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संभल कर, ऑनलाइन धोखा है फिशिंग
नई दिल्ली/कारोबार डेस्क
Updated Mon, 29 Oct 2012 05:58 PM IST
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फिशिंग ऑनलाइन धोखाधड़ी की एक तकनीक है। इसका इस्तेमाल अपराधी ऑनलाइन खरीदार को लुभाने के लिए करते हैं, जिससे कि आप अपनी व्यक्तिगत जानकारी उन्हें मुहैया करा दें। यानी, लोगों के पैसे और निजी जानकारी की चोरी का सबसे तेजी से बढ़ता ऑनलाइन आपराधिक तरीका फिशिंग है।
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फिशर (ऑनलाइन जालसाज) आपको लुभाने के कई तरह के अपनाते हैं। इनमें ऐसे ई-मेल और वेबसाइट्स शामिल हैं, जो जाने-माने और विश्वसनीय ब्रांड की नकल होती है। फिशिंग में ‘स्पैमिंग’ सबसे आम तरीका होता है, जिसमें रिसीवर को ऐसी प्रसिद्ध वेबसाइट या कंपनी, जिन पर रिसीवर भरोसा कर सकता है, की ओर से नकली संदेश भेजा जाता है।
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नकली संदेश का उद्देश्य यह होता है कि ग्राहक से निजी जानकारियां मसलन नाम और यूजर का नाम, पता और फोन नंबर, पासवर्ड या पिन, बैंक का खाता नंबर, एटीएम/डेबिट या क्रेडिट कार्ड नंबर, क्रेडिट कार्ड वेलिडेशन कोड या कार्ड वेलिडेशन वैल्यू और सोशल सिक्योरिटी नंबर आदि धोखे से हासिल कर लेता है।
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इसके जरिए वह खरीदार को लाखों रुपये की चपत लगा सकता है। इसलिए, जरूरी है कि ऑनलाइन लेनदेन में काफी सतर्कता बरतें और फिशिंग से अपने को सुरक्षित बनाएं।
बढ़ रहा है ऑनलाइन शॉपिंग का चलन
ऑनलाइन शॉपिंग का चलन बढ़ता जा रहा है। एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का ऑनलाइन खरीद-बिक्री बाजार फिलहाल करीब 2,000 करोड़ रुपये का है, वहीं साल 2015 में यह बढ़कर 7,000 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार ऑनलाइन खरीदारी में मुंबई का स्थान पहले नंबर पर है, जबकि दूसरा नंबर अहमदाबाद का आता है। वहीं इस मामले में दिल्ली का नंबर तीसरे पायदान पर है। रिपोर्ट के मुताबिक मुंबई में 65 फीसदी लोग ऑनलाइन खरीदारी के पक्ष में हैं, जबकि दिल्ली में यह आंकड़ा 45 फीसदी का है।