खुशखबरः मोबाइल वॉलेट की केवाईसी के लिए आरबीआई ने बढ़ाई छह महीने समयसीमा
भारतीय रिजर्व बैंक ने मोबाइल वॉलेट के लिए केवाईसी करने की समयसीमा को छह महीने के लिए बढ़ा दिया है। पहले यह समयसीमा 31 अगस्त को समाप्त हो रही थी। इससे कई प्रीपेड वॉलेट जारी करने वाली कंपनियों को बड़ी राहत मिल गई है।
लोगों के बंद हो जाते मोबाइल वॉलेट
अगर आरबीआई इस डेडलाइन को आगे नहीं बढ़ाता, तो फिर लाखों लोगों के मोबाइल वॉलेट बंद हो जाते। वो इनमें पैसा नहीं डाल सकते हैं। जिन कंपनियों को ग्राहकों को इस डेडलाइन बढ़ाने से फायदा मिलेगा उनमें पेटीएम, मोबिक्विक, एयरटेल मनी, अमेजन पे, ओला मनी, पेयू, फोनपे, आईसीआईसीआई पॉकेट, एचडीएफसी पेजैप, आदि शामिल हैं।
दरअसल, आरबीआई ने केवाईसी कराने की अवधि पहले फरवरी, 2019 तय की थी। बाद में कंपनियों की गुहार पर यह अवधि छह महीने के लिए और बढ़ा दी। केवाईसी पूरी करने के लिए उपभोक्ताओं के पास महज एक दिन का समय बचा था। अनुमान के मुताबिक, अभी तक 30 से 40 फीसदी ग्राहकों ने वॉलेट की केवाईसी पूरी नहीं कराई है। ऐसे में सितंबर से उन्हें इन वॉलेट का इस्तेमाल करने में परेशानी हो सकती थी।
बदल गए हैं केवाईसी नियम
आरबीआई ने वॉलेट केवाईसी नियमों में बदलाव किया है। नए मानकों के तहत वॉलेट पर ग्राहक को पैन कार्ड, आधार नंबर जैसे दस्तावेज अपलोड कराने होते हैं और उसके बाद संबंधित कंपनी के एजेंट पते पर जाकर सत्यापित भी करते हैं।
वॉलेट कंपनियों का कहना है कि भौतिक सत्यापन से उनका खर्च कई गुना बढ़ गया है। पेटीएम और अन्य वॉलेट कंपनियों ने आरबीआई से वीडियो केवाईसी कराने का विकल्प देने का अनुरोध भी किया था, लेकिन अभी इस पर फैसला नहीं हुआ है।
50 करोड़ से ज्यादा उपभोक्ता
देश में अभी एक दर्जन से भी ज्यादा भुगतान वॉलेट लोकप्रिय हैं। इनसे जुड़े ग्राहकों की कुल संख्या 50 करोड़ से भी ज्यादा है। अकेले पेटीएम के पास मौजूदा समय में 35 करोड़ से ज्यादा ग्राहक हैं। इसके अलावा गूगल-पे, फोनपे, मोबिक्विक, योनो एसबीआई, आईसीआईसीआई पॉकेट, एचडीएफसी पेजैप, भीम एप, अमेजन-पे और फ्रीचार्ज का भी करोड़ों उपभोक्ता इस्तेमाल कर रहे हैं।
केवाईसी कराते समय बरतें सावधानी
पेटीएम ने अपने उपभोक्ताओं को सलाह दी है कि कंपनी के एग्जीक्यूटिव से ही वॉलेट की केवाईसी पूरी करें। इसके लिए एनीडेस्क और क्वीकस पार्ट जैसे एप का इस्तेमाल न करें। कंपनी ने कहा कि है कि ऐसे रिमोट एप के जरिये जालसाज आपके फोन से जानकारियां हैक कर वित्तीय चपत लगा सकते हैं।
अगर किसी वजह से यह एप डाउनलोड करते भी हैं तो वेरिफिकेशन कोड किसी से भी शेयर न करें। चाहे वह बैंक या मोबाइल वॉलेट कंपनी का एग्जिक्यूटिव ही क्यों न हो।