बैंक खाते में न्यूनतम शेष राशि नहीं, जानिए बैंक खाते को बंद कराने के फायदे
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कई बार बैंकिंग को लेकर ऐसे कई मामले देखे गए हैं जो बैंक की तरफ से न्यूनतम शेष राशि रखने पर चार्ज लगाने की शिकायत करते हैं। हाल फिलहाल में भी सोशल मीडिया पर कई ग्राहकों ने इस बात को लेकर शिकायत दर्ज कराई है कि कई बैंक न्यूनतम शेष राशि ना रखने पर गैर रखरखाव जैसा चार्ज वसूल कर रहे हैं, वो भी ऐसे समय में जब कोरोना वायरस की वजह से लोगों को पैसों को लेकर परेशानी हो रही है।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने भी बैंकों से ऐसे समय में 30 जून तक गैर रखरखाव जैसे पेनाल्टी ना लगाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि समयसीमा समाप्त हो चुकी है लेकिन उसके बाद भी कई मामले ऐसे सामने आए हैं जहां जून के महीने में ही बैंकों ने गैर-रखरखाव जैसे चार्ज ग्राहकों से वसूल किए हैं।
नवंबर 2014 में भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से जारी किए गए एक नोटिफिकेशन के तहत बैंक खाते में न्यूनतम शेष राशि ना रखने पर लगाए गए गैर रखरखाव चार्ज से खाते का बैलेंस कभी भी नकारात्मक संख्या में नहीं जा सकता है। नोटिफिकेशन में कहा गया है कि यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि बचत खाते में शेष पूरी तरह से न्यूनतम शेष राशि के रखरखाव के लिए शुल्क ना वसूलने के कारण नकारात्मक शेष में बदल जाता है।
न्यूनतम शेष राशि पर गैर रखरखाव चार्ज
जुलाई 2019 में लोकसभा में एक सवाल के जवाब देने के दौरान वित्त मंत्री ने कहा था कि 18 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और चार निजी क्षेत्र के बैंकों ने पिछले तीन साल में न्यूनतम शेष राशि पर गैर रखरखाव चार्ज से करीब 10,000 करोड़ रुपये वसूले हैं। बैंक ग्राहक से न्यूनतम बैलेंस ना रखने पर गैर रखरखाव जैसी पेनाल्टी वसूल कर सकते हैं लेकिन इसकी कोई सीमा नहीं है।
बैंक बोर्ड की ओर से एक सीमा तय कर देनी चाहिए। बैंक खाते की अलग-अलग लोकेशन होने की वजह अलग चार्ज करते हैं। आरबीआई ने बैंकों को वास्तविक शेष राशि और न्यूनतम शेष राशि की जरूरतों के हिसाब से शुल्क लगाने के निर्देश दिए हैं।
अपने निष्क्रिय खाते को बंद करें
ग्राहक तक अपनी बात पहुंचाने के लिए बैंक एसएमएस, मेल या दूसरे तरह के माध्यम का इस्तेमाल करते हैं ताकि ग्राहक को बताया जा सके कि खाते में न्यूनतम शेष राशि नहीं है और इस पर बैंक शुल्क लगा सकता है। इसलिए समय रहते अपने अप्रभावी खाते को बंद कर दें ताकि इस तरह के शुल्क से बचा जा सके।
दो साल तक कोई ट्रांजैक्शन ना होने पर या खाते के निष्क्रिय हो जाने पर बैंक ग्राहक से पैसा नहीं वसूल कर सकता। खाते बंद करने से पहले अपने सभी निवेश, एसआईपी और ईएमआई जो खाते से जुड़ी हुई है, उन्हें डी लिंक यानि हटा दें।