सीबीडीटी के चेयरमैन ने दी सफाई, आयकर विभाग नहीं कर रहा है सोशल मीडिया की निगरानी
विदेश यात्रा, महंगी गाड़ी खरीदने या मोटा पैसा खर्च कर अन्य कोई शौक पूरा करने वाले इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर डालना नहीं भूलते। पिछले दिनों खबर आई थी कि आयकर विभाग ऐसी छुपी आय का पता लगाने के लिए सोशल मीडिया पर नजर रखेगा। लेकिन, सीबीडीटी ने रविवार को स्पष्ट किया कि ऐसे किसी कदम की जरूरत नहीं है और लोगों में गलतफहमी न फैलाई जाए।
सीबीडीटी के चेयरमैन ने दी सफाई
इस संदर्भ में केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के चेयरमैन पीसी मोदी ने बताया कि विदेशी यात्रा अथवा अन्य किसी महंगी वस्तु पर किए जाने वाले खर्च और अघोषित आय का पता लगाने के लिए सोशल मीडिया पर निगरानी की जरूरत नहीं है। आयकर विभाग के पास ऐसी जानकारियां जुटाने और आंकड़े एकत्र करने के लिए कई तरह की एजेंसियां मौजूद हैं।
इनकी मदद से बड़े खर्चों और उसके स्रोत से जुड़ी सभी जानकारियां मिल सकती हैं। ऐसा देखा गया है कि कुछ लोग पांच लाख आय के दायरे में आने के बावजूद सालभर में मोटी रकम खर्च करते हैं। इसीलिए बजट में विदेश यात्रा पर दो लाख तक खर्च अथवा खाते में एक करोड़ जमा होने या सालभर में एक लाख रुपये से ज्यादा बिजली खर्च करने वाले को रिटर्न भरने का प्रावधान किया गया है।
विभाग के पास आधिकारिक स्रोत
सीबीडीटी चेयरमैन ने कहा कि आयकर विभाग के पास आधिकारिक स्रोत हैं, जिनसे किसी भी व्यक्ति के आय और व्यय का पता लगाया जा सकता है। इससे हमें किसी की यात्रा अथवा वित्तीय लेनदेन से जुड़ी छोटी-बड़ी सभी जानकारियां मिलती हैं। लिहाजा हमें सोशल मीडिया पर अलग से निगरानी करने की क्या जरूरत है।
हर लेनदेन का मिलेगा संदेश
पीसी मोदी ने बताया कि आयकर विभाग प्रोजेक्ट इनसाइट नाम से उन्नत डाटा तकनीक ला रहा है, जिसमें हर लेनदेन पर लोगों को संदेश भेजा जाएगा। 360-डिग्री रूपरेखा के तहत किसी व्यक्ति को 18 तरह के खर्चों से जुड़े लेनदेन पर संदेश मिलेगा। इसमें बताया जाएगा कि आपको किस खर्च का विवरण आयकर रिटर्न दाखिल करते समय देना होगा और किस पर आयकर चुकाना होगा।
प्री-फिल्ड आईटीआर से होगी आसानी
सीबीडीटी प्रमुख का कहना है विभाग जल्द ही आयकरदाताओं को प्री-फिल्ड आईटीआर उपलब्ध कराएगा। इससे कर अनुपालन में आसानी होगी। विभाग आयकरदाता के लिए अकाउंटेंट की तरह काम करेगा। इसके लिए बैंक, म्यूचुअल फंड, क्रेडिट कार्ड कंपनी और सब-रजिस्ट्रार जैसी थर्ड पाटी एजेंसियों से जानकारी जुटाई जाएगी। आयकरदाता को इसे दाखिल करने से पहले एक बार जांच करनी होगी, जिसमें अगर कोई त्रुटि हो तो दूर की जा सके।