{"_id":"10726f88-4d9a-11e2-9941-d4ae52bc57c2","slug":"avoid-these-mistakes-in-retirement-planning","type":"story","status":"publish","title_hn":"रिटायरमेंट प्लानिंग में इन गलतियों से बचें","category":{"title":"Personal Finance","title_hn":"पर्सनल फाइनेंस","slug":"personal-finance"}}
रिटायरमेंट प्लानिंग में इन गलतियों से बचें
अमर उजाला टीम
Updated Mon, 24 Dec 2012 12:48 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जिंदगी की भागदौड़ और जटिलताएं अकसर आदमी को भविष्य में ज्यादा दूर तक देखने का मौका ही नहीं देती हैं। ऐसे में खुद की जिंदगी से जुड़ी एक बेहद अहम चीज कहीं पीछे छूट जाती है, वह है बुढ़ापे में गुजर-बसर का इंतजाम करना यानी रिटायरमेंट प्लानिंग। हाल के एक सर्वे के मुताबिक हमारे देश में करीब 80 फीसदी लोग रिटायरमेंट की कोई प्लानिंग नहीं कर पाते हैं।
विज्ञापन
जो लोग कुछ प्लानिंग करते भी हैं, वह अक्सर उनकी भावी जरूरतों और जीवन शैली को देखते हुए नाकाफी ठहरती है। इसलिए बहुत जरूरी है कि रिटायरमेंट की प्लानिंग करते वक्त दिमाग को पूरी तरह खुला रखा जाए और एक सुलझा हुआ रवैया अपनाते हुए ऐसी योजना तैयार की जाए कि बाद में पछताना और परेशानियों का सामना न करना पड़े। रिटायरमेंट की प्लानिंग में की जाने वाली कुछ आम गलतियों के बारे में जान-समझ कर आप इनसे बच सकते हैं।
विज्ञापन
खर्चों का सही आकलन न कर पाना
खर्चों का हिसाब-किताब रिटायरमेंट प्लानिंग का पहला कदम होता है। इसलिए यह सबसे महत्वपूर्ण भी होता है। खर्चों का अगर आपने ठीक-ठीक आकलन नहीं किया है तो बहुत संभव है कि आपका रिटायरमेंट फंड कम पड़ जाए। इसलिए अंदाजे से काम चलाने के बजाय आप अपने पिछले कुछ महीनों के मासिक खर्च का एक विवरण तैयार करें और इसके औसत के आधार पर अपने फंड की राशि तय करें, तो यह आपके लिए माकूल रहेगा।
विज्ञापन
महंगाई का ध्यान न रखना
रोजमर्रा की जिंदगी में तो लोग महंगाई की दुहाई देते नहीं थकते, पर रिटायरमेंट प्लानिंग के वक्त अकसर इसे भुला देते हैं। नतीजा यह होता है कि महंगाई के प्रभाव के चलते समय आने पर आपका फंड बौना साबित होता है। ऐसा इसलिए होता है कि बीतते हर साल के साथ रुपये का मूल्य या उसकी क्रय शक्ति कम पड़ती जाती है। मोटे तौर पर इसे इस तरह समझें कि आज जो सामान आप 10 रुपये में खरीद रहे हैं, 15-20 साल बाद उसके लिए दो गुनी से ढाई गुनी तक रकम खर्च करनी पड़ सकती है। अत: महंगाई के चलते आने वाले इस अंतर को ध्यान में रखना बहुत जरूरी है।
रिटायरमेंट फंड से पैसे निकालते रहना
रिटायरमेंट को एक दूर की चीज मानते हुए अकसर लोग अपनी तात्कालिक जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने रिटायरमेंट फंड से पैसा निकालते रहते हैं। बेटी की शादी हो या बेटे का प्रोफेशनल कोर्स में दाखिला, पैसों के लिए नजर अकसर सबसे पहले रिटायरमेंट फंड पर ही पड़ती है। कई बार तो लोग गाड़ी खरीदने, कंस्ट्रक्शन कराने या फिर विदेश जाने तक के लिए इस फंड में सेंध लगाने से बाज नहीं आते। इसलिए रिटायरमेंट फंड को हाथ लगाने से पहले यह जरूर सोच लें कि यह पैसा उस वक्त के लिए है, जब आपकी कोई कमाई नहीं होगी और जिंदगी इसी के सहारे गुजारनी होगी।
अलग मेडिकल फंड न रखना
बीमार पड़ने पर लोग बड़े से बड़े डॉक्टर को दिखाने और अच्छा से अच्छा इलाज कराने में पैसे की कमी आड़े नहीं देते, पर रिटायरमेंट प्लानिंग करते वक्त इस बारे में नहीं सोचते हैं। इसके चलते बुढ़ापे में उन्हें बीमारियों केचलते काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालांकि सोचना यह चाहिए कि बुढ़ापे में बीमारियों और स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों का सामना ज्यादा करना पड़ता है। इसलिए समझदारी इसी में है कि रिटायरमेंट फंड में मेडिकल खर्चों के लिए अलग से कुछ ठोस व्यवस्था करके रखी जाए।
छोटी अवधि की प्लानिंग करना
उम्र 30 साल के पार पहुंचने पर लोग जब रिटायरमेंट की प्लानिंग करते भी हैं तो उसमें भी एक कंजूसी कर जाते हैं कि रिटायरमेंट के बाद अकसर महज 10 से 15 साल की प्लानिंग करते हैं, यानी ज्यादा से ज्यादा 70 से 75 वर्ष की उम्र तक का ही इंतजाम करना पर्याप्त समझा जाता है। साफ है कि प्लानिंग के समय इस बात को भुला दिया जाता है कि मेडिकल साइंस में हुई तरक्की और जीवनशैली में आए सुधार ने लोगों की जीवन प्रत्याशा को बढ़ा दिया है। ऐसे में रिटायरमंट के बाद 25 से 30 साल की प्लानिंग करना जरूरी है।
रिटायर होने से पहले चुका दें लोन
रिटायरमेंट की प्लानिंग करते वक्त एक बहुत जरूरी बात ध्यान में यह रखनी चाहिए रिटायरमेंट से पहले-पहले अपने ज्यादा से ज्यादा कर्जे चुका दिए जाएं। ऐसा करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि रिटायर होने के बाद आप कमा नहीं रहे होंगे। उस समय आपको जिंदगी केवल उन्हीं पैसों पर चलानी होगी, जोकि आपके रिटायरमेंट फंड के जरिये आपको मिलेंगे। इस तरह देखें तो आपका यह निवेश व बचत समय के साथ खत्म होती जाएगी। इसलिए इस फंड में से लोन की अदायगी न करनी पड़े, यही बेहतर होगा।