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ई-कॉमर्स बाजार पर पाबंदियां ठीक नहीं, रोक-टोक से होगा नुकसान : नीति आयोग

Wed, 08 Aug 2018 05:00 AM IST
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली
पीयूष पांडेय, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 08 Aug 2018 05:00 AM IST
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restriction on e-commerce website will have repulsive effect, says niti aayog

नीति आयोग ने केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय द्वारा लाई जा रही राष्ट्रीय ई-कॉमर्स नीति के मसौदे के प्रावधानों से उलट अपनी राय जताई है। आयोग का कहना है कि ई-कॉमर्स देश में रोजगार सृजन करने वाला क्षेत्र है और इसे बिना किसी रोक-टोक के आगे बढ़ने देना चाहिए।

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मंत्रालय ने ई-कॉमर्स नीति में ऑनलाइन बाजार के कामकाज में विभिन्न स्तरों पर रोक लगाने की कई तरह की सिफारिशें की हैं। इसमें एक साथ बड़ी खरीद पर अंकुश, डिस्काउंट पर लगाम और ग्राहकों का डाटा एकत्र करने पर रोक लगाना जैसे प्रावधान शामिल किए गए हैं। 
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केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु के नेतृत्व में तैयार की गई ई-कॉमर्स राष्ट्रीय नीति के मसौदे से फ्लिपकार्ट और अमेजॉन भी संतुष्ट नहीं हैं। माना जा रहा है कि उन्होंने सरकार से इस मसौदे पर एक बार फिर से गौर करने के लिए कहा है। ऐसे में सरकार इस पर पुनर्विचार कर सकती है, क्योंकि वह इस नीति को सबकी सहमति से लाना चाहती है। 
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नीति आयोग ने दिए हैं सुझाव 

नीति आयोग के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अमिताभ कांत के मुताबिक, थिंक टैंक ने ई-कॉमर्स नीति के मुद्दे पर हुई तमाम बैठकों में हिस्सा लिया और अपने सुझाव भी दिए। आयोग का यही विचार है कि चूंकि ई-कॉमर्स देश में रोजगार पैदा करने वाला क्षेत्र है, ऐसे में उसे बिना किसी रोकटोक के फलने-फूलने देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में इस क्षेत्र के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर नियम के अलावा और कोई नीति नहीं है। ई-कॉमर्स नीति में बिजनेस-टू-बिजनेस 100 फीसदी एफडीआई की अनुमति है, जबकि बिजनेस-टू-कज्यूमर के लिए एफडीआई मंजूर नहीं है। 

नई नीति से ग्राहकों के हितों की रक्षा 

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वाणिज्य मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी के मुताबिक, फिलहाल नीति तैयार होने की प्रक्रिया में है। हमारा इरादा पूरी तरह संतुलित नियम और कायदे लागू करना है। मौजूदा मसौदे में ऐसी कोई सिफारिश नहीं है, जिससे ई-कॉमर्स बाजार प्रभावित होगा। यह अलग मुद्दा है कि यह बाजार पहले बिना नियम के चल रहा था। नई नीति से ग्राहकों के हितों की रक्षा सहित अन्य व्यवस्था कायम होगी। 

बीटूसी में एफडीआई पर विचार 

अधिकारी ने कहा कि इस क्षेत्र में एफडीआई को बिजनेस-टू-कंज्यूमर (बीटूसी) स्तर पर मंजूर किए जाने पर भी विचार किया जा रहा है। लंबे विचार-विमर्श के बाद इस नीति का मसौदा तैयार किया गया है। लेकिन अभी यह सिर्फ  मसौदा है, अंतिम निर्णय नहीं। ई-कॉमर्स पर राष्ट्रीय नीति का मसौदा तैयार करने के लिए अप्रैल 2018 में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री के नेतृत्व में एक थिंक टैंक का गठन किया गया था, इस पर विभिन्न हिस्सेदारों की राय मांगी गई है। 

गौरतलब है कि मसौदे में ई-कॉमर्स की परिभाषा तय करने की बात भी कही गई है। इससे घरेलू स्तर पर नीति बनाने में मदद मिलेगी। अभी आईटी, डब्ल्यूटीओ, ओईसीडी और यूएनसीटीएडी में इसके लिए अलग-अलग परिभाषाएं हैं। ई-कॉमर्स में एमएसएमई क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए भी कई कदम उठाने की भी सिफारिश की गई है।

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