से भी अधिक पहुंच गया है, जिनमें सर्वाधिक शिकायतें एटीएम से संबंधित हैं। ग्राहकों की शिकायतों में सर्वाधिक सालाना वृद्धि 2008 से 2016 के दौरान देखी गई और यह सालाना 44 फीसदी रही।
वहीं, 2016-17 में सालाना वृद्धि 22 फीसदी से अधिक रही थी। हालांकि कुल में से महज एक फीसदी शिकायतों को ही वैध या योग्य माना गया, जबकि अन्य को अस्वीकार कर दिया गया या फिर उन्हें शिकायतकर्ताओं ने खुद वापस ले लिया।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के मुताबिक, बैंकों की खराब सेवाओं के खिलाफ 2008 तक देशभर से प्रतिदिन औसतन 132 शिकायतें आती थीं। यह आंकड़ा 31 मार्च, 2018 तक बढ़कर 309 शिकायतों पर पहुंच गया। सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी के मुताबिक, गत एक दशक में रोजाना आने वाली शिकायतों का आंकड़ा 134 फीसदी बढ़ा है।
शिकायतों के निपटारे के लिए आरबीआई के 21 अधिकारियों की विशेष इकाई है, जिनके द्वारा वैध या योग्य मानी गई शिकायतों का प्रतिशत एक फीसदी के करीब है। पिछले एक दशक में सबसे ज्यादा शिकायतें 2008 में वित्तीय उथल-पुथल और 2016 में नोटबंदी के दौरान दर्ज की गईं।
22 फीसदी बढ़ीं शिकायतें 2016-17 में
आरबीआई के मुताबिक, 2008-09 में ओम्बुड्समैन के पास आने वाली शिकायतें सालाना आधार पर 44 फीसदी बढ़ीं हैं। 2016-17 से यह आंकड़ा 22 फीसदी से भी ऊपर रहा। वर्ष 2009-10 में ओम्बुड्समैन ने 79,266 शिकायतें स्वीकार कीं, जबकि ठीक एक साल पहले यह आंकड़ा 69,117 था।
इस तरह, इसमें महज एक साल में 15 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। अधिकतर शिकायतें एटीएम, क्रेडिट और डेबिट कार्ड के मुद्दों को लेकर रहीं, जिनमें बैंकों के सेवाएं देने में खरा नहीं उतरने का दावा किया गया।
24 फीसदी शिकायतें एटीएम से जुड़ीं
आरबीआई ओम्बुड्समैन रिपोर्ट यह दर्शाती है कि गत 10 सालों में कुल 24 फीसदी शिकायतें एटीएम से जुड़ी हुई हैं। हाल में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने ग्राहकों द्वारा पैसा निकालने की सीमा को 40,000 रुपये से घटाकर 20,000 रुपये कर दिया है, ताकि कार्ड से जुड़े धोखाधड़ी मामलों में कमी लाई जा सके।
बैंक की पैसा निकालने से जुड़ी नई नीति 31 अक्तूबर से लागू होगी। उल्लेखनीय है कि ग्राहकों द्वारा ओम्बुड्समैन के समक्ष शिकायत दर्ज करने के पश्चात सबसे पहले यह तय किया जाता है कि वह सही है या नहीं। अगर शिकायत को सही पाया जाता है, तो ग्राहकों को ओम्बुड्समैन हर्जाना मुहैया कराता है, जिसकी दर बहुत ही कम है।
सख्त हुए ओम्बुड्समैन योजना के नियम
2016-17 में ओम्बुड्समैन योजना के तहत, महज 31 मामलों को योग्य ठहराया गया, जबकि कुल शिकायतों की संख्या 1,30,987 थीं। केंद्रीय बैंक ने 14 जून, 1995 को ओम्बुड्समैन योजना की अधिसूचना जारी की थी। इस योजना का प्रशासन और खर्च केंद्र बैंक द्वारा वहन किया जाता है।
इसके तहत व्यावसायिक, को-ऑपरेटिव और क्षेत्रीय बैंकों की खामियों के खिलाफ शिकायतें की जाती हैं। हाल में आरबीआई ने ओम्बुड्समैन योजना के नियमों को सख्त किया है। इसके लिए बैंकों ने ग्राहक शिकायतों की समीक्षा के लिए स्वतंत्र आंतरिक ओम्बुड्समैन नियुक्त किए हैं।